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मासिक धर्म के दौरान यहां आज भी गौशाला में रखी जाती हैं महिलाएं

Sun, 08 Apr 2018 09:02 AM IST
भक्त दर्शन पांडेय, बागेश्वर
भक्त दर्शन पांडेय, बागेश्वर Updated Sun, 08 Apr 2018 09:02 AM IST
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women lives in cowshed during periods in bageshwar district of uttarakhand

दुनिया बदली, परंपराएं, रूढ़ियां, सोच सब कुछ बदला लेकिन बागेश्वर जिले के मल्ला दानपुर के कई गांवों की परंपरा नहीं बदली। यहां आज भी मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ भेदभाव होता है। उनके साथ छुआछूत का व्यवहार किया जाता है। 21वीं सदी में जहां बेटियां आसमान छू रही हैं वहीं इन गांवों में मासिक धर्म होने पर किशोरियों और महिलाओं को जानवरों के गोठ में रखा जा रहा है। उनको कम से कम चार रातें गौशाला में गुजारनी पड़ती हैं।

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ऐसा नहीं है कि मल्ला दानुपर दुनिया से कटा हुआ है। यहं के लोग देश के कोने-कोने में हैं  और बहुत से लोग तो विदेश में भी हैं। लेकिन ग्राम्य समाज आज भी रूढ़िवादी परंपरा से बाहर नहीं निकल सका है।

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घर में घुसने की नहीं मिलती इजाजत

women lives in cowshed during periods in bageshwar district of uttarakhand
bageshwar women

उच्च हिमालय से लगा होने के कारण इस क्षेत्र में आठ माह तक कड़ाके की ठंड पड़ती है। ऐसे में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सीमित गर्म कपड़ों में जानवरों के गोठ (गौशाला) में पुआल के बिछौने पर सर्द रातें गुजारनी पड़ती हैं। कई घरों में तो महिलाएं दिन के समय घर में प्रवेश कर सकती हैं लेकिन कुछ घर ऐसे भी हैं जहां चार दिनों तक प्रवेश नहीं करने दिया जाता।

देवी-देवताओं के भय से रखा जाता है अलग

पर्वतीय क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को अछूत माना जाता है। कम से कम चार दिनों तक महिलाओं को घर के एक कमरे में अलग रखा जाता है। इस दौरान रसोई और देवालयों में प्रवेश वर्जित रहता है। पांचवें दिन गोमूत्र से शुद्धीकरण के बाद ही सामान्य रूप से कामकाज की अनुमति होती है। लेकिन मल्ला दानपुर क्षेत्र में महिलाओं को घर में ही प्रवेश की अनुमति नहीं होती है। गांव के बुजुर्गों की मानें तो सभी घरों में देवी-देवताओं के मंदिर हैं। मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को घर में रखने से देवी-देवता रुष्ट हो जाते हैं, इसलिए उनको गौशाला में रखा जाता है। हालांकि शेष कुमाऊं में अब बर्जनाएं टूट रही हैं। अधिकतर लोग अब महिलाओं के साथ इस दौरान भेदभाव नहीं करते।

धरा सोसायटी बनेगी किशोरियों की आवाज

मासिक धर्म के दौरान गोठ में रखने की परंपरा को पढ़ी-लिखी किशोरियां और महिलाएं गलत बताती हैं। क्षेत्र की प्रियंका, दीपा दानू, रेनू, प्रेमा देवी, हंसी, भावना आदि का कहना है कि मासिक धर्म के दौरान हर परिवार को महिलाओं के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। महिलाओं के उत्थान के लिए काम कर रही धरा सोसायटी के सचिव विशन सिंह रजवार का कहना है कि यह परंपरा उस दौर से चली आ रही हैं जब पर्याप्त साधन नहीं हुआ करते थे। आज सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध हैं। गांव की महिलाओं को स्वच्छता के लिए जागरूक किया जा रहा है। किशोरियों एवं महिलाओं को पीड़ा पहुंचाने वाली परंपरा को खत्म करने के लिए बुजुर्गों से भी बातचीत की जा रही है।

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