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न्यायधीश पति पर पत्नी ने लगाया उत्पीड़न का आरोप, बॉम्बे हाई कोर्ट को लिखा पत्र
Wed, 31 Jul 2019 08:21 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 31 Jul 2019 08:21 PM IST
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मुंबई हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में एक सत्र अदालत न्यायाधीश की पत्नी ने बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर शिकायत की है कि उसके पति और ससुराल के लोग उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। महिला के वकील ने बुधवार को कहा कि 29 जुलाई को पत्र प्राप्त होने के बाद मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग ने उसे उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को प्रारंभिक जांच के लिए भेज दिया है। पत्र में महिला ने अपने पति के खिलाफ जांच की मांग की है।
महिला ने कहा कि उसने मई 2007 को न्यायाधीश से विवाह किया था जो वर्तमान में पुणे जिले के बारामती में तैनात हैं। महिला ने पत्र में लिखा है कि मेरे पति और ससुराल के लोगों ने विवाह के तुरंत बाद मुझे और मेरे परिवार को दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पांच लाख रुपये, फर्नीचर देने और विवाह का खर्च उठाने के बाद भी मेरे पति और उनके परिवार ने बाद में एक कार और 30 एकड़ कृषि भूमि की मांग शुरू कर दी।
महिला ने आरोप लगाया कि उसके पिता की 2008 में मृत्यु के बाद उसके ससुराल वालों ने यह मांग शुरू कर दी कि उसके पिता की जमीन न्यायाधीश के नाम कर दी जाए। पत्र में महिला ने दावा किया है कि जब उसने इससे इनकार किया तो उसके पति और उनके अभिभावकों ने उससे मारपीट की और उसे घर से बाहर कर दिया। उसने कुछ समय लातूर में अपनी मां के घर बिताया। जब उसके पति की तैनाती अकोला में हुई तो वह उनके साथ रहने गई लेकिन उसे फिर से जाने के लिए मजबूर कर दिया गया।
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महिला ने कहा कि उसने मई 2007 को न्यायाधीश से विवाह किया था जो वर्तमान में पुणे जिले के बारामती में तैनात हैं। महिला ने पत्र में लिखा है कि मेरे पति और ससुराल के लोगों ने विवाह के तुरंत बाद मुझे और मेरे परिवार को दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पांच लाख रुपये, फर्नीचर देने और विवाह का खर्च उठाने के बाद भी मेरे पति और उनके परिवार ने बाद में एक कार और 30 एकड़ कृषि भूमि की मांग शुरू कर दी।
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महिला ने आरोप लगाया कि उसके पिता की 2008 में मृत्यु के बाद उसके ससुराल वालों ने यह मांग शुरू कर दी कि उसके पिता की जमीन न्यायाधीश के नाम कर दी जाए। पत्र में महिला ने दावा किया है कि जब उसने इससे इनकार किया तो उसके पति और उनके अभिभावकों ने उससे मारपीट की और उसे घर से बाहर कर दिया। उसने कुछ समय लातूर में अपनी मां के घर बिताया। जब उसके पति की तैनाती अकोला में हुई तो वह उनके साथ रहने गई लेकिन उसे फिर से जाने के लिए मजबूर कर दिया गया।
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