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पति के इलाज को मांगी मदद: सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल से खर्च में कमी पर विचार करने को कहा

Sat, 14 Aug 2021 02:21 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 14 Aug 2021 02:21 AM IST
सार

पीठ ने अस्पताल की ओर से पेश वकील श्रीनिवास राव से कहा कि वह मामले में कागजात देखें और बताएं कि अस्पताल ने लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए जो खर्च बताया है, क्या उसमें कोई कमी हो सकती है।
 

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woman help sought from Supreme Court for husband treatment
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

पति के लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए वित्तीय मदद की गुहार करने वाली एक महिला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल से कहा कि वह देखे कि क्या अनुमानित खर्च में कमी की जा सकती है?

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दरअसल एक महिला ने याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पति के लंग्स का ट्रांसप्लांट होना है। इसके लिए उसे पीएम केयर या स्टेट सीएम रिलीफ फंड से एक करोड़ रुपये की सहायता दिलवाई जाए।
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जस्टिस एल नागेश्वर राव व जस्टिस अनिरुद्ध की पीठ ने कहा कि वह अस्पताल को कोई निर्देश नहीं दे रहे हैं बल्कि सिर्फ यह अपील कर रहे हैं कि क्या इस मामले में कुछ राहत दी जा सकती है। क्याइलाज में आने वाले खर्च को कम किया जा सकता है।
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अस्पताल के वकील ने पीठ को बताया कि मरीज की स्थिति ठीक हो रही है और अगर स्वास्थ्य में सुधार जारी रहा तो हो सकता है कि लंग्स के ट्रांसप्लांट की जरूरत ही न पड़े। इस पर पीठ ने कहा कि यह अच्छी बात है। आप अगले हफ्ते अस्पताल से निर्देश लेकर आएं कि क्या वह इलाज के खर्च में कोई छूट दे सकता है। हम सोमवार, 16 अगस्त को अगली सुनवाई करेंगे।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि उनके पति का इलाज भोपाल एम्स में ईसीएमओ मशीन नहीं होने के कारण नहीं हो पाया तो उन्हें एयर लिफ्ट कर तेलंगाना में सिकंदराबाद के आईएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पति को वित्तीय सहायता न देना संविधान के अनुच्छेद 14 एवं अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।


राज्य की जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया कराए और कोविड जैसे संकट में यह जिम्मेदारी विशेष मायने रखती है। उन्होंने अपनी दलील में परमानंद कटारा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया। इसमें कहा गया है कि लोगों के जीवन की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।

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