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जंगल के राजा की निगरानी में बच्चे का जन्म, दर्जनभर शेरों ने रोक लिया था रास्ता
एजेंसी, अहमदाबाद।
Updated Sat, 01 Jul 2017 01:06 AM IST
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शेरों के झुंड से घिरी महिला ने दिया बच्चे को जन्म
- फोटो : TOI
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क्या होगा... जब प्रसव पीड़ा से कराह रही किसी महिला को शेरों के झुंड के बीच बच्चे को जन्म देना पड़े। यह सोचकर ही मन सिहर जाता है। लेकिन गुजरात के अमरेली के जाफराबाद तालुका के लुंसापुर गांव की 32 साल की मधुबेन मकवाना को इस हालात से गुजरना पड़ा। उनके लिए 29 जून कभी न भूलने वाली तारीख होगी। गिर के जंगल में रात के 2.30 बजे 12 शेरों के झुंड से घिरी एक एंबुलेंस में मधुबेन ने एक बच्चे को जन्म दिया। उनकी डिलीवरी किसी डॉक्टर ने नहीं बल्कि एंबुलेंस के टेक्नीशियन ने कराई।
दरअसल, प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद महिला के घरवालों ने 108 नंबर पर आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया। जब एंबुलेंस महिला को लेकर अस्पताल के लिए निकली तो गांव से करीब तीन किलोमीटर की दूर ही उसका सामना शेरों के एक झुंड से हो गया। 11-12 शेर सड़क पर घूम रहे थे। यह देख एंबुलेंस चालक ने गाड़ी धीमी कर दी। लेकिन शेरों का झुंड एंबुलेंस के करीब आ गया और उसे घेर लिया।
अमरेली जिले के 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के आपातकालीन प्रबंधन एक्जीक्यूटिव चेतन गढ़े ने बताया कि उन्होंने गाड़ी रोककर शेरों के हटने का इंतजार किया। इसका कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि शेरों का झुंड जाने को तैयार ही नहीं था। तभी गर्भवती महिला की हालत बिगड़ने लगी।
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ऐसे में एंबुलेंस स्टाफ ने गाड़ी के भीतर ही प्रसव कराने का फैसला लिया। एंबुलेंस टेक्नीशियन ने डॉक्टर से फोन पर संपर्क साधा और सारी स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद डॉक्टर से मिल रहे सुझावों पर अमल करते हुए सफल डिलीवरी करा दी। इस दौरान शेर एंबुलेंस के चारों ओर चक्कर लगाते रहे। डिलीवरी के बाद नवजात को बेबी वॉर्मर में रखने के बाद एंबुलेंस को आगे बढ़ाना शुरू किया गया। धीरे-धीरे शेर भी सड़क से पीछे हट गए। गढ़े ने बताया कि महिला और नवजात को जाफराबाद सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों ठीक हैं।
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दरअसल, प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद महिला के घरवालों ने 108 नंबर पर आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया। जब एंबुलेंस महिला को लेकर अस्पताल के लिए निकली तो गांव से करीब तीन किलोमीटर की दूर ही उसका सामना शेरों के एक झुंड से हो गया। 11-12 शेर सड़क पर घूम रहे थे। यह देख एंबुलेंस चालक ने गाड़ी धीमी कर दी। लेकिन शेरों का झुंड एंबुलेंस के करीब आ गया और उसे घेर लिया।
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अमरेली जिले के 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के आपातकालीन प्रबंधन एक्जीक्यूटिव चेतन गढ़े ने बताया कि उन्होंने गाड़ी रोककर शेरों के हटने का इंतजार किया। इसका कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि शेरों का झुंड जाने को तैयार ही नहीं था। तभी गर्भवती महिला की हालत बिगड़ने लगी।
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ऐसे में एंबुलेंस स्टाफ ने गाड़ी के भीतर ही प्रसव कराने का फैसला लिया। एंबुलेंस टेक्नीशियन ने डॉक्टर से फोन पर संपर्क साधा और सारी स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद डॉक्टर से मिल रहे सुझावों पर अमल करते हुए सफल डिलीवरी करा दी। इस दौरान शेर एंबुलेंस के चारों ओर चक्कर लगाते रहे। डिलीवरी के बाद नवजात को बेबी वॉर्मर में रखने के बाद एंबुलेंस को आगे बढ़ाना शुरू किया गया। धीरे-धीरे शेर भी सड़क से पीछे हट गए। गढ़े ने बताया कि महिला और नवजात को जाफराबाद सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों ठीक हैं।