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मानव विकास सूचकांक में एक अंक के सुधार के साथ 130वें स्थान पर पहुंचा भारत 

Fri, 14 Sep 2018 08:43 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली   Updated Fri, 14 Sep 2018 08:43 PM IST
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with the improvement of one rank, india is on 130th rank in human development index
मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) को लेकर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की शुक्रवार शाम को जारी हुई ताजा रिपोर्ट में भारत ने 130 वां स्थान हासिल किया है।यह रिपोर्ट साल 2017 के विकास पर आधारित है। इससे पहले 2016 की रिपोर्ट में भारत 131वें स्थान पर था। यूएनडीपी इंडिया के कंट्री निदेशक फ्रांसिन पिकअप ने एचडीआई में सुधार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई योजनाओं का जिक्र किया है। इनमें बेटी बचाओ-पढ़ाओ, स्वच्छ भारत व मेक इन इंडिया आदि योजनाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी के समग्र विकास लक्ष्य ‘किसी को भी पीछे नहीं छोड़ेंगे’ को रिपोर्ट में विशेष तौर पर स्थान दिया गया है।
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1990 और 2017 के बीच भारत का एचडीआई मूल्य 0.427 से हुआ 0.640
यूएनडीपी द्वारा नवीनतम मानव विकास रैंकिंग में भारत 189 देशों में 130 वें स्थान पर पहुंच गया है। 2017 के लिए भारत का एचडीआई मूल्य 0.640 है। इसी के चलते भारत को मानव विकास श्रेणी में रखा गया है। पिछले 27 वर्षों के दौरान इस मूल्य में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह देश में गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लाखों लोगों को उपर उठाने की उपलब्धि का संकेतक है।
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एचडीआई में टॉप पर हैं ये देश
नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और जर्मनी एचडीआई रैंकिंग का नेतृत्व करते हुए शीर्ष पर हैं। वहीं, नाइजर, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, दक्षिण सूडान, चाड और बरूंडी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आय में राष्ट्रीय उपलब्धियों के एचडीआई माप में निम्नतम स्कोर पर  हैं। दक्षिण एशिया में भारत का एचडीआई मूल्य इस क्षेत्र के लिए तय 0.638 के औसत से ऊपर है। सूची में बांग्लादेश 136वें और पाकिस्तान 150वें स्थान पर हैं। 189 देशों में से जिनके लिए एचडीआई की गणना की गई है वह 59 देश आज बहुत अच्छी हालत में हैं। केवल 38 देशों में गिरावट दर्ज की गई है। आठ साल पहले 2010 में ये आंकड़े क्रमश: 46 और 49 देश थे।
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महिला-पुरुषों में असमानता बनी भारत के लिए चुनौती
असमानताओं के कारण भारत का एचडीआई मूल्य 26.8 प्रतिशत कम हुआ है। भारत में नीति और विधायी स्तर पर काफी प्रगति के बावजूद महिलाएं पुरुषों की तुलना में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से कम शक्तिवान हैं। मिसाल के तौर पर, महिलाओं के हिस्से केवल 11.6 प्रतिशत संसदीय सीटें हैं। 64 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में केवल 39 प्रतिशत वयस्क महिलायें कम से कम माध्यमिक स्तर तक पहुंची है। श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के लिए बहुत कम है। 78.8 पुरुषों की तुलना में केवल 27.2 प्रतिशत महिलाएं हैं, फिर भी इस मामले में भारत अपने पड़ोसियों बांग्लादेश और पाकिस्तान से बेहतर हालत में है। लिंग असमानता सूचकांक पर 160 देशों में भारत 127वें स्थान पर है। 

18 वर्ष तक स्कूल में पढ़ते हैं नार्वे में बच्चे 
उच्चतम एचडीआई वाले देश नार्वे में 82 वर्ष तक लोग स्वस्थ जीवन जीते हैं। बच्चे लगभग 18 साल तक स्कूल में पढ़ाई करते हैं। दूसरी ओर, नाइजर में औसत स्वस्थ जीवन 60 वर्ष ही है। यहां औतन पांच साल तक बच्चे स्कूल जाते हैं। कम और मध्यम मानव विकास वाले देश जो कि क्रमशः 31 और 25 प्रतिशत के मानव विकास स्तर पर होते हैं, वे असमानता से हार जाते हैं। जबकि बहुत अधिक मानव विकास दर वाले देशों के लिए यह औसत नुकसान मात्र 11 प्रतिशत है। हालांकि यह अंतराल अब धीरे धीरे कम हो रहा है। यूएनडीपी में मानव विकास रिपोर्ट कार्यालय के निदेशक सेलिम जहां ने कहा, ‘देशों के बीच और उसके भीतर के सभी रूपों और आयामों में असमानता, लोगों के विकल्पों और अवसरों को सीमित करती है’। भारत सरकार और दूसरे देशों की सरकारों ने विभिन्न सामाजिक सुरक्षा उपायों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि आर्थिक विकास के लाभ व्यापक रूप से साझा किए जाएंगे।इससे वे सबसे दूर बैठे व्यक्ति तक पहुंच सकेंगे। 
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