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वंदे मातरम पर सरकार-विपक्ष में रार: संसद सत्र के पहले दिन हंगामे के आसार, रिजिजू बोले- यह सियासी एजेंडा नहीं

Sun, 30 Nov 2025 08:57 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Sun, 30 Nov 2025 08:57 PM IST
सार

संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से आरंभ होगा। विपक्ष ने देश के 12 राज्यों और संघशासित क्षेत्रों में एसआईआर, दिल्ली आत्मघाती बम धमाके और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की खराब स्थिति पर चर्चा कराने की मांग कर सत्र को हंगामेदार बनाने के आसार जता दिए हैं। सत्र के पहले दिन वंदे मातरम को लेकर भी हंगामा देखने को मिल सकता है। 

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winter session Ruckus between government and opposition over Vande Mataram
शीतकालीन सत्र 2025 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संसद के कल से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने के असार हैं। शीतकालीन सत्र से पहले रविवार को सरकार की ओर से सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। माना जा रहा है सोमवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में विपक्ष वंदे मातरम का मुद्दा उठा सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इसे लेकर कहा गया है कि वंदे मातरम बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।
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'वंदे मातरम कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं'
किरेन रिजिजू ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा कि, वंदे मातरम बहुत जरूरी है। हमारी आजादी की लड़ाई में हमने वंदे मातरम का नारा लगाकर अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। बंकिम चंद्र चटर्जी को वंदे मातरम लिखे 150 साल हो गए हैं। पूरा देश इस पर यकीन करता है। यह कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। 150 साल हुए हैं, अगर हमें इस पर बात करनी भी पड़ी, तो मैं इसे सभी पार्टियों के सामने रखूंगा। मैं इसे बीएसी में उठाऊंगा। मैं यहां एजेंडा घोषित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पूरे देश में वंदे मातरम को सम्मान मिलता है और हम सभी पार्टियों के साथ मिलकर इस पर चर्चा चाहते हैं।




 
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मदनी के बयान ने विवाद को दी हवा
हालांकि वंदे मातरम को लेकर विवाद शनिवार को मौलाना महमूद मदनी के बयान के बाद बढ़ गया। भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा था कि मुर्दा कौमें सरेंडर करती हैं। अगर कहा जाएगा 'वंदे मातरम' बोलो...तो वे बोलना शुरू कर देंगी। जिंदा कौम हालात का मुकाबला करती है। राजनीतिक दलों ने मदनी के इस बयान की जमकर आलोचना 
की है। 

 
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कांग्रेस और टीएमसी भी कर रही विरोध
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस ने भी संसद में वंदेमातरम पर रोक का विरोध किया है। ममता बनर्जी ने 26 नवंबर को पत्रकारों से कहा क्यों नहीं बोलेंगे? जय हिंद और वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है। यह हमारी आजादी का नारा है। जय हिंद हमारा नेताजी का नारा है। इससे जो टकराएगा चूर चूर हो जाएगा।

वहीं कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने 27 नवंबर को एक वीडियो जारी कर कहा था, खबरों के मुताबिक, राज्यसभा की बुलेटिन में कहा गया है कि सदन में 'जय हिन्द' और 'वंदे मातरम्' का प्रयोग नहीं होना चाहिए। मैं हैरान हूं कि आखिर इन नारों पर कैसी आपत्ति है? इनसे तो अंग्रेजों को दिक्कत थी, अब भाजपा को भी दिक्कत है। उन्होंने सवाल किया, आखिर किस मिट्टी के बने हैं वे लोग जिनको आजादी के दो सबसे प्रसिद्ध नारों को सदन में बोलना अखरता है? सुप्रिया ने दावा किया कि इन नारों से उन्हीं को दिक्कत हो सकती है जिन्होंने आजादी के आंदोलन में अपनी छोटी उंगली का छोटा नाखून तक नहीं कटाया तथा जो अंग्रेजों की गुलामी और उनके लिए मुखबिरी करते थे।

ये भी पढ़ें: शीतकालीन सत्र: 'SIR पर चर्चा नहीं हुई तो संसद नहीं चलने देंगे...', समाजवादी पार्टी ने दी चेतावनी

ठाकरे केंद्र सरकार को कर चुके हैं चैलेंज
इससे पहले शुक्रवार को उद्धव ठाकरे ने भी वंदे मातरम को लेकर सरकार की ओर से जारी आदेश को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब अविभाजित शिवसेना भाजपा के साथ थी, तब भाजपा कहती थी कि जो इस देश में रहना चाहते हैं, उन्हें वंदे मातरम कहना चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या इस नए निर्देश को जारी करने वाले अधिकारी को पाकिस्तान भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या 'मैकाले की संतानें' भाजपा में घुस आई हैं। उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि उनके सांसद जोर-जोर से वंदे मातरम कहेंगे और देखेंगे कि कौन उन्हें संसद से निकालता है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा में हिम्मत है, तो वह शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसदों को बाहर निकालकर दिखाए। 

दिसंबर में संसद सत्र से पहले जारी किया गया निर्देश
'राज्यसभा सदस्यों के लिए हैंडबुक' में नारे न लगाने का निर्देश है। इसे एक दिसंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र से पहले जारी किया गया है। राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, यह पहला मौका नहीं, जब ऐसा निर्देश जारी किया गया है। नवंबर 2005 में यूपीए सरकार के दौरान भी इसी तरह का परिपत्र (सर्कुलर) जारी हुआ था। 

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