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Parliament Session: संसद में मणिपुर सहित इन मुद्दों पर चलेंगे विपक्षी बाण, क्या है पीएमओ के होमवर्क का राज
सार
Parliament Session: सोमवार को सदन के प्रारंभ होने के पहले ही दिन विपक्षी सदस्यों ने अडानी समूह के मामले को लेकर हंगामा कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा, उक्त समूह को जो कांट्रैक्ट मिले हैं, उनकी बहुत लंबी लिस्ट है। जिस-जिस जगह मोदी गए हैं, उस-उस जगह, कौन-कौन से कांट्रैक्ट उनको मिले हैं, ये बात हम सदन को बताना चाहते हैं।
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संसद सत्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
18वीं लोकसभा का पहला शीतकालीन सत्र, 25 नवंबर से प्रारंभ हुआ है। पहले ही दिन सदन में हंगामा हो गया। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अडानी मामले में केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया। उन्होंने सत्र की शुरुआत में ही नियम 267 के तहत अडानी का मुद्दा उठा दिया। बतौर खरगे, अडानी समूह पर करप्शन, ब्राइबरी और फाइनेंशियल इररेगुलेरिटीज के गंभीर आरोप हैं। उन्होंने लगभग 2,030 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले की जांच के लिए जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी गठित करने की मांग की। नतीजा, सदन एडजर्न कर दिया गया। अब सत्र में विपक्ष द्वारा मणिपुर सहित कई मुद्दों पर जोरदार हंगामा किए जाने के आसार हैं। दूसरी तरफ, सरकार भी विपक्षी बाणों की बौछार झेलने के लिए तैयार है। सरकार ने पहले ही ऐसे 50 मुद्दों पर होमवर्क पूरा कर लिया है, जिन्हें विपक्षी दलों द्वारा सदन में उठाए जाने की संभावना है।
सोमवार को सदन के प्रारंभ होने के पहले ही दिन विपक्षी सदस्यों ने अडानी समूह के मामले को लेकर हंगामा कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा, उक्त समूह को जो कांट्रैक्ट मिले हैं, उनकी बहुत लंबी लिस्ट है। जिस-जिस जगह मोदी गए हैं, उस-उस जगह, कौन-कौन से कांट्रैक्ट उनको मिले हैं, ये बात हम सदन को बताना चाहते हैं। हालांकि राज्यसभा के सभापति ने इसकी इजाजत नहीं दी। कांग्रेस की संसदीय रणनीति समूह की बैठक के बाद जयराम रमेश ने कहा, लोकसभा और राज्यसभा में कई मुद्दे उठाए जाएंगे। इनमें मोडानी घोटाला, मणिपुर की स्थिति, चीन के साथ सीमा समझौता और इससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियां, सामाजिक ध्रुवीकरण, उत्तर प्रदेश के दंगे, प्रदूषण और आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दे, शामिल हैं।
खास बात है कि सरकार उक्त बातों के अलावा करीब 50 मुद्दों पर पहले ही होमवर्क कर चुकी है। सरकार ने पहले से ही यह भांप लिया था कि विपक्ष, सदन में कौन से मुद्दे उठा सकता है।प्रधानमंत्री कार्यालय ने नवंबर के शुरु में ही ऐसे मुद्दों की सूची तैयार उसे विभिन्न मंत्रालयों के पास भेज दिया था, जो सदन में विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा सकते हैं। इसमें कई ऐसे मुद्दे भी शामिल थे, जिन्हें लेकर विपक्ष, सदन में जबरदस्त हंगामा कर सकता है। लगभग 18 मंत्रालयों को ऐसे सवाल भेजे गए थे। संसदीय कार्य मंत्रालय ने संबंधित मंत्रालयों और विभागों से कहा था कि वे ऐसे मुद्दों पर एक ब्रीफ नोट तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय 'पीएमओ' के पास भेज दें।
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डेढ़ दर्जन मंत्रालयों को भेजी गई सवालों की सूची में 'सीएए', भारत और चीन के बीच एलएसी का मामला, ओबीसी आरक्षण, जरुरी वस्तुओं की कीमतों में इजाफा, स्वतंत्रता दिवस पर राहुल गांधी की सीटिंग पॉजिशन, साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्राइवेसी, सेबी हिंडनबर्ग मामला, यूनिफॉर्म सिविल कोड, कोलेजियम सिस्टम, जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले, जल जीवन मिशन, कावेरी जल विवाद और वन नेशन वन इलेक्शन आदि मुद्दे शामिल हैं। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा भेजे गए सवालों में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मौजूदा स्थिति को लेकर भी ब्रीफ नोट मांगा गया है।
कृषि मंत्रालय के तहत जो मुद्दे उठाए जा सकते हैं, उनमें पीएम किसान निधि, किसानों की आय को डबल करना व मिनिमम स्पोर्ट प्राइस शामिल है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय को आवश्यक वस्तुओं की बढ़ रही कीमतों को लेकर नोट तैयार करने के लिए कहा गया था। रक्षा मंत्रालय से भी कई सवालों का जवाब मांगा गया था। इनमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बैठने की स्थिति, महाराष्ट्र में शिवाजी की मूर्ति का गिरना और चीन के साथ एलएसी विवाद शामिल है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फोरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय से साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछा गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के लिए ग्लोबल वार्मिंग और दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर जानकारी मांगी गई। विदेश मंत्रालय से बांग्लादेश का मामला, इजरायल और हमास का युद्ध, इजरायल व ईरान की लड़ाई, रूस व यूक्रेन वॉर और भारत चीन के संबंध, जैसी जानकारी मांगी गई है।
वित्त मंत्रालय से अदाणी मामला, सेबी हिंडनबर्ग मामला, सरकारी कर्मचारियों के लिए यूपीएस योजना, अर्थव्यवस्था पर कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर और ईडी का दुरुपयोग आदि मुद्दों से जुड़े सवालों पर ब्रीफ नोट मांगा गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय से तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट पर जानकारी तलब की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के लिए भेजे गए सवालों की सूची सबसे लंबी है। इसमें सीएए को लागू करना, जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, लद्दाख में स्टेटहुड व छठे शेड्यूल को लेकर सोनम वांग्चुक की मांग, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कालेज में रेप की घटना, जेएंडे में हाल के दिनों में हो रहे आतंकी हमले, मणिपुर हिंसा, जातिगत जनगणना कराने बाबत, विभिन्न राज्यों में सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद, आंध्रप्रदेश और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देना और तीन नए कानूनों में बदलाव की मांग, शामिल है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए सवालों की सूची में ओटीटी और डिजिटल कंटेंट को नियमित करना, सोशल मीडिया की पोस्ट पर फैक्ट चेक को लेकर मुंबई हाईकोर्ट का निर्देश और चुनावों के दौरान हेट स्पीच और उसके जरिए राजनीतिक लाभ उठाना, शामिल है। जल शक्ति मंत्रालय के लिए जल जीवन मिशन और कावेरी जल विवाद को लेकर नोट मांगा गया है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से बेरोजगारी की स्थिति पर नोट भेजने के लिए कहा गया है। कानून एवं न्याय मंत्रालय ने वन नेशन वन इलेक्शन, यूनिफॉर्म सिविल कोड, एंटी डिफेक्शन लॉ, कोलेजियम सिस्टम, राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग 'एनजेएसी', और निर्वाचन प्रणाली की निष्पक्षता एवं ईवीएम की कार्यप्रणाली पर नोट तैयार किया था।
न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय ने नेशनल ग्रीन हाईड्रोजन मिशन पर नोट तैयार कर से पीएमओ के पास भेज दिया था। डीओपीटी मंत्रालय ने एससी/एसटी क्रीमी लेयर मामले में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का पक्ष, इस पर नोट तैयार कर उसे पीएमओ के पास भेज दिया है। सीबीआई का दुरुपयोग और ओपीएस का पुनः प्रवर्तन, इस मुद्दे पर भी डीओपीटी से नोट मांगा गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय से अयोध्या में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपेंट के लिए अधिगृहण की गई जमीन और मुआवजा राशि को लेकर जानकारी मांगी गई है। सामाजिक न्याय मंत्रालय से सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण और मराठा आरक्षण की मांग को देखते हुए आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को खत्म करना, इस बाबत जानकारी मांगी गई है। सभी मंत्रालयों ने उक्त जानकारी पीएमओ को दे दी है। ऐसे में विपक्षी दल जब उक्त मुद्दों को सदन में उठाएगा तो सरकार उसका सटीक तरीके से जवाब देगी।
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सोमवार को सदन के प्रारंभ होने के पहले ही दिन विपक्षी सदस्यों ने अडानी समूह के मामले को लेकर हंगामा कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा, उक्त समूह को जो कांट्रैक्ट मिले हैं, उनकी बहुत लंबी लिस्ट है। जिस-जिस जगह मोदी गए हैं, उस-उस जगह, कौन-कौन से कांट्रैक्ट उनको मिले हैं, ये बात हम सदन को बताना चाहते हैं। हालांकि राज्यसभा के सभापति ने इसकी इजाजत नहीं दी। कांग्रेस की संसदीय रणनीति समूह की बैठक के बाद जयराम रमेश ने कहा, लोकसभा और राज्यसभा में कई मुद्दे उठाए जाएंगे। इनमें मोडानी घोटाला, मणिपुर की स्थिति, चीन के साथ सीमा समझौता और इससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियां, सामाजिक ध्रुवीकरण, उत्तर प्रदेश के दंगे, प्रदूषण और आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक मुद्दे, शामिल हैं।
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खास बात है कि सरकार उक्त बातों के अलावा करीब 50 मुद्दों पर पहले ही होमवर्क कर चुकी है। सरकार ने पहले से ही यह भांप लिया था कि विपक्ष, सदन में कौन से मुद्दे उठा सकता है।प्रधानमंत्री कार्यालय ने नवंबर के शुरु में ही ऐसे मुद्दों की सूची तैयार उसे विभिन्न मंत्रालयों के पास भेज दिया था, जो सदन में विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा सकते हैं। इसमें कई ऐसे मुद्दे भी शामिल थे, जिन्हें लेकर विपक्ष, सदन में जबरदस्त हंगामा कर सकता है। लगभग 18 मंत्रालयों को ऐसे सवाल भेजे गए थे। संसदीय कार्य मंत्रालय ने संबंधित मंत्रालयों और विभागों से कहा था कि वे ऐसे मुद्दों पर एक ब्रीफ नोट तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय 'पीएमओ' के पास भेज दें।
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डेढ़ दर्जन मंत्रालयों को भेजी गई सवालों की सूची में 'सीएए', भारत और चीन के बीच एलएसी का मामला, ओबीसी आरक्षण, जरुरी वस्तुओं की कीमतों में इजाफा, स्वतंत्रता दिवस पर राहुल गांधी की सीटिंग पॉजिशन, साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्राइवेसी, सेबी हिंडनबर्ग मामला, यूनिफॉर्म सिविल कोड, कोलेजियम सिस्टम, जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले, जल जीवन मिशन, कावेरी जल विवाद और वन नेशन वन इलेक्शन आदि मुद्दे शामिल हैं। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा भेजे गए सवालों में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मौजूदा स्थिति को लेकर भी ब्रीफ नोट मांगा गया है।
कृषि मंत्रालय के तहत जो मुद्दे उठाए जा सकते हैं, उनमें पीएम किसान निधि, किसानों की आय को डबल करना व मिनिमम स्पोर्ट प्राइस शामिल है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय को आवश्यक वस्तुओं की बढ़ रही कीमतों को लेकर नोट तैयार करने के लिए कहा गया था। रक्षा मंत्रालय से भी कई सवालों का जवाब मांगा गया था। इनमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बैठने की स्थिति, महाराष्ट्र में शिवाजी की मूर्ति का गिरना और चीन के साथ एलएसी विवाद शामिल है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फोरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय से साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछा गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के लिए ग्लोबल वार्मिंग और दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर जानकारी मांगी गई। विदेश मंत्रालय से बांग्लादेश का मामला, इजरायल और हमास का युद्ध, इजरायल व ईरान की लड़ाई, रूस व यूक्रेन वॉर और भारत चीन के संबंध, जैसी जानकारी मांगी गई है।
वित्त मंत्रालय से अदाणी मामला, सेबी हिंडनबर्ग मामला, सरकारी कर्मचारियों के लिए यूपीएस योजना, अर्थव्यवस्था पर कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर और ईडी का दुरुपयोग आदि मुद्दों से जुड़े सवालों पर ब्रीफ नोट मांगा गया था। स्वास्थ्य मंत्रालय से तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट पर जानकारी तलब की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के लिए भेजे गए सवालों की सूची सबसे लंबी है। इसमें सीएए को लागू करना, जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, लद्दाख में स्टेटहुड व छठे शेड्यूल को लेकर सोनम वांग्चुक की मांग, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कालेज में रेप की घटना, जेएंडे में हाल के दिनों में हो रहे आतंकी हमले, मणिपुर हिंसा, जातिगत जनगणना कराने बाबत, विभिन्न राज्यों में सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद, आंध्रप्रदेश और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देना और तीन नए कानूनों में बदलाव की मांग, शामिल है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए सवालों की सूची में ओटीटी और डिजिटल कंटेंट को नियमित करना, सोशल मीडिया की पोस्ट पर फैक्ट चेक को लेकर मुंबई हाईकोर्ट का निर्देश और चुनावों के दौरान हेट स्पीच और उसके जरिए राजनीतिक लाभ उठाना, शामिल है। जल शक्ति मंत्रालय के लिए जल जीवन मिशन और कावेरी जल विवाद को लेकर नोट मांगा गया है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से बेरोजगारी की स्थिति पर नोट भेजने के लिए कहा गया है। कानून एवं न्याय मंत्रालय ने वन नेशन वन इलेक्शन, यूनिफॉर्म सिविल कोड, एंटी डिफेक्शन लॉ, कोलेजियम सिस्टम, राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग 'एनजेएसी', और निर्वाचन प्रणाली की निष्पक्षता एवं ईवीएम की कार्यप्रणाली पर नोट तैयार किया था।
न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय ने नेशनल ग्रीन हाईड्रोजन मिशन पर नोट तैयार कर से पीएमओ के पास भेज दिया था। डीओपीटी मंत्रालय ने एससी/एसटी क्रीमी लेयर मामले में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का पक्ष, इस पर नोट तैयार कर उसे पीएमओ के पास भेज दिया है। सीबीआई का दुरुपयोग और ओपीएस का पुनः प्रवर्तन, इस मुद्दे पर भी डीओपीटी से नोट मांगा गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय से अयोध्या में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपेंट के लिए अधिगृहण की गई जमीन और मुआवजा राशि को लेकर जानकारी मांगी गई है। सामाजिक न्याय मंत्रालय से सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण और मराठा आरक्षण की मांग को देखते हुए आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को खत्म करना, इस बाबत जानकारी मांगी गई है। सभी मंत्रालयों ने उक्त जानकारी पीएमओ को दे दी है। ऐसे में विपक्षी दल जब उक्त मुद्दों को सदन में उठाएगा तो सरकार उसका सटीक तरीके से जवाब देगी।