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भगवान ही बचा सकते हैं पुलिस महकमे को: मद्रास हाईकोर्ट ने हैरान होकर की यह टिप्पणी, जानिए क्यों कही यह बात

Wed, 20 Oct 2021 09:39 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 20 Oct 2021 09:39 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने निलंबित पुलिस अधीक्षक डी. कन्नन की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई करते हुए यह गंभीर टिप्पणी की। कन्नन ने यौन प्रताड़ना के केस में खुद को दोषमुक्त करने के लिए यह याचिका दायर की है।

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Will you commit murder if senior directs so, High Court asks police officer
मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : Amar ujala

विस्तार

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान हैरानी जताते हुए सवाल किया कि क्या पुलिस अधिकारी को यदि उसके वरिष्ठ अधिकारी कहेंगे तो वह किसी की हत्या कर देगा? हाईकोर्ट ने हैरानी जताने के साथ यह टिप्पणी भी कि सिर्फ भगवान ही पुलिस महकमे को बचा सकते हैं।

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जस्टिस पी. वेलमुरुगन ने विल्लुपुरम जिले के निलंबित पुलिस अधीक्षक डी. कन्नन की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस विभाग को सिर्फ भगवान ही बचा सकता है। कन्नन ने यौन प्रताड़ना के केस में खुद को दोषमुक्त करने के लिए यह याचिका दायर की है। इस केस में कन्नन दूसरे आरोपी हैं। पहले आरोपी निलंबित डीजीपी हैं, जिन पर एक अधीनस्थ आईपीएस अधिकारी के यौन उत्पीड़न का आरोप है।
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हाईकोर्ट ने कहा, 'यह शर्म की बात है कि पुलिस विभाग में महिलाओं के साथ उस सम्मान के साथ व्यवहार नहीं किया जाता जिसकी वे हकदार हैं।' कन्नन पर आरोप है कि उन्होंने उस कार को रोका, जिसमें महिला एसपी राज्य के पुलिस प्रमुख के पास अपने वरिष्ठ के खिलाफ शिकायत करने के लिए 22 फरवरी को चेन्नई जा रही थीं।
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बुधवार को जब याचिका दायर की गई, तो कन्नन के वकील ने हाईकोर्ट से कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने वरिष्ठ द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना
अवहेलना के समान होती है। इस पर जस्टिस वेलमुरुगन ने पूछा, वरिष्ठ अधिकारी निर्देश दें तो क्या कन्नन किसी की हत्या कर देगा? केवल कानून सम्मत निर्देशों का ही पालन किया जा सकता है। अगर कोई वरिष्ठ अधिकारी ऐसे आरोपों का सामना करता है तो लोगों का विभाग पर भरोसा कैसे होगा? केवल 10 प्रतिशत पुलिस अधिकारी ही अपने विवेक के अनुसार काम कर रहे हैं, इस तरह की घटनाएं विभाग के लिए शर्म की बात है।'

जज के सख्त तेवर देख, याचिका वापस ले ली
जस्टिस वेलमुरुगन के इस मामले में सख्त रुख को भांपते हुए और यह अंदाला लगाते हुए कि वह कन्नन की याचिका खारिज कर देंगे, उनके वकील ने कोर्ट से याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी। इस पर जस्टिस मुरुगन ने याचिका को वापस लेने की इजाजत के साथ खारिज कर दी।

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