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VHP: 'क्या भारतीय रुपये को भी इनकार करेंगे स्टालिन?' VHP ने तमिलनाडु सरकार के रवैये पर उठाया सवाल

Sat, 15 Mar 2025 01:07 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 15 Mar 2025 01:07 PM IST
सार

विनोद बंसल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि रुपये का यह प्रतीक चिह्न तमिलनाडु के ही उदय कुमार द्वारा बनाया गया था। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और नागरिक होने के कारण उन्हें इस पर गर्व महसूस होना चाहिए था कि उनके राज्य के एक व्यक्ति के द्वारा बनाए गए प्रतीक चिह्न को पूरे भारत देश ने गर्व के साथ अपनाया।

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'Will Stalin refuse the Indian rupee too?' VHP raised questions on the attitude of Tamil Nadu government
तमिलनाडु के बजट का पुराना और नया लोगो। - फोटो : ANI

विस्तार

तमिलनाडु की स्टालिन सरकार के द्वारा अपने बजट में रुपये के प्रतीक चिह्न (₹) को हटाकर उसके स्थान पर तमिल भाषा में रु (ரூ) लिखने पर विवाद बढ़ता जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है कि यह स्टालिन सरकार की ओछी मानसिकता को दिखाता है। उन्होंने कहा है कि क्या स्टालिन अब भारतीय रुपये पर लिखे रुपये को भी हटाएंगे? क्या वे ऐसा कर पाएंगे और क्या ऐसा करके वे तमिलनाडु में अपनी पार्टी की सरकार चला पाएंगे?

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विनोद बंसल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि रुपये का यह प्रतीक चिह्न तमिलनाडु के ही उदय कुमार धर्मलिंगम के द्वारा बनाया गया था। वे डीएमके यानी स्टालिन की ही पार्टी के एक पूर्व विधायक एन. धर्मलिंगम के बेटे हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और नागरिक होने के कारण उन्हें इस पर गर्व महसूस होना चाहिए था कि उनके राज्य के एक व्यक्ति के द्वारा बनाए गए प्रतीक चिह्न को पूरे भारत देश ने गर्व के साथ अपनाया। लेकिन इसके बाद भी उनका रुपये के प्रतीक चिह्न का विरोध यह बताता है कि उन्हें तमिलनाडु के गौरव से कुछ भी लेना-देना नहीं है, बल्कि इसके जरिए वे अपनी सियासत चमकाना चाहते हैं। भाषा विवाद के बाद अब स्टालिन देश के विरोध पर उतर आए लगते हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी।
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बंसल ने कहा कि एक भारतवासी होने के कारण हमें अपने देश की हर भाषा पर गर्व है। सबको इनका सम्मान करना चाहिए और यथासंभव जितनी अधिक भाषाएं लोग सीख सकें, उन्हें सीखने की कोशिश भी करनी चाहिए। लेकिन इस तरह भाषा विरोध की राजनीति करते-करते देश के प्रतीकों के विरोध में नहीं उतरना चाहिए।  
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उन्होंने कहा कि उदय कुमार धर्मलिंगम के द्वारा बनाए गए प्रतीक चिह्न को स्टालिन के पिता ने भी स्वीकार किया था। अब स्टालिन के द्वारा इसका विरोध क्या उनके द्वारा स्वयं अपने पिता का अपमान नहीं है। सनातन व हिंदी विरोध के बहाने वे राष्ट्र विरोध के चैंपियन बनने की कोशिश न करें तो अच्छा है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता सब जानती है। डीएमके और इंडी गठबंधन के इन छल-प्रपंचों को अब और नहीं चलने दिया जाएगा। 

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