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Congress: क्या वोट देने का अधिकार बनेगा मौलिक अधिकार? कांग्रेस ने उठाई मांग, चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

Sun, 21 Jun 2026 02:49 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 21 Jun 2026 02:49 PM IST
सार

कांग्रेस ने वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करने की मांग तेज कर दी है। पार्टी का कहना है कि इससे मतदाताओं को मनमाने तरीके से मतदाता सूची से हटाने, वोटर दमन और चुनावी प्रक्रियाओं में कथित पक्षपात से सुरक्षा मिलेगी।  

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Will right to vote become fundamental right Congress makes demand and levels serious allegations against EC
जयराम रमेश, कांग्रेस नेता - फोटो : एएनआई

विस्तार

कांग्रेस ने रविवार को वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की पुरजोर वकालत की। पार्टी का कहना है कि यह कदम मतदाताओं को वोटर दमन या मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराए जाने जैसी स्थितियों से सुरक्षा प्रदान करेगा। कांग्रेस का दावा है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं। जहां सही लोगों का भी नाम काट दिया गया इसके बाद कोर्ट के आदेश पर उनके नाम को दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ा गया। 

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चुनाव आयोग की भूमिका पर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को एक बार फिर से चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत का चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहा है और उसका कामकाज पूरी तरह पक्षपाती दिखाई दे रहा है। ऐसी परिस्थितियों में मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाना चाहिए, ताकि उसे न्यायिक समीक्षा और संवैधानिक सुरक्षा का सर्वोच्च स्तर प्राप्त हो सके।

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला
रमेश ने बताया कि पिछले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था। उन्होंने कहा कि यदि पैदल चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना जा सकता है, तो लोकतंत्र की बुनियाद माने जाने वाले मतदान के अधिकार पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

संविधान सभा में भी हुई थी व्यापक बहस
उन्होंने याद दिलाया कि संविधान सभा ने सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों तथा आदिवासी एवं बहिष्कृत क्षेत्रों से संबंधित एक सलाहकार समिति गठित की थी। 21-22 अप्रैल 1947 को हुई समिति की बैठक में मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई थी। डॉ. भीमराव अंबेडकर और बाबू जगजीवन राम ने इसके पक्ष में मजबूत तर्क रखे थे।

क्यों नहीं बना था मतदान का अधिकार मौलिक अधिकार?
रमेश के अनुसार, सरदार पटेल, सी. राजगोपालाचारी और कुछ अन्य नेताओं का मानना था कि यदि मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बना दिया गया तो कई रियासतें भारतीय संघ में शामिल होने में हिचकिचा सकती हैं। उनका विचार था कि संविधान में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान ही पर्याप्त होगा। उन्होंने कहा कि स्वयं सरदार पटेल का मानना था कि सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार अपने आप में एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार है। इसी सोच की पृष्ठभूमि में संविधान का अनुच्छेद 326 तैयार किया गया, जो सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव कराने का प्रावधान करता है।

कानूनी अधिकार बनाम मौलिक अधिकार की बहस
रमेश ने कहा कि पिछले सात दशकों से यह बहस जारी है कि मतदान का अधिकार केवल जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत प्राप्त कानूनी अधिकार है या इसे मौलिक अधिकार माना जाना चाहिए। इस विषय पर समय-समय पर अलग-अलग न्यायिक राय सामने आई हैं।

अनूप बरनवाल मामले का उल्लेख
उन्होंने कहा कि मार्च 2023 में आए ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ मामले के फैसले में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी ने अपने असहमति वाले मत में मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया था। कांग्रेस का मानना है कि यह दृष्टिकोण लोकतांत्रिक अधिकारों को और अधिक मजबूत बनाता है।

मतदाताओं के अन्य अधिकारों को मिल चुकी है संवैधानिक मान्यता
रमेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह मान चुका है कि मतदाताओं को उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड, आर्थिक हितों और राजनीतिक फंडिंग के स्रोतों की जानकारी पाने का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। अदालत ने मतदान की गोपनीयता की रक्षा की है और NOTA के माध्यम से सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने के अधिकार को भी मान्यता दी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब मतदान से जुड़े लगभग सभी अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है, तब स्वयं मतदान का अधिकार केवल कानूनी अधिकार बना रहना एक विसंगति प्रतीत होती है।

SIR प्रक्रिया और मतदाता सुरक्षा का मुद्दा
कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने से मतदाता दमन, मनमाने तरीके से मतदाता सूची से नाम हटाने और अन्य कथित अनियमितताओं के खिलाफ मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। उनका कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें सामने आई हैं।

चुनाव आयोग पर बढ़ेगी न्यायिक निगरानी
रमेश ने कहा कि यदि मतदान का अधिकार मौलिक अधिकार बनता है, तो चुनाव आयोग के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और अधिक प्रभावी हो जाएगी। इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।


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फुटपाथ पर चलने के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि निर्धारित फुटपाथों पर चलने का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसे मोटर वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। न्यायालय ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत प्रदत्त आवागमन की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा माना।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि निर्धारित फुटपाथों पर सुरक्षित रूप से चलने का नागरिकों का अधिकार सर्वोपरि है और उसकी रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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