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राफेल के भरोसे चीन से आगे निकल सकता है भारत? पढ़ें, क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Fri, 23 Sep 2016 12:52 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 23 Sep 2016 12:52 PM IST
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Will Rafale deal give India an edge over China?
राफेल सौदा
फ्रांस से राफेल फाइटर विमान खरीदने पर भारत अरबों रुपए खर्च करने जा रहा है, इस डील पर हस्ताक्षर हो गए हैं। हालांकि जानकारों का मानना है कि चीन की चुनौती से निपटने के लिए यह नाकाफी है। जानकार मानते हैं कि भारत को इससे काफी कुछ ज्यादा करना होगा। 
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दरअसल, भारत खराब सेफ्टी रिकॉर्ड वाले मिग 21 प्लेन को बदल रहा है लेकिन इसकी गति काफी धीमी है। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद से भारत ने हथियारों के आयातक देशों से कई बड़े समझौते किए हैं। अब फ्रांस से 36 राफेल प्लेन खरीदना मिग को बदलने की रणनीति का ही हिस्सा है। 
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सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट गुलशन लूथरा का कहना है, 'राफेल सौदा वायु सेना को मजबूती देगा। भारतीय एयरफोर्स के पास 1970 और 1980 के पुराने पीढ़ी के प्लेन हैं और पिछले 25-30 सालों में हम पहली बार तकनीक के मामले में छलांग लगा रहे हैं। राफेल बेहतरीन तकनीक वाले प्लेन हैं जिसकी हमें जरूरत भी है।'
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कहीं, पाकिस्तान के बराबर न आए जाएं

Will Rafale deal give India an edge over China?
राफेल सौदा
वायुसेना का कहना है कि पाकिस्तान और चीनी सीमा पर भारत को करीब 42 स्क्वाड्रन चाहिए जबकि हमारे पास अभी 32 ही है, एक स्क्वाड्रन में 18 विमान हैं। इंडियन एयरफोर्स के अधिकारियों का कहा है कि 2022 तक इन स्क्वाड्रन की संख्या घटकर 25 हो सकती है, यानी इस मामले में घटकर पाकिस्तान के बराबर हो जाएंगे। भारत के लिए चीन बड़ी चिंता है दो पाकिस्तान को भी मदद दे रहा है। लूथरा मानते हैं कि भारत पाकिस्तान से तो निपट सकता है पर चीन से नहीं और अगर चीन पाकिस्तान की मदद के लिए आ जाए तो हम फंस सकते हैं।

तेजस या राफेल, कौन बेहतर
फिलहाल सीरिया और इराक में बम गिराने के लिए राफेल इस्तेमाल हो रहे हैं। ये प्लेन करीब 3,800 किलोमीटर तक उड़ान भर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि राफेल की मदद एयरफोर्स  भारत से ही पाकिस्तान और चीन में किसी लक्ष्य को भेद सकती है। 

आलोचक मानते हैं कि राफेल सौदा भारत को काफी महंगा पड़ रहा है। पीएम मोदी भी चाहते हैं कि इस दशक के आखिर तक 70 फीसदी हार्डवेयर का निर्माण भारत खुद करे। एक्सपर्ट बताते हैं कि भारत अब स्वदेशी 'तेजस' पर और पैसा लगाना चाहता है। तेजस विमान सबसे छोटा और हल्का फाइटर प्लेन है।  हालांकि इसमें लगे कुछ उपकरण आयात किए गए हैं। एक्सपर्ट अजय शुक्ला का कहना है, 'आप छोटे, हल्के फाइटर प्लेन को असामान्य रूप से महंगे और भारी राफेल से नहीं बदल सकते।' 
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