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SC-ST Reservation: आरक्षण मुद्दे पर बोम्मई का बयान, बोले- अध्यादेश को हर कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगी सरकार
Mon, 24 Oct 2022 03:47 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 24 Oct 2022 03:47 PM IST
सार
मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा कि अध्यादेश दोनों सदनों से मंजूरी की आवश्यकता है, जो हम कल यानि अगले विधानसभा सत्र में पेश करेंगे। आरक्षण पर कुछ अन्य सिफारिशों को लेकर बोम्मई ने कहा कि वे प्रस्ताव विभिन्न आयोगों के समक्ष लंबित हैं।
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बसवराज बोम्मई
- फोटो : Social Media
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विस्तार
कर्नाटक सरकार शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) के लिए आरक्षण बढ़ाने वाले अध्यादेश को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए हर उपाय करेगी। राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सोमवार को यह बात कही।
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इससे एक दिन पहले राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण को 15 फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी और अनुसूचित जनजाति के लिए 3 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी करने वाले अध्यादेश को मंजूरी दी। राज्यपाल की ओर से मंजूरी के बाद इसे अधिसूचना के जरिए सार्वजनिक किया गया।
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इस गजट अधिसूचना में कहा गया है कि कुछ और समुदायों को शामिल करने के बाद जातियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। राज्य में एससी और एसटी की कुल आबादी में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
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वहीं मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा कि इसे दोनों सदनों से मंजूरी की आवश्यकता है, जो हम कल यानि अगले विधानसभा सत्र में पेश करेंगे। आरक्षण पर कुछ अन्य सिफारिशों को लेकर बोम्मई ने कहा कि वे प्रस्ताव विभिन्न आयोगों के समक्ष लंबित हैं। रिपोर्ट आने के बाद सरकार कार्रवाई करेगी।
हालांकि उन्होंने आरक्षण श्रेणियों से समुदायों को हटाने या जोड़ने की संभावनाओं पर टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि इस तरह के फैसले कानून और संविधान के ढांचे के भीतर लिए जाने चाहिए। कर्नाटक सरकार जस्टिस नागमोहन दास समिति की सिफारिश आरक्षण का दायरा बढ़ाने बढ़ाने वाला अध्यादेश ले आई है।
इसे कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सरकार द्वारा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं को लुभाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।