{"_id":"5f5c116c8ebc3e44637ce8e3","slug":"will-only-modi-jinping-talks-will-solve-the-dispute","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत-चीन सीमा विवाद: मोदी-जिनपिंग बातचीत से ही निकलेगा विवाद का हल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भारत-चीन सीमा विवाद: मोदी-जिनपिंग बातचीत से ही निकलेगा विवाद का हल
Sat, 12 Sep 2020 06:13 AM IST
संजीव कुमार झा
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला ,नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला ,नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 12 Sep 2020 06:13 AM IST
सार
- विदेश मंत्रियों की बातचीत के बाद तय फार्मूले में नया कुछ नहीं
- शीर्ष स्तर की अब तक की सभी कूटनीतिक बातचीत रही है बेनतीजा
- तनातनी कम होने के बदले और हो सकता है उग्र
विज्ञापन
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्वी लद्दाख के वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच जारी तनातनी पर फिलहाल विराम नहीं लगेगा। निकट भविष्य में यह तनातनी कम होने के बदले और उग्र रूप धारण कर सकती है। गुरुवार को मॉस्को में हुई दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक का परिणाम उत्साह बढ़ाने वाले नहीं हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि विवाद का हल अब दोनों ओर से शीर्षतम स्तर के कूटनीतिक हस्तक्षेप से ही निकलेगा।
विज्ञापन
विदेश मंत्रियों की बैठक से तनाव कम होने की उम्मीद थी। तब ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि दोनों पक्ष विवाद टालने के लिए शीर्षतम स्तर की बातचीत की जमीन तैयार करेंगे। हालांकि विवाद टालने के लिए पांच सूत्रीय फार्मूल तय होने के बावजूद दोनों देश जमीनी स्तर पर अपने-अपने पुराने रुख पर कायम हैं। गौरतलब है कि इससे पहले दोनों देशों के बीच विशेष प्रतिनिधि, रक्षा मंत्री स्तर की बातचीत हो चुकी है। जबकि विदेश मंत्रियों के बीच यह तीसरी बातचीत थी।
विज्ञापन
भारत ने दिया कड़ा संदेश
उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत से पहले भारत को उम्मीद थी कि चीन विवाद टालने के लिए कोई फार्मूला पेश करेगा। हालांकि चीन की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया। इसकेबाद भारत ने भी इस बैठक में पुराना और सख्त रुख अपनाया। जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष पर पुराने समझौतों और हाल में हुई कई स्तर की बातचीत में बनी सहमति को तोडऩे का आरोप लगाया।
विज्ञापन
इस बैठक में जयशंकर ने कहा कि एलएसी पर चीन ने इतनी अधिक संख्या में सैनिकों की तैनाती क्यों की है? जयशंकर ने यह भी पूछा कि अब तक की बातचीत में बनी सहमतियों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
मोदी-जिनपिंग के हस्तक्षेप से ही सुलझेगा विवाद?
उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि अब तक कूटनीतिक स्तर पर जितनी भी कवायद हुई है, वह करीब-करीब बेनतीजा रही है। विदेश मंत्रियों की बैठक में जो पांच सूत्रीय फार्मूला तय किया गया है, उसमें भी कुछ नया नहीं है। इन सारी बातों पर चीन ने सैन्य स्तर के अलावा विशेष प्रतिनिधि, रक्षा मंत्री और इससे पहले दो बार हुई विदेश मंत्री स्तर की बातचीत में भी सहमति दी थी।
समस्या यह है कि चीन जमीनी स्तर पर इसे लागू नहीं कर रहा। ऐसे में अब विवाद के निपटारे के लिए शीर्षतम स्तर की बातचीत का ही विकल्प बचा है। मुश्किल यह है कि शीर्षतम स्तर की बातचीत केलिए अब तक कोई रूपरेखा तैयार नहीं हुई है।
दोकलम से दो कदम आगे भारत
वर्ष 2017 हुए दोकलम विवाद के दौरान भारत ने मौकेपर हर हाल में डटे रहने की रणनीति अपनाई थी। इस विवाद में भारत दोकलम विवाद से भी दो कदम आगे जा कर चीन की घेरेबंदी कर रहा है। भारत चीन को आर्थिक मोर्चे पर झटका देने के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन के प्रतिद्वंद्वी देशों से भी खुल कर हाथ मिला रहा है।
भारत प्रशांत क्षेत्र में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित कर चीन को बैकफुट पर धकेलने के लिए भारत ने अमेरिका, जापान, फ्रांस जैसे देशों से हाथ मिलाए हैं। जबकि दक्षिण चीन सागर में भारत ने अपने नौसेना की गतिविधि बढ़ाई है।
सामरिक बढ़त वाली चोटियों से नहीं हटेगा भारत
बीते दो हफ्ते केदौरान भारतीय सेना ने एलएसी के पास सामरिक बढ़त देने वाली कई चोटियों का चीनी सेना को पीछे धकेलते हुए कब्जा किया है। बातचीत के किसी निष्कर्ष पर पहुंचे बिना भारत इन चोटियों से नहीं हटेगा। चूंकि एलएसी पर भारत अब मजबूत स्थिति में है। इसलिए वह चीन को बार-बार किसी भी स्थिति का सामना करने और किसी भी तरह का विकल्प आजमाने का संदेश दे रहा है।