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Maharashtra: क्या विधानसभा चुनाव से पहले बिखर जाएगा NDA का कुनबा? अजित पवार की NCP लेकर आ रही है यह बड़ी खबर

Tue, 02 Jul 2024 01:45 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 02 Jul 2024 01:45 PM IST
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सार
महाराष्ट्र में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, ठीक उसी तरह वहां की सियासत का पारा भी गर्माता जा रहा है। महाराष्ट्र के सियासी जानकारों की मानें, तो लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद एनडीए के कुनबे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है
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Will NDA family disintegrate before Maharashtra assembly elections Ajit Pawar NCP is bringing this big news
Maharashtra Politics - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा के चुनाव से पहले वहां की सियासत में कुछ बड़े फेरबदल और उठापटक देखने को मिल सकती है। यह सियासी उठापटक एनडीए के घटक दल अजीत पवार की एनसीपी के साथ हो सकती है। सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की हो रही हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में अजीत पवार की पार्टी एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ सकती है। 



इसे लेकर पार्टी के भीतर कुछ बड़े नेताओं की ओर से चर्चाएं शुरू की जा चुकी हैं। कहा यही जा रहा है कि अगर महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों पर बेहतर तालमेल नहीं बना, तो अजीत पवार अलग चुनाव लड़ सकते हैं। अंदरूनी तौर पर भाजपा और एनसीपी के नेताओं में इस बात की चर्चाएं खूब हो रही हैं। दरअसल लोकसभा चुनाव के नतीजों से यह बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि अजित पवार की एनसीपी से भारतीय जनता पार्टी का फिलहाल कोई सियासी लाभ नहीं हुआ है। 


महाराष्ट्र में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, ठीक उसी तरह वहां की सियासत का पारा भी गर्माता जा रहा है। महाराष्ट्र के सियासी जानकारों की मानें, तो लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद एनडीए के कुनबे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसमें सबसे ज्यादा सियासी उठा पटक और भविष्य की राजनीति के लिहाज से अजीत पवार की पार्टी एनसीपी को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं। स्थिति यह हो गई है कि अजित पवार की पार्टी के विधायक अमोल मितिकारी ने एक बैठक में आने वाले विधानसभा चुनाव में अलग-अलग चुनाव लड़ने की भी बात कही है। दरअसल महाराष्ट्र में आने वाले विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर अभी से मंथन होना शुरू हो गया है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शितोले कहते हैं कि लोकसभा के चुनाव में जो प्रदर्शन अजीत पवार की एनसीपी का रहा है, उस लिहाज से उनको विधानसभा के चुनाव में मन मुताबिक सीटें मिलना नामुमकिन लग रहा है। 
 
यही वजह है की सीटों के पेंच फंसने से पहले ही अजीत पवार की एनसीपी आने वाले विधानसभा चुनाव में अपने नए रास्ते तलाश सकती है। जानकारों का कहना है कि 288 सीटों वाली विधानसभा में इस वक्त भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है। इस लिहाज से आने वाले विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी निश्चित तौर पर सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अरुण मोघे कहते हैं कि अब लड़ाई सबसे ज्यादा एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी को लेकर होनी है। 

लोकसभा चुनाव के दौरान इस बात की चर्चा सबसे ज्यादा थी कि विधानसभा के चुनाव में अजीत पवार की पार्टी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। इसीलिए लोकसभा चुनाव में कम सीटों पर वह राजी हुए थे। महाराष्ट्र की सियासत में चर्चा इस बात की भी सबसे ज्यादा हो रही है कि 288 सीटों वाले विधानसभा चुनाव में अजीत पवार 30 से 35 फ़ीसदी सीटों पर यानी की 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग रख सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार अरुण कहते हैं कि ऐसी मांग अगर एनसीपी की ओर से उठती है, तो निश्चित तौर पर महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में एनडीए के घटक दलों खास तौर से एनसीपी के अलग होने की संभावनाए और प्रबल हो जाएंगी। 
 
वही, लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद महाराष्ट्र में भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं की ओर से अजीत पवार से अलग होने की आवाज उठी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि यह बात बिल्कुल तय है कि सीटों पर अगर कोई नाजायज मांग उठती है, तो सबसे पहले उसे मिल बैठकर सुलझाने की कोशिश होगी। इसके इतर अगर कोई जिद जैसी स्थिति दिखती है, तो फिर फैसला केंद्रीय नेतृत्व की ओर से निश्चित तौर पर लिया जाएगा। 

हालांकि, महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के प्रभारी रहे और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा कहते हैं कि उनका जो महाराष्ट्र में गठबंधन है, वह आगे भी जारी रहेगा। वैसे अजीत पवार की पार्टी से विधायक अमोल मितिकारी की ओर से महाराष्ट्र की वंचित बहुजन अघाड़ी से गठबंधन किए जाने की बात भी सामने आई है। राजनीतिक जानकार हिमांशु शितोले कहते हैं कि सिर्फ एनसीपी के विधायक अमोल की ओर से ही नहीं, बल्कि हाल में हुए महाराष्ट्र के एक भाजपा के कार्यक्रम में कुछ नेताओं ने अजीत पवार से अलग होने की भी चर्चा की है।
 
वहीं, दूसरी ओर महाराष्ट्र की सियासत में उथल-पुथल मचने के कई और कयास भी लगाए जा रहे हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से लोकसभा चुनाव में एनसीपी का प्रदर्शन रहा है, उससे सिर्फ गठबंधन ही नहीं, बल्कि अजीत पवार की पार्टी के भीतर के नेता भी नाखुश हैं। कहा यही जा रहा है कि अजित पवार के हिस्से के कुछ विधायक शरद पवार की ओर भी जाने की फिराक में लगे हैं। अजीत पवार के साथ के कुछ विधायक लोकसभा चुनावों के नतीजो के बाद शरद पवार के साथ जाने के संकेत दे रहे हैं। 

सूत्रों के मुताबिक, इस बात की जानकारी और सियासी हलचल अजीत पवार की एनसीपी को भी हुई है। यही वजह है कि आने वाले विधानसभा के चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों की मांग की चर्चा पार्टी के भीतर उठने लगी है। ताकि यह संदेश दिया जा सके कि आने वाले विधानसभा चुनाव में अजीत पवार की एनसीपी पूरी मजबूती के साथ सियासी मैदान में उतरने वाली है।

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