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Heritage: क्या भारत को वापस मिलेगा कोहिनूर, भारत-अमेरिका में हुए समझौते से निकल सकती है राह

Fri, 26 Jul 2024 05:43 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 26 Jul 2024 05:43 PM IST
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सार
26 जुलाई को दिल्ली और न्यूयॉर्क के बीच हुए एक समझौते में यह तय किया गया है कि (किसी भी देश की गुलामी के दौरान लूटी गई या तस्करी के माध्यम से किसी दूसरे देश को ले जाई गई) पुरातात्विक महत्त्व की कलात्मक वस्तुओं को उसके मूल देशों को वापस लौटाने का प्रयास किया जाएगा। इस समझौते को 'कल्चरल प्रॉपर्टी एग्रीमेंट' नाम दिया गया है।
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Will India get Kohinoor back? way out can be found through agreement between India and America
भारत-अमेरिका के बीच समझौते से निकलेगी राह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की गुलामी के दौरान पुरातात्विक महत्त्व की अनेक मूर्तियों, कलात्मक वस्तुओं या रत्न-आभूषणों को अंग्रेजों के द्वारा लूटा गया था। इसके पहले भी अनेक अन्य आक्रमणकारियों ने भारत पर समय-समय पर आक्रमण किया और यहां की बहुमूल्य वस्तुओं को लूटकर अपने साथ ले गए। इन लूटी हुई वस्तुओं में कोहिनूर हीरा भी शामिल है जो इस समय लंदन के ज्वेल हाउस में है। लंबे समय से करोड़ों भारतीयों की इच्छा रही है कि यह कोहिनूर हीरा अब देश में वापस आना चाहिए, लेकिन ब्रिटेन ने अब तक ऐसा कोई रुख नहीं दिखाया है जिससे इस बेशकीमती हीरे के भारत वापसी का रास्ता तैयार हो सके। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच शुक्रवार को हुए एक समझौते के बाद इसकी देश वापसी का रास्ता निकल सकता है।



दरअसल, शुक्रवार 26 जुलाई को दिल्ली और न्यूयॉर्क के बीच हुए एक समझौते में यह तय किया गया है कि (किसी भी देश की गुलामी के दौरान लूटी गई या तस्करी के माध्यम से किसी दूसरे देश को ले जाई गई) पुरातात्विक महत्त्व की कलात्मक वस्तुओं को उसके मूल देशों को वापस लौटाने का प्रयास किया जाएगा। इस समझौते को 'कल्चरल प्रॉपर्टी एग्रीमेंट' नाम दिया गया है। इसके लिए भारत और अमेरिका मिलजुलकर प्रयास करेंगे। 


शुरुआती दौर में यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच हुआ है, लेकिन शीघ्र ही दुनिया के अन्य देशों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इस कार्य की सफलता के लिए विभिन्न देशों की एजेंसियों को एक मंच पर लाने और उन्हें इसके लिए सहमत करने की आवश्यकता पड़ेगी। इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। लेकिन इतना स्पष्ट हो गया है कि इस समझौते के बाद पुरातात्विक महत्व की कलात्मक वस्तुओं, मूर्तियों या रत्न-आभूषणों को उनके मूल देश को वापस भेजे जाने का रास्ता तैयार हो सकता है। पुरातात्विक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रिटेन और भारत के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनी तो कोहिनूर के दिल्ली आने का रास्ता बहु तैयार हो सकता है। फिलहाल, यह ब्रिटेन में है। 

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 'द हाट ऑफ आर्ट' की तीन दिवसीय  कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस दौरान शेखावत ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते का लाभ केवल हमारे देश को ही नहीं होगा, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी इसमें शामिल करते हुए पुरातात्विक महत्त्व की वस्तुओं को उनके मूल देशों को वापस करने का प्रयास किया जाएगा। इससे दुनिया के विभिन्न देशों को अपनी विरासत की मूल वस्तुओं को सहेजने का गौरव प्राप्त हो सकेगा। 

शेखावत ने बताया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के आने के पहले केवल 13 पुरातात्विक महत्त्व की वस्तुओं को भारत वापस लाने में सफलता मिली थी, लेकिन 2014 में वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद से लेकर अब तक के दस वर्षों में 357 पुरातात्विक वस्तुओं को दुनिया के अनेक देशों से भारत वापस लाने में सफलता मिली है। 

दिल्ली में चल रही विश्व धरोहर समिति की बैठक में भी दुनिया के देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि पुरातात्विक महत्त्व की वस्तुओं को उनके मूल देशों को वापस लौटाया जाए। विश्व धरोहर समिति ने 'मोन्यूमेंट ऑफ वर्ल्ड हेरिटेज इंपोर्टेंस' के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। इससे दुनिया के देशों को अपनी विरासत और गौरव की वस्तुओं को वापस लाने में मदद मिल सकती है।  
   
माता अन्नपूर्णा की मूर्ति आईं वापस
दुनिया के दूसरे देशों से भारत में जिन मूर्तियों या कलात्मक वस्तुओं को वापस लाने में सफलता मिली है, उनमें माता अन्नपूर्णा की मूर्ति भी शामिल है। 18वीं शताब्दी की इस मूर्ति को वाराणसी से चुरा लिया गया था, लेकिन केंद्र सरकार के प्रयासों के बाद कनाडा ने इसे भारत को वापस सौंप दिया। भारत लाने के बाद इसे पूरे विधि-विधान से वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के मंदिर में स्थापित कर दिया गया। 

अभी हाल ही में शिवाजी महाराज के बघनख को स्वदेश वापस लाने में सफलता मिली है। टीपू सुल्तान से जुड़ी कई ऐतिहासिक वस्तुओं को भी भारत वापस लाया जा चुका है। इसी प्रकार की अन्य अनेक वस्तुएं हैं जिसे लोग वापस लाना चाहते हैं। कोहिनूर हीरा भी इन्हीं में शामिल है।   

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