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क्या राफेल से बन जाएगा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का करियर, कहां चूक गई मोदी सरकार?

Mon, 07 Jan 2019 09:47 PM IST
अमर शर्मा शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 07 Jan 2019 09:47 PM IST
सार

* म.प्र., राजस्थान, छत्तीसगढ़ में गिरा राजनीतिक सेंसेक्स
* कांग्रेस की खुशी का राज क्या है?
* कहां चूक गई मोदी सरकार?
* कांग्रेस और राहुल गांधी को उम्मीद

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Will Congress President Rahul Gandhi career be made by rafale deal controversy narendra modi
नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी - फोटो : Facebook

विस्तार

यह ताना भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा का है। सांबित पात्रा ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा था कि राहुल जी राफेल से अपना करियर लांच होने का सपना देख रहे हैं। पात्रा ने जब यह तंज कसा था, तब कांग्रेस राफेल लड़ाकू विमान सौदे में घोटाले के आरोप की धार तेज करने में लगी थी। कांग्रेस के नेता बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि अब भाजपा के नेताओं से पूछिए कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद राहुल का करियर लांच हुआ या नहीं? कांग्रेस राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लोकसभा चुनाव 2019 का मुद्दा बनाने पर तुली है। क्या कांग्रेस अध्यक्ष को इसमें सफलता मिल पाएगी? 
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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि राहुल गांधी लगातार झूठ बोलकर देश को गुमराह कर रहे हैं। जनता अब सच जान चुकी है और उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद अब कोई संदेह नहीं है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी लगातार राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगा रही हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टीवी को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों को कोई तवज्जो नहीं दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसको लेकर उनके ऊपर कोई आरोप नहीं है। प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री जी यह आरोप सीधे आप पर हैं। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताया।
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इन सबके बाद भी कांग्रेस पार्टी ने केवल राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर जेपीसी की मांग को जारी रखा है, बल्कि लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और निर्मला सीतारमण पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी बहस की चुनौती दी है। 

म.प्र., राजस्थान, छत्तीसगढ़ में गिरा राजनीतिक सेंसेक्स

कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे में घोटाला और ऑफसेट करार को अनिल अंबानी की रिलायंस एरोस्पेस को देने के आरोप ने प्रधानमंत्री का राजनीतिक ग्राफ गिरा दिया। राजस्थान में वसुंधरा सरकार के एक पूर्व मंत्री ने माना कि इससे प्रधानमंत्री की छवि और भाजपा को काफी नुकसान पहुंचा।

म.प्र. के एक भाजपा सांसद ने भी इस सवाल पर बचने की कोशिश की। माना यह जा रहा है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राहुल के आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र पर लगाए गए सूट-बूट की सरकार के आरोप की तरह चिपक गया है।  भाजपा के नेता, मंत्री और प्रवक्ता, यहां तक कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी कांग्रेस अध्यक्ष के कई सवाल से बचने की कोशिश करती रही हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष लगातार इसी सवाल को आधार बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र को चर्चा की चुनौती दे रहे हैं। राहुल गांधी ने चर्चा के बाद लोकसभा में रक्षी मंत्री द्वारा दिए बयान को भी झूठा करार दिया। राहुल ने कहा कि रक्षा मंत्री हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को 73 हजार करोड़ रुपये का ठेका देने का झूठा बयान दे रही हैं। 

कांग्रेस की खुशी का राज क्या है?

Will Congress President Rahul Gandhi career be made by rafale deal controversy narendra modi
rahul gandhi - फोटो : pti
राफेल लड़ाकू विमान के सौदे में कहीं न कहीं केंद्र सरकार से चूक हो गई है। वायुसेना ने कारगिल युद्ध के बाद पुराने हो रहे मिग 21 विमानों को देखते हुए 126 बहुउद्देश्यी लड़ाकू विमानों की मांग की थी। वायुसेना ने यह मांग पाकिस्तान और चीन की युद्धक क्षमता, भविष्य की चुनौती को देखते हुए वायुसेना की क्षमता को 36 से 42 स्वाक्ड्रॉन (एक स्क्वाड्रान में 18 विमान) तक ले जाने के लिए की थी।

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस प्रस्ताव पर ध्यान दिया था। मई 2004 में केंद्र में यूपीए की सरकार सत्ता में आई और उसने 2007 में वायुसेना को अपनी जरूरतों को आधार बनाकर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से 126 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों के प्रस्ताव मंगाने को कहा। वायुसेना ने ऐसा ही किया। छह अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने इसमें भाग लिया और अंत में राफेल इसमें अव्वल रहा।

2012 में केंद्र सरकार ने इस सौदे को फ्रांस की डेसाल्ट एवियेशन के साथ करने की प्रक्रिया शुरू की। इस सौदे में तकनीकी हस्तांतरण और 18 विमान तैयार हालत में तथा 108 भारत में ही विकसित करने की शर्त शामिल थी। देश में विकसित करने के लिए डेसाल्ट के साथ हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को यह जिम्मेदारी मिलनी थी।

लेकिन यूपीए के समय में यह सौदा अंतिम रूप नहीं ले सका। मई 2014 में केंद्र में आई मोदी सरकार ने इस सौदे की तमाम शर्तों को बदल दिया। सौदे का भौतिक स्वरूप ही बदल दिया।

कहां चूक गई मोदी सरकार

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नरेंद्र मोदी
- मोदी सरकार 126 राफेल लड़ाकू विमान सौदे को घटाकर 36 (दो स्क्वाड्रॉन) में कर दिया। इस सौदे की चुनौती को देखते हुए आपात स्वरूप देकर सभी विमान तैयार हालत में लेने का निर्णय लिया। कांग्रेस का आरोप है कि वायुसेना की चुनौतियों को देखते हुए लड़ाकू विमान चाहिए, लेकिन बिना उसका ख्याल रखे केंद्र सरकार (प्रधानमंत्री) ने इसकी संख्या 126 से घटाकर 36 कर दिया।

- 36 लड़ाकू विमान सौदे पर निर्णय लेने के 12 दिन पहले गठित हुई अनिल अंबानी की रिलायंस एरोस्पेस को इसमें ऑफसेट पार्टनर के तौर पर करार मिल गया। कांग्रेस का आरोप है कि उद्योगपतियों की सरकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं मौखिक दबाव डालकर अनिल अंबानी की कंपनी को यह ठेका दिलवाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने चौकीदार (प्रधानमंत्री) चोर है का आरोप लगाया। घाटे और कर्ज के बोझ से दबी रिलायंस को प्रधानमंत्री द्वारा मदद करने का आरोप लगाया। अनिल अंबानी पर कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप जंगल में आग की तरह प्रचारित हुआ।

- मोदी सरकार द्वारा किए गए 36 राफेल लड़ाकू विमान सौदे का असर हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पर पड़ा। एचएएल देश की पहली और अब तक की आखिरी केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली विमान निर्माता कंपनी है। वहीं, पिछले चार साल में एचएएल की वित्तीय हालत भी गिरती गई।

- राफेल लड़ाकू विमान की 526 करोड़ रुपये से कीमत ढाई गुणा तक क्यों बढ़ गई? एक विमान 1600 करोड़ में क्यों? सरकार बताये। जबकि सरकार ने इसे बताने से गोपनीयता समझौते का हवाला देकर इनकार कर दिया।

- 36 लड़ाकू विमान का सौदा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। रक्षा क्षेत्र का कोई भी आरोप देश में व्यापक आधार बना लेता है। दूसरे इसका आरोप सीधे प्रधानमंत्री पर है और प्रधानमंत्री से अंबानी परिवार के रिश्ते जगजाहिर हैं।

- क्या 36 लड़ाकू विमान लेने के निर्णय पर रक्षा मंत्रालय, वायुसेना मुख्यालय की कोई आपत्ति थी?

- केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दिया। उच्चतम न्यायालय ने राफेल सौदे पर एसआईटी की जांच की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज करने में इसे आधार बनाया और याचिका खारिज कर दी। फैसले में केंद्र सरकार की याचिका को लेकर सवाल उठे तो केंद्र सरकार ने कहा कि हलफनामा को उच्चतम न्यायालय ठीक ढंग से नहीं समझ पाया। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में संशोधन की याचिका दायर की। इस तरह से तथ्य सामने आने के बाद सरकार के इकबाल पर संदेह को बल मिल गया। 

कांग्रेस और राहुल गांधी को उम्मीद

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Rahul Gandhi
कांग्रेस और इसके अध्यक्ष राहुल गांधी को विश्वास है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर उनका लगातार आक्रामक रुख प्रधानमंत्री मोदी की चमक फीकी कर रहा है। इसका असर भाजपा के इकबाल पर पड़ रहा है। इसके अलावा देश के किसान, युवा समेत अन्य केंद्र सरकार की नीतियों से नाराज है। किसानों की आर्थिक बदहाली, रोजगार के सिमट गए अवसर, नोटबंदी के बाद रोजगार की चरमराई हालत, जीएसटी लागू होने के बाद अचानक बाजार पर पड़े प्रभाव ने मोदी सरकार की चमक को धो दिया है।

एक सवाल के जवाब में जुलाई 2018 में कांग्रेस अध्यक्ष ने खुद कहा था कि वह दिसंबर 2018 तक अपनी पप्पू की छवि को धो देंगे। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और म.प्र. विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस के नेताओं को लग रहा है कि पप्पू का दाग धुल गया है।

अब कांग्रेस अध्यक्ष को उम्मीद है कि 2019 के आम चुनाव में उन्हें और उनकी पार्टी को भरपूर लाभ मिलना तय है। पार्टी के नेता अहमद पटेल कहते हैं कि इसे कहने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के मंत्रियों, नेताओं के चेहरे तथा बयान में साफ दिखाई दे रही है। 
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