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क्या दिल्ली में फिर थमेगा पीएम मोदी का विजयी रथ? हरियाणा चुनाव परिणाम का कितना होगा असर

Thu, 24 Oct 2019 09:04 PM IST
आसिम खान अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Thu, 24 Oct 2019 09:04 PM IST
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Will BJP and Narendra Modi succeed in defeating Arvind Kejriwal in Delhi Assembly elections
पीएम मोदी, सीएम केजरीवाल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम आ चुके हैं। भाजपा दोनों ही राज्यों में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। लेकिन बावजूद इसके भाजपाई खेमे में मायूसी है। कारण स्पष्ट है कि भाजपा इन दोनों ही राज्यों में मजबूत वापसी की उम्मीद कर रही थी, लेकिन दोनों ही राज्यों में उसके प्रदर्शन में कमी आई है। 

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यह प्रदर्शन तब सामने आया है जब केंद्र की भाजपा सरकार ने अनुच्छेद 370 और तीन तलाक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कानून बनाकर अपने वोटरों को खुश करने का काम किया है। भाजपा ने पार्टी स्तर पर अनेक कार्यक्रम आयोजित कर इसका खूब प्रचार भी किया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान इन मुद्दों को खूब उठाया। लेकिन चुनाव नतीजे बता रहे हैं कि पार्टी को इसका उतना बड़ा फायदा नहीं मिला है जितने की वह उम्मीद कर रही थी।  

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दिल्ली में गंभीर चुनौती

वर्ष 2014 में प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजयी रथ दिल्ली में आकर ठहर गया था। पांच साल बाद वर्ष 2019 में परिस्थितियां एक बार फिर लगभग उसी तरह की हैं। पीएम मोदी ने लोकसभा का चुनाव बड़े बहुमत के साथ जीता है। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या दिल्ली एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजयी रथ के सामने आकर खड़ी हो जाएगी? 

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आज के हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन में आई कमी ने इन संभावनाओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। माना जा रहा है कि हरियाणा चुनाव परिणाम दिल्ली विधानसभा चुनाव पर भी एक हद तक अपना असर डालेगा।  

किन मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी भाजपा

सबसे अहम सवाल यह है कि भाजपा यहां किन मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी? एक बार फिर वह इस चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों को उछालेगी जो महाराष्ट्र और हरियाणा में अपेक्षाकृत बेअसर रहे हैं या स्थानीय मुद्दे उठाएगी जिस पर अरविंद केजरीवाल उसे चुनौती दे रहे हैं। 

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज कहते हैं कि भाजपा ने हरियाणा का चुनाव मनोहरलाल खट्टर के नाम पर लड़ा होता और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दिया होता तो शायद उन्हें ज्यादा सफलता मिलती। हम दिल्ली में भाजपा को इन्हीं मुद्दों पर हराएंगे।

अगर भाजपा स्थानीय मुद्दों को उठाने की कोशिश करती है तो भी उसका सामना केजरीवाल के मुफ्त बिजली, पानी और मेट्रो-बसों के महिलाओं को दिए गए फ्री किराए से होगी। उसकी मोहल्ला क्लीनिक और बेहतरीन शिक्षा मॉडल ने राज्य के गरीबों को आकर्षित करने का काम किया है। जबकि भाजपा अपने शासित किसी भी राज्य में ऐसा मॉडल देने में नाकाम रही है। 

केजरीवाल पड़ोसी भाजपा शासित राज्यों की दिल्ली से तुलना कर भाजपा की परेशानी बढ़ाते रहे हैं। भाजपा के एक शीर्ष नेता ने स्वीकार किया कि हम आज की तारीख में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से बहुत पीछे हैं। हमारे प्रदेश के नेतृत्व में आपसी कलह सतह पर है। स्थानीय लोगों के महत्त्व के मुद्दे उठाने में हम कामयाब नहीं हो रहे हैं। 



पार्टी में समाज के सभी लोगों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला हुआ है। सीलिंग और कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने के काम पर भी केजरीवाल लीड लेने में सफल रहे हैं। ऐसे में दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतना पार्टी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। 

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