Haryana: क्या 2005 के 'भजनलाल' तो नहीं बनेंगे 'हुड्डा', CM का चेहरा कौन? कांग्रेस नहीं खोल रही पत्ते
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विस्तार
हरियाणा विधानसभा के चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत लगा दी है। जहां एक तरफ दो बड़े दलों को भितरघात का डर सता रहा है तो दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी, इनेलो, जजपा व बसपा भी कांग्रेस-भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर रही हैं। हरियाणा की सियासत में कांग्रेस पार्टी अपने बेहतर प्रदर्शन को लेकर इस बार कुछ ज्यादा ही आशान्वित है। पार्टी के इंटरनल सर्वे की रिपोर्ट और टिकटों का सटीक बंटवारा, ये सब कांग्रेस पार्टी की मजूबत स्थिति की तरफ इशारा कर रहा है। इन सबके बीच सियासतदानों और कार्यकर्ताओं में ऐसी चर्चा भी चल रही है कि क्या हरियाणा में 'हुड्डा', 2005 की तरह 'भजनलाल' तो नहीं बन जाएंगे। 2005 के विधानसभा चुनाव में चौ. भजनलाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया। कांग्रेस ने 67 सीट हासिल कर प्रचंड बहुमत हासिल किया, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने अचानक एक ऐसा फैसला किया, जिसने सबको हैरान कर दिया। भूपेंद्र हुड्डा, चुनाव में जिनका कहीं नाम नहीं था, उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया गया। इस बार भी कांग्रेस पार्टी हरियाणा में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इस बाबत पत्ते नहीं खोल रही है।
2005 में प्रदेश की सियासत में हुआ था कुछ चौंकाने वाला
बता दें कि 2005 में प्रदेश की सियासत में यह उम्मीद किसी को नहीं थी कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री बन सकते हैं। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी यही लग रहा था कि भजनलाल ही चौथी बार प्रदेश की कमान संभालेंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ। उस वक्त विधानसभा चुनाव में सक्रिय न होने के बावजूद हुड्डा की लाटरी लग गई। उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया गया। सियासतदान और राजनीतिक के जानकार अब वही सवाल उठा रहे हैं कि कहीं इस बार भी '2005' वाला दोहराव तो नहीं होगा। हरियाणा भाजपा के सह मीडिया प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने शुक्रवार को यह कहते हुए इस बात को हवा दे दी कि राहुल गांधी में हिम्मत है तो वे दीपेंद्र हुड्डा को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करें।
बिप्लब कुमार देब के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता भी सकते में आ गए। उनके बीच यह चर्चा होने लगी कि कांग्रेस पार्टी की जीत के बाद कहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा, चौ. भजनलाल की तरह किनारे तो नहीं कर दिए जाएंगे।
जनता 10 साल का राज देख चुकी
देब ने कहा, प्रदेश की जनता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का 10 साल का राज देख चुकी है। कांग्रेस राज में परिवारवाद हावी रहा है। कांग्रेस के होर्डिंग पर प्रदेश अध्यक्ष से बड़ा भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा का फोटो छपता है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दिल से 'कांग्रेस फिर से' कहकर दिखाएं। उनके दिल में परिवारवाद है। वे अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। कांग्रेस पार्टी की सांसद कुमारी शैलजा भी पिछले दिनों कह चुकी हैं कि प्रदेश में अनुसूचित जाति से कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकता। ये किसी से नहीं छिपा है कि शैलजा, लंबे समय से मुख्यमंत्री पद पर नजर रखे हुए हैं।
हरियाणा में 2005 वाला खेल संभव
वरिष्ठ पत्रकार अनिल आर्या ने भी हाल ही में एक टीवी डिबेट के दौरान यह बात कही थी कि हरियाणा में 2005 वाला खेल संभव है। उस वक्त चुनाव में मेहनत तो चौ. भजनलाल ने की थी, मगर मुख्यमंत्री पद की बाजी हुड्डा मार ले गए। कांग्रेस पार्टी है, किसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जिस तरह से इस बार यह कहा जा रहा है कि टिकटों के बंटवारे में हुड्डा की खूब चली है, कांग्रेस हाईकमान ने उनके कहने पर ही सत्तर से ज्यादा टिकट बांटे हैं, कुछ वैसी ही स्थिति 2005 में चौ. भजनलाल की थी। कांग्रेस की जीत पर भजनलाल ने दावा किया था कि उनके पास चालीस से ज्यादा विधायक हैं। हरियाणा में वे ही कांग्रेस हैं।
सियासत में कुछ भी हो सकता है
कुछ वैसा ही इस बार हुड्डा को लेकर कहा जा रहा है। हुड्डा कहते हैं कि इस बात तो कांग्रेस पार्टी की प्रचंड बहुमत से जीत होने जा रही है। प्रदेश की राजनीतिक को करीब से समझने वाले रविंद्र कुमार सैनी बताते हैं, देखिये सियासत में कुछ भी संभव है। इस मामले में भाजपा ने खूब प्रयोग किए हैं। पहले पंजाबी समुदाय के मनोहर लाल को मुख्यमंत्री बना दिया, फिर नायब सैनी को प्रदेश की कमान सौंप दी। इससे लोगों में यह मैसेज जाता है कि प्रदेश की सियासत में एक या दो परिवार ही नहीं, बल्कि दूसरे लोग भी आ सकते हैं।
इस बार किसी नए चेहरे पर मुहर?
बतौर रविंद्र कुमार, जीत की स्थिति में अगर कांग्रेस इस मैसेज पर काम करती है तो इस बार किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा सकती है। इससे परिवारवाद की काट भी हो जाएगी। भाजपा को दूसरे राज्यों के चुनाव में यह कहने का मौका नहीं मिलेगा कि कांग्रेस ने हरियाणा में परिवारवाद को आगे बढ़ा दिया है। इससे पार्टी में एक उदाहरण सैट हो सकता है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में हुड्डा की मजबूत स्थिति को कांग्रेस दरकिनार कर पाएगी, ये कहना बहुत मुश्किल है। वजह, पिछले दस वर्षों में हुड्डा ने कांग्रेस में अपनी जबरदस्त पैंठ बनाई है। कांग्रेस की प्रचंड जीत की स्थिति में उन्हें पीछे करना, कांग्रेस हाईकमान के लिए आसान नहीं होगा।