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सिद्धू की साढ़ेसाती उतरी, पर दूर रहेगी सीएम की कुर्सी
amarujala.com, राकेश कुमार मिश्र
Updated Sat, 11 Mar 2017 01:11 PM IST
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नवजोत सिंह सिद्धू
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पंजाब में कैप्टन अमरिंदर के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ही कांग्रेसी खेमें में चर्चा के विषय रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि उनको कांग्रेस सरकार में उप मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री तक की सीट दी जा सकती है। लेकिन उनकी कुंडली बहुत अच्छे संकेत नहींं दे रही।
सिद्धू की कुंडली में शुक्र की महादशा साफ नजर आ रही है। उनका शुक्र लाभ के भाव में है और सूर्य भी ठीक स्थिति में है। इसका संकेत है कि 22 अप्रैल से पहले उन्हें राजनीति में बहुत कुछ मिल सकता है।
महर्षि भृगु ज्योतिष संस्थान के पंडित राकेश कुमार मिश्र के मुताबिक 25 सितंबर 2014 से सिद्धू की कुंडली में राहु बड़ा प्रबल था। 20 दिसंबर 2016 से ही उनके ग्रह सुधरने शुरू हुए हैं। अब उनकी कुंडली साढेसाती के प्रभाव से मुक्त हो रही हैै और उतरता हुआ शनि कुछ देकर ही जाता है।
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लेकिन ऐसा नहीं है कि सिद्धू को सीएम की कुर्सी मिल जाए। उनकी कुंडली बताती है कि राहु सातवें भाव में बैठा हुआ है और कुपित है। इसीलिए उनके लिए चुनौतियां लगातार बनी रहेंगी। खासतौर पर उन्हें K और A से शुरू होने वाले नामों से सावधान रहना पड़ेगा। इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम के लोग उन्हें नुकसान दे सकते हैंं।
पंडित राकेश मिश्र के मुताबिक सिद्धू की कुंडली में शुक्र में गुरू की अंतर्दशा है और फिर से शनि प्रकट हो सकते हैं। इसका मतलब ये है कि 2020 तक उनका ग्राफ चढ़ेगा लेकिन बाद में काग्रेस के साथियों से मतभेद होने लगेंगे और तब वे कांग्रेस से अलग भी हो सकते हैं। चूंकि स्वभाव से महत्वाकांक्षी हैं इसीलिए कांग्रेस से उनका मोहभंग हो सकता है। क्योंकि उन्हें उम्मीद के मुताबिक कांग्रेस से नहीं मिलेगा। कुल मिलाकर सिद्धू की कुंडली बताती है कि उपमुख्यमंत्री पद की कुर्सी से ज्यादा उन्हें कुछ नहीं मिल पाएगा और उपमुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी इसे भी बहुत विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता।
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सिद्धू की कुंडली में शुक्र की महादशा साफ नजर आ रही है। उनका शुक्र लाभ के भाव में है और सूर्य भी ठीक स्थिति में है। इसका संकेत है कि 22 अप्रैल से पहले उन्हें राजनीति में बहुत कुछ मिल सकता है।
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महर्षि भृगु ज्योतिष संस्थान के पंडित राकेश कुमार मिश्र के मुताबिक 25 सितंबर 2014 से सिद्धू की कुंडली में राहु बड़ा प्रबल था। 20 दिसंबर 2016 से ही उनके ग्रह सुधरने शुरू हुए हैं। अब उनकी कुंडली साढेसाती के प्रभाव से मुक्त हो रही हैै और उतरता हुआ शनि कुछ देकर ही जाता है।
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लेकिन ऐसा नहीं है कि सिद्धू को सीएम की कुर्सी मिल जाए। उनकी कुंडली बताती है कि राहु सातवें भाव में बैठा हुआ है और कुपित है। इसीलिए उनके लिए चुनौतियां लगातार बनी रहेंगी। खासतौर पर उन्हें K और A से शुरू होने वाले नामों से सावधान रहना पड़ेगा। इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम के लोग उन्हें नुकसान दे सकते हैंं।
पंडित राकेश मिश्र के मुताबिक सिद्धू की कुंडली में शुक्र में गुरू की अंतर्दशा है और फिर से शनि प्रकट हो सकते हैं। इसका मतलब ये है कि 2020 तक उनका ग्राफ चढ़ेगा लेकिन बाद में काग्रेस के साथियों से मतभेद होने लगेंगे और तब वे कांग्रेस से अलग भी हो सकते हैं। चूंकि स्वभाव से महत्वाकांक्षी हैं इसीलिए कांग्रेस से उनका मोहभंग हो सकता है। क्योंकि उन्हें उम्मीद के मुताबिक कांग्रेस से नहीं मिलेगा। कुल मिलाकर सिद्धू की कुंडली बताती है कि उपमुख्यमंत्री पद की कुर्सी से ज्यादा उन्हें कुछ नहीं मिल पाएगा और उपमुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी इसे भी बहुत विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता।