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क्या पिटे मुद्दों पर दांव लगा रहे हैं अमित शाह? कितने कामयाब होंगे ये मुद्दे

Sun, 05 Jan 2020 07:54 PM IST
Trainee Trainee डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Sun, 05 Jan 2020 07:54 PM IST
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Will Amit Shah win Delhi assembly elections due to old issues
अमित शाह (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को पार्टी के बूथ कार्यकर्ताओं को इंदिरा गांधी स्टेडियम में संबोधित करने के साथ ही खुद को दिल्ली के चुनावी मैदान में पूरी तरह झोंक दिया।

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कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे स्टेडियम में उन्होंने हर उस मुद्दे पर बोला जिसके लिए उन्हें जाना जाता है। वे राममंदिर, तीन तलाक, नागरिकता कानून और टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे मुद्दों के बहाने जमकर विपक्ष पर हमला बोलते रहे और कार्यकर्ता लगातार ताली बजाकर उनका स्वागत करते रहे।
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लेकिन यहीं वे मुद्दे हैं जिन्हें पार्टी नेतृ्त्व ने झारखंड के चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ उठाया था। इसके बाद भी पार्टी को वहां हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में क्या वही मुद्दे भाजपा को दिल्ली में सत्ता दिलाने में कारगर साबित होंगे? क्या अमित शाह दिल्ली चुनाव में पिटे हुए मोहरों पर दांव लगा रहे हैं?  
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उपाध्यक्ष स्तर के बीजेपी के एक शीर्ष नेता ने कहा कि झारखंड के चुनाव पूरी तरह स्थानीय मुद्दों पर हुए थे। आदिवासियों का मुद्दा वहां के चुनाव में काफी अधिक उछाला गया। कांग्रेस और जेएमएम के गठबंधन ने भी कुछ परेशानियां पैदा की थीं। लेकिन दिल्ली का मतदाता पूरी तरह अलग तासीर रखता है। वह राष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक केंद्रित रहता है। यही कारण है कि पार्टी रणनीति के तहत यहां राष्ट्रीय मुद्दे उछाल रही है। 

नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामलीला मैदान की रैली में भी यही बात देखने में आई थी कि जब तक प्रधानमंत्री स्थानीय मुद्दों पर बोलते रहे जनता सामान्य तरीके से सुनती रही। लेकिन जैसे ही उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर बोलना शुरु किया था भीड़ की तरफ से काफी सक्रिय जवाब देखने को मिला था। यही कारण है कि पार्टी नेता मान रहे हैं कि उनका कोर विषय (राष्ट्रवाद) ही उन्हें इस चुनाव में मजबूत उम्मीदवार के रुप में स्थापित कर सकता है।

अमित शाह ने क्या बोला

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में नागरिकता कानून के विरोध में जो भी दंगे हुए उनके पीछे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी नेता जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में कुछ छात्र देश के टुकड़े-टुकड़े करने का नारा लगाते हैं।



पुलिस उन्हें सजा देना चाहती है लेकिन प्रदेश की अरविंद केजरीवाल सरकार इसके लिए अनुमति नहीं दे रही है जिसके कारण पुलिस के हाथ बंधे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने लोगों को नागरिकता देने के मुद्दे को धार्मिक रंग दे दिया है क्योंकि इसके जरिए उनके वोटबैंक की राजनीति सधती है। 



 
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