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West Bengal: केंद्र व बंगाल सरकार के बीच 'इंद्रधनुषी सेतु' बनेंगे नए राज्यपाल, बोले- मसलों का हल निकालेंगे
Fri, 18 Nov 2022 03:00 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 18 Nov 2022 03:00 PM IST
सार
बोस को गुरुवार को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनका कहना है कि राजभवन व राज्य सरकार के बीच मतभेदों को टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि ये मतभिन्नता है। दोनों एक दूसरे की पूरक संस्थाएं हैं।
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पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त राज्यपाल सीवी आनंद बोस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस का मानना है कि केंद्र व राज्य सरकार के बीच गवर्नर का काम एक 'इंद्रधनुषी सेतु' की तरह होता है। उन्होंने कहा कि वे बंगाल सरकार व राजभवन के बीच सभी विवादित मसलों का सही समाधान निकालेंगे।
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बोस को गुरुवार को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनका कहना है कि राजभवन व राज्य सरकार के बीच मतभेदों को टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि ये मतभिन्नता है। दोनों एक दूसरे की पूरक संस्थाएं हैं। 'इंद्रधनुषी सेतु' से आशय केंद्र व राज्य के बीच सुंदर सुखद रिश्तों से माना जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि वे विवादों को हल करना पसंद करते हैं। जहां भी कोई समस्या है, वहां उसका समाधान भी होता है। हमें सही समाधान पर जाना चाहिए। हमें विवाद से संबंधित सभी पक्षों को एक साथ लाना चाहिए। संविधान क्या उम्मीद करता है, वह कहता है कि राज्यपाल को रास्ता पता होना चाहिए, उसे रास्ता दिखाना चाहिए और उस रास्ते पर चलना चाहिए।' पीटीआई से टेलीफोन पर साक्षात्कार में डॉ. बोस ने ये बातें कहीं।
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यह आराम का पद नहीं
उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता इसे कोई आराम का पद नहीं बनाना चाहते थे। उनका जरूर कोई मकसद था। राज्यपाल के उद्देश्य को संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को राज्य और केंद्र के बीच एक 'इंद्रधनुषी पुल' के रूप में कार्य करना है। राज्यपाल की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि सरकार संविधान के ढांचे के भीतर कार्य करे। लोगों को राहत पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को सभी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए। जहां तक इसकी अवधारणा का संबंध है, इसमें कोई संघर्ष नहीं दिखता है।
गैर भाजपा सरकारों के साथ टकराव नहीं, वैचारिक मतभेद
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बोस ने देश में गैर-भाजपा दलों के नेतृत्व वाली विभिन्न राज्य सरकारों और राज्यपालों के बीच बढ़ती तकरार को लेकर सवाल के जवाब में डॉ. बोस ने कहा कि ये वैचारिक मतभेद हैं। इसे संघर्ष या टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जगदीप धनखड़ का ममता सरकार से हुआ था लंबा टकराव
बता दें, डॉ. सीवी आनंद बोस से पूर्व मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बंगाल के राज्यपाल थे। उनका राज्य में सत्तारूढ़ ममता बनर्जी सरकार के साथ कई मुद्दों पर लंबा टकराव चला था। जुलाई 2019 में धनखड़ के राज्यपाल बनने के बाद से ममता सरकार के साथ उनका कानून व्यवस्था समेत कई मसलों पर तकरार था।
कौन हैं डॉ. सीवी आनंद
डॉ. सीवी आनंद बोस भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी हैं। वर्तमान में वे मेघालय सरकार में सलाहकार हैं। वे लोक सेवक, आवास विशेषज्ञ, लेखक और वक्ता भी हैं। वे विश्वविद्यालय के कुलपति से लेकर भारत सरकार के सचिव, मुख्य सचिव का पद भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वे हैबिटेट अलायंस के अध्यक्ष भी हैं और यूएन हैबिटेट गवर्निंग काउंसिल के सदस्य भी रह चुके हैं।
सीईआरएन और आईटीईआर में कर चुके भारत का प्रतिनिधित्व
बोस ने शिक्षा, वन और पर्यावरण, श्रम और सामान्य प्रशासन जैसे विभिन्न मंत्रालयों में जिला कलेक्टर और प्रधान सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में काम किया है। उन्होंने सस्ते आवास, सुशासन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में कई संस्थानों की स्थापना की है। बोस ने जिनेवा में यूरोपियन काउंसिल फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सीईआरएन) और फ्रांस में इंटरनेशनल फ्यूजन एनर्जी ऑर्गनाइजेशन (आईटीईआर) में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वह परमाणु उर्जा शिक्षा सोसायटी के भी अध्यक्ष रहे हैं। बोस इसके अलावा पद्नाभस्वामी मंदिर खजाने पर सुप्रीम कोर्ट की समिति के प्रमुख थे।
हिंदी, अंग्रेजी और मलयालम में लिखीं 32 किताबें
वहीं लेखन की बात करें तो बोस ने उपन्यास, लघु कथाएं, कविताएं और निबंध समेत अंग्रेजी, हिंदी और मलयालम में 32 पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं।