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कानों देखी: रूस में आखिरी समय में क्यों रद्द हुई प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता? जानें देश में फिलहाल क्या चल रहा

Wed, 10 Jul 2024 09:31 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 10 Jul 2024 09:31 PM IST
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Why were delegation level talks cancelled last moment in Russia? Know what is happening in india right now
पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई मुलाकात - फोटो : पीटीआई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा में जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सब गोल्डेन-गोल्डेन चला तो फिर पुतिन ने आखिरी समय में प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता रद्द हो गई। यह वार्ता तो तय थी। हालांकि, रूस ने इस वार्ता के रद्द होने का कारण समय का अभाव बताया है। माना जा रहा है कि मास्को में जटिल कूटनीति खेली गई। कही अमेरिका तो कहीं चीन भी सधा। दोनों देशों के साझा बयान में जहां दोस्ती की पूरी झलक है, वहीं प्रतिनिधि मंडल स्तरीय वार्ता के रद्द होने को भी गहरी निगाह से देखा जा रहा है। इस वार्ता से पहले पीएम ने बच्चों के अस्पताल पर रूस के हमले से जुड़ा बयान दिया। इस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब हम मासूम बच्चों को मरते हुए देखते हैं तो दिल दहल जाता है। 

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बजट सत्र में फिर खिचेंगी सत्ता पक्ष और विपक्ष में तलवारें
चुनाव बाद संसद के विशेष सत्र में राहुल गांधी के 90 मिनट के भाषण ने उन्हें गजब का उछाल दिया है। राहुल गांधी की छवि में आए उछाल से भाजपा के नेता कदाचित चिंतित हैं। संसद के बजट सत्र को लेकर फ्लोर प्रबंधन से लेकर अन्य उपायों पर वह गंभीरता से विचार कर रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी राहुल गांधी के भाषण और सीधे आसन पर हमले ने थोड़ा तंग किया है। लोकसभा सचिवालय में भी यह खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। 
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माना जा रहा है कि इसको लेकर भी कुछ उपाय हो सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने राज्यसभा के संबोधन में साफ कर दिया है कि जैसे को तैसे की भाषा में जवाब दिया जाएगा। इसके सामानांतर विपक्ष भी काफी उत्साहित है। तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी का उत्साह देखते बनता है। सपा के अवधेश प्रसाद तो पूरी तरह से अभिभूत हैं।
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दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार को फिर घेरने की तैयारी कर रही है। किसान, महिला, युवा और बेरोजगार के मुद्दे पर सरकार की परेशानी बढ़ाने की पूरी तैयारी है। नीट, अग्निवीर के मुद्दे पर भी बजट सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति तैयार हो रही है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि न तो सत्ता पक्ष विपक्ष को गंभीरता से ले रहा है और न ही सत्ता पक्ष का रवैया देखकर विपक्ष उसे गंभीरता से ले रहा है। इसलिए अगले संसद के सत्र भी इसी तरह से चलने के आसार हैं।

गुजरात में कांग्रेस और राहुल के हौसले बुलंद हैं
राहुल गांधी गुजरात से लौटकर आए हैं। बड़े खुश हैं। राहुल से ज्यादा खुश गुजरात के कांग्रेसी नेता हैं। हरेश मलानी कहते हैं कि राहुल के इस बार के दौरे में अभूतपूर्व भीड़ थी। मलानी कहते हैं कि यह भीड़ राहुल और कांग्रेस से जुडऩे वालों की थी। क्योंकि गुजरात में भी अन्य पिछड़ा वर्ग और दलित कांग्रेस के पास तेजी से आ रहे हैं। गुजरात में दलितों की संख्या ठीकठाक है। मलानी इसका श्रेय लोकसभा चुनाव 2024 और खासकर उ.प्र. में बही राजनीतिक हवा को दे रहे हैं। शक्ति सिंह गोहिल को भी काफी उम्मीदे हैं। राहुल गांधी के सचिवालय में चुनाव सर्वेक्षण औकलन से जुड़े सूत्र का कहना है कि यदि आज चुनाव हो जाए तो कांग्रेस विधानसभा चुनाव में 50 सीटों के आंकड़े को छू सकती है। हालांकि पार्टी के ही एक बड़े नेता ने कहा कि कांग्रेस में इस तरह के कई नेता हैं जो पहले चने की झाड़ पर चढ़ाकर जिता देते हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद यह कहीं दिखाई नहीं देते।

भाजपा, बसपा, इंडिया गठबंधन सबको एक दूसरे का वोट झटक कर उ.प्र. में आगे बढ़ना है?
अखिलेश यादव का पीडीए कार्ड चल गया है। उनके पीडीए कार्ड से अनुप्रिया पटेल और ओम प्रकाश राजभर को घबड़ाहट होने लगी है। लिहाजा दोनों सीएम योगी आदित्यनाथ से नाराजगी जाहिर करने की कसरत कर रहे हैं। केशव प्रसाद मौर्या ने भी झंडा बुलंद कर रखा है कि जनाधार बढ़ाना है तो अन्य पिछड़ा वर्ग और दलित पर विशेष ध्यान देना होगा। दूसरी तरफ अखिलेश अब इसके अगले चरण के राजनीतिक दांव की तैयारी कर रहे हैं। अखिलेश के करीबी के मुताबिक हमारी नजर में उपचुनाव से भी बड़ा काम पीडीए के आधार को मजबूत करना है। इसलिए न तो इससे झुकना है और न रुकना। राहुल गांधी को अखिलेश के इस एजेंडे का पूरा ज्ञान है। रही बात मायावती की। वह थोड़ा तंग है। पहले उनका वोट बैंक टूटा तो भाजपा में गया। भाजपा ने बार पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। इस बार टूटा तो समाजवादी पार्टी की तरफ खिसक गया। ऐसे में असली लड़ाई पीडीए की ही है। भाजपा के एक बड़े नेता कहते हैं कि अखिलेश से थोड़ा पीडीए खिसकर बसपा की तरफ लौटे तो भाजपा का अपने आप भला हो जाएगा। अब देखना है कि फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव तक गोमती नदी का पानी कितना बदल पाता है।


शरद पवार फिर करेंगे मराठा सरदारी
भतीजे अजीत पवार का लोकसभा चुनाव में हश्र देखकर एनसीपी(शरद पवार) के प्रमुख को बड़ी आक्सीजन मिली है। पवार एक बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। उनके इस दांव पर शिवसेना(यूटीबी) और कांग्रेस की पूरी नजर है। भाजपा के रणनीतिकार भी बड़ी बारीकी से शरद पवार के प्लान पर नजर बनाए हुए हैं। शरद पवार की टीम का अनुमान है कि लोकसभा चुनाव में हश्र देखने के बाद भाजपा के राजनीतिक गुरू शिवसेना(एकनाथ शिंदे), महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के राज ठाकरे पर बरोसा करेंगे। ऐसे में एनसीपी छोडक़र सरकार के साथ गए नेताओं, विधायकों की घर वापसी आसानी से संभव है। शरद पवार गुट के एक बड़े नेता कहते हैं कि दर्जन भर विधायक और बड़े नेता आने को तैयार हैं, लेकिन अभी पवार साहब ही हरी झंडी नहीं दे रहे हैं।

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