राहुल गांधी कुछ भी बोलें तो बस तूफान खड़ा कर दो, जानिए क्यों?
- केरल में बोले और दिल्ली तक गरमाई राजनीति
- पवन खेड़ा कहते हैं कि राहुल बोले, समझने वाले समझ गए, जो न समझे वो सांबित पात्रा हैं
- स्मृति ईरानी, मप्र के मुख्यमंत्री चौहान, यूपी के मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, सांबित पात्रा सबने खोला मोर्चा
- दरअसल उत्तर भारत तो बहाना है, दक्षिण में कमल खिलाना है
विस्तार
राहुल गांधी केरल में बोले, वायनाड से सांसद चुने जाने का अनुभव बताया और बदले में राजनीति का तूफान दिल्ली तक खड़ा हो गया। भाजपा के मीडिया विभाग से जुड़े संजय मयूख, भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत सभी ने राहुल गांधी पर हमला बोल दिया। चौहान ने तो कहा कि राहुल जहां-जहां गए कांग्रेस पार्टी का बंटाधार हो गया। किसी ने राहुल गांधी को नासमझ तो किसी ने उत्तर-दक्षिण में बंटवारा करने वाला करार दे दिया। कांग्रेस को भी बचाव प्रवक्ताओं की टीम उतारनी पड़ी। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी हारने के बाद वायनाड जाने वाले राहुल गांधी को एहसान फरामोश तक करार दे दिया। संजय मयूख ने इसे बिहार का अपमान बताया।
क्या दक्षिण भारत में राहुल के कनेक्ट से घबड़ा गई है भाजपा?
राहुल गांधी उत्तर भारत के साथ दक्षिण भारत की राजनीति में काफी सक्रिय चल रहे हैं। कुछ दिन पहले वह पुडुचेरी में थे। पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार गिरने के समय भी राहुल गांधी वहां राजनीति का पारा चढ़ा रहे थे। इससे पहले केरल में थे। राहुल गांधी तमिलनाडु में भी थे। राहुल गांधी की दक्षिण भारत में इस सक्रियता की बड़ी वजह वहां राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय की माने तो पार्टी के लिए पश्चिम बंगाल, केरल, पुडुचेरी काफी अहम है। भाजपा तमिलनाडु में भी सहयोगी दलों के सहारे सत्ता चाहती है। ऐसा होने पर केरल, कर्नाटक, पुडुचेरी, तमिलनाडु में कमल का प्रभाव बढ़ेगा और पूरे देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मील का पत्थर स्थापित करेगी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुहिम को अहमियत दे रहे हैं। दक्षिण भारत में राहुल गांधी के पैर जमने से पहले इसे भाजपा का रणनीतिकारों द्वारा उनके कदम उखाड़ने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
दक्षिण में राहुल के पैर उखाड़ने की राजनीति कर रही भाजपा
कांग्रेस की प्रवक्ता, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव का कहना है कि भाजपा राहुल गांधी को दक्षिण भारत में मिल रही लोकप्रियता से परेशान है। इसलिए जानबूझकर तिल का ताड़ बनाने में जुटी है। कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता का कहना है कि लोगों को किसी राष्ट्रीय नेता की समझ पर सवाल उठाने से पहले सोचना चाहिए। राजनीति का इतना स्तर गिराना भी ठीक नहीं। पूर्व महासचिव का कहना है कि यह उत्तर भारत के लोग जानते हैं कि राहुल और कांग्रेस पार्टी दोनों उत्तर भारत का कितना आदर करते हैं। कांग्रेस पार्टी इसके साथ-साथ पूरे देश के हर क्षेत्र, जाति, धर्म, संप्रदाय का आदर करती है। कांग्रेस के लिए सब समान हैं। बंटवारा और नफरत की राजनीति भाजपा करती है। सूत्र का कहना है कि प्रयागराज में प्रियंका गांधी वाड्रा ने जाकर मछुआरों, नाविकों की समस्या सुनी है तो है तो तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल में राहुल गांधी ने इसे मजबूती के साथ उठाया है। मछुआरों की समस्या से राहुल गांधी के जुड़ने के बाद से ही भाजपा की परेशानी बढ़ गई है। इसलिए वह मुद्दे को तोड़-मरोड़ कर नया रंग देने में जुट गई है।
कांग्रेस के दूसरे प्रवक्ताओं की सुनिए
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तो कहा कि राहुल गांधी ने कहा, लोग समझ गए। जो नहीं समझे वह सांबित पात्रा हैं। पवन खेड़ा ने साबित पात्रा पर दो कारणों से निशाना साधा। एक तो यह कि सांबित पात्रा हमेशा राहुल गांधी को नासमझ साबित करने में लगे रहते हैं। दूसरे सांबित पात्रा भाजपा के आक्रामक प्रवक्ता हैं। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला खुद मैदान में उतर आए। सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा को अमन और भाई चारे की राजनीति करनी नहीं आती। उसे नफरत, बंटवारे की राजनीति करने में महारत हासिल है। पार्टी के प्रवक्ता और राज्य सभा में सदन के उपनेता आनंद शर्मा को भी मैदान में उतरना पड़ा। आनंद शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी ने जो कहा है, उसे समझदारी के साथ लिया जाना चाहिए। ऐसा कहकर उन्होंने कहीं भी उत्तर भारत का अपमान नहीं किया है। आनंद शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने कभी उत्तर भारत का अनादर नहीं किया। आजादी के बाद से उत्तर भारत ने देश के पहले प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे शानदार प्रधानमंत्री दिए हैं। यहां तक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी उत्तर भारत से ही हैं। आनंद शर्मा ने इसी तरह की सफाई अमेठी को लेकर भी दी।
आखिर ऐसा क्या कहा था राहुल गांधी ने?
राहुल गांधी ने त्रिवेंद्रम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि मैं 15 साल तक उत्तर भारत में सांसद था। मुझे एक अलग तरह की राजनीति की आदत हो गई थी। राहुल ने कहा मेरे लिए केरल आना बेहद नया अनुभव था, क्योंकि मुझे अचानक लगा कि यहां लोग मुद्दों में दिलचस्पी रखते हैं और जमीनी तौर पर मुद्दे को विस्तार में ले जाने वाले हैं। राहुल गांधी का इतना कहना भर था कि भाजपा के नेताओं ने इसे राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उछाल दिया।