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राजनेताओं पर नहीं, छात्रों पर क्यों?: झारखंड में पुलिस कार्रवाई पर भड़के दीपके; बोले 'अपने हक के लिए लड़ रहे'

Tue, 11 Aug 2026 11:05 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 11 Aug 2026 11:05 PM IST
सार

झारखंड में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए अभिजीत दीपके ने आंदोलनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो और छात्रों को समर्थन देने की बात कही तथा ग्रामीण शिक्षा, आदिवासी अधिकार, तमिलनाडु के छात्र आंदोलन और परिसीमन जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी।

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Why target students instead of politicians Abhijit Deepak outraged over police action in Jharkhand
अभिजीत दीपके - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने झारखंड सरकार पर जुबानी हमला बोला। उन्होंने छात्रों पर कथित तौर पर आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज किए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं, आंदोलन के नेता देवेंद्र नाथ महतो के प्रति समर्थन जताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी टीम लगातार आंदोलनकारियों के संपर्क में है और उन्हें हरसंभव मदद दी जा रही है।

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झारखंड में हुई कार्रवाई पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने झारखंड में हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां का घटनाक्रम बेहद खराब था। जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन से इसकी तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठियां बरसाई गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दल प्रदर्शन करते हैं तो उनके खिलाफ उसी तरह लाठीचार्ज या आंसू गैस का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता। लेकिन छात्रों के आंदोलनों के दौरान ही ऐसी कार्रवाई क्यों देखने को मिलती है।
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‘छात्र वोट बैंक के लिए नहीं, भविष्य के लिए लड़ रहे’
दीपके ने कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी वोट बैंक के लिए नहीं है। वे अपने अधिकारों और अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कथित तौर पर बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
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देवेंद्र नाथ महतो से लगातार संपर्क में टीम
अभिजीत दीपके ने बताया कि उनकी देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत हुई है। महतो कई दिनों से अनशन पर थे और इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई में उनके घायल होने की बात सामने आई है। महतो की तबीयत को लेकर उनकी टीम लगातार जानकारी ले रही है और अस्पताल में भी टीम के लोग मौजूद रहे। उन्होंने महतो से उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली और भरोसा दिया कि आंदोलनकारियों को जिस भी तरह की मदद की आवश्यकता होगी, उनकी टीम उनके साथ खड़ी रहेगी।

‘आंदोलन का नेतृत्व महतो के हाथ में ही रहना चाहिए’
उन्होंने कहा कि आंदोलन का नेतृत्व देवेंद्र नाथ महतो के हाथ में ही रहना चाहिए। नौ दिनों तक अनशन करना एक बड़ा त्याग है और इसलिए आंदोलन को मजबूत करने के लिए उनकी टीम हरसंभव सहयोग करेगी।

‘मेरा चेहरा नहीं, आंदोलन के मुद्दे महत्वपूर्ण’
जब दीपके से पूछा गया कि वह स्वयं रांची कब जाएंगे, तो उन्होंने कहा कि उनकी टीम पहले ही झारखंड पहुंच चुकी है और वहां लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आंदोलन में उनका चेहरा दिखाई दे, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आंदोलन के मुद्दों को मजबूती मिले। उनकी टीम आंदोलन के नेतृत्वकर्ता देवेंद्र नाथ महतो के साथ लगातार संपर्क में है। जब महतो विधानसभा की ओर जा रहे थे, तब भी उनकी टीम उनके साथ मौजूद थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य खुद को आंदोलन का चेहरा बनाना नहीं, बल्कि आंदोलन के नेतृत्व को मजबूत करना है।

आदिवासी और वंचित समुदायों के मुद्दों को समझना जरूरी
उमर खालिद की पुस्तक ‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर’ के विमोचन से जुड़े सवाल पर दीपके ने कहा कि यदि मौका मिला तो वह पुस्तक जरूर पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी और अन्य वंचित एवं हाशिए पर मौजूद समुदायों के मुद्दों को समझने के लिए इन विषयों पर पढ़ना जरूरी है। आजादी के लगभग 80 साल बाद भी देश के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है। आदिवासी समुदायों की जमीन और जंगलों पर उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं और इसके बदले उन्हें पर्याप्त लाभ नहीं मिला। समाज के स्तर पर आदिवासी बच्चों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने में कमी रही है। आधुनिक भारत के विकास में आदिवासी समुदायों को भी बराबर की जगह और अवसर मिलना चाहिए।

सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी उठाए सवाल
15 अगस्त के अवसर पर जारी अपने वीडियो में सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने के मुद्दे पर दीपके ने कहा कि देश की आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूलों की हालत चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 94 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। साथ ही उन्होंने बड़े सरकारी भवनों और बुनियादी ढांचे पर खर्च को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए उसी स्तर की सुविधाओं वाले स्कूल क्यों नहीं बनाए जा सकते।

‘ग्रामीण बच्चों को भी समान शैक्षणिक सुविधाएं मिलें’
दीपके ने कहा कि किसानों और मजदूरों के बच्चों को भी वही शैक्षणिक सुविधाएं और अवसर मिलने चाहिए जो शहरों में रहने वाले बच्चों को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद देश का ध्यान ग्रामीण इलाकों के विकास पर होना चाहिए, क्योंकि ग्रामीण भारत का विकास किए बिना देश को पूरी तरह विकसित बनाने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

गांव जाकर सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने की पहल
15 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर दीपके ने बताया कि वह अपने गांव जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह गांव के सरपंच और स्थानीय लोगों से सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम करने की अपील करेंगे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी शहरों में पढ़ने वाले बच्चों के समान सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर समाज की भागीदारी जरूरी है।

तमिलनाडु के छात्र आंदोलन को भी समर्थन
तमिलनाडु में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर भी दीपके ने समर्थन जताया। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कुछ छात्र उनसे मिलने आए थे और इस मुद्दे पर उनकी बातचीत हुई है। दीपके ने कहा कि उनकी तमिलनाडु की टीम आंदोलनकारियों के साथ संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर वह स्वयं भी वहां जाएंगे। छात्रों से जुड़े आंदोलनों में वह राज्य की सरकार को देखकर अपना समर्थन तय नहीं करते। जहां भी छात्रों के साथ अन्याय होगा और वे अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करेंगे, वहां उनकी टीम उनके साथ खड़ी रहेगी।


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परिसीमन को लेकर भी साधा निशाना
परिसीमन को लेकर पूछे गए सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुमत के आंकड़े के संदर्भ में उन्होंने कुछ राजनीतिक परिस्थितियों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बहुमत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कुछ कदम उठाए जा रहे हैं।

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