{"_id":"57abba384f1c1bee07ee4bfa","slug":"why-ramaraman-is-favourite-of-up-govt","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा रमारमन ही क्यों हैं एकमात्र पसंद","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा रमारमन ही क्यों हैं एकमात्र पसंद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Thu, 11 Aug 2016 05:05 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद उच्च न्यायालय
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के सीईओ के पद पर दस वर्षों से जमे आईएएस अधिकारी रमारमन की तैनाती पर हाईकोर्ट ने सरकार से सीधा सवाल पूछा है। अदालत ने कहा कि सरकार बताए कि पिछले दस वर्षों से एक ही अधिकारी को क्यों नोएडा में तैनात रखा गया है।
विज्ञापन
हो सकता है कि वह बहुत योग्य अधिकारी हों, अदालत उनकी योग्यता पर संदेह नहीं कर रही है मगर प्रदेश में दूसरे भी बहुत से काबिल अफसर हैं। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद दूसरे तमाम अधिकारी जो लंबे समय से यहां जमे थे हटा दिए, मगर रमारमन को फिर भी नहीं हटाया गया। इसका कारण स्पष्ट करने के लिए कहा है।
विज्ञापन
अखिल भारतीय मानव कल्याण एवं सामाजिक उत्थान समिति की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने 11 अगस्त को महाधिवक्ता से इस मुद्दे पर सरकार का स्टैंड क्लियर करने के लिए कहा है। पीठ ने यह भी बताने के लिए कहा है कि पिछले दस वर्षों में रमारमण किन-किन पदों पर और कहां-कहां तैनात रहे। नोएडा अथॉरिटी के अधिवक्ता ने कहा कि रमारमण सितंबर 2015 में ग्रेटर नोएडा के सीईओ बने हैं। इस हिसाब से उनको अभी एक वर्ष भी नहीं हुए।
विज्ञापन
वह 2005 से नोएडा अथॉरिटी में तैनात रहे हैं। तीनों अथॉरिटी का सीईओ होने की बात भी सही नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि जनहित याचिका दाखिल करने वाले व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती है कि वह बहुत तथ्यात्मक दस्तावेज ही प्रस्तुत करेगा।
उसकी जानकारी यदि कहीं गलत भी निकलती है तो याचिका खारिज करने का आधार नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी रूप में उनको नोएडा में ही रखा गया है, इसकी वजह पहले स्पष्ट की जानी चाहिए। इसके बाद ही वह अन्य मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर सुनवाई करेंगे।