फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why Rahul gandhi was silent on Pm Modi and amit Shah during his manipur visit

Manipur: मणिपुर में मोदी-शाह पर चुप क्यों रहे राहुल, क्या यह दांव खोलेगा कांग्रेस के लिए पूर्वोत्तर का द्वार?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 01 Jul 2023 03:39 PM IST
विज्ञापन
सार
Manipur: कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोइरांग में राहत शिविरों का दौरा कर हिंसा से पीड़ित लोगों का दुख दर्द जाना। राहुल का कहना था कि ये घटना न केवल मणिपुर के लिए, बल्कि देश के लिए भी अत्यंत दु:खद और दर्दनाक है। उन्होंने राजभवन पहुंचकर मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके से भी चर्चा की...
loader
Why Rahul gandhi was silent on Pm Modi and amit Shah during his manipur visit
Manipur: Rahul Gandhi - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार

मणिपुर की दो दिवसीय यात्रा के दौरान कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला। दूसरी तरफ जैसे ही राहुल गांधी ने मणिपुर में कदम रखा तो भाजपा की तरफ से उन पर आरोपों की बौछार कर दी गई। पार्टी नेता संबित पात्रा ने कहा था, स्टूडेंट यूनियन राहुल के दौरे का बॉयकाट कर रही है। सिविल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन को भी राहुल के दौरे पर एतराज है। कई जगहों पर महिलाओं का समूह भी विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इन सबके बावजूद राहुल ने कोई राजनीतिक बयान नहीं दिया। कांग्रेस नेता खुश हैं कि राहुल के इस दौर पर कोई विवाद नहीं हुआ। उन्हें भरोसा है कि राहुल की यह 'सियासी समझ' कांग्रेस पार्टी के लिए एक बार फिर से पूर्वोत्तर की सत्ता के द्वार खोलने में मददगार साबित होगी।   

यह भी पढ़ें: Manipur: मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने ट्विटर पर कुकी यूजर्स से की बहस, फिर डिलीट किए मैसेज

राहुल बोले, सर्वदलीय बैठक पीएम के लिए महत्वपूर्ण नहीं

राहुल गांधी और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व, इन दोनों के बीच एक दूसरे को लेकर बयानबाजी होती रहती है। राहुल गांधी ने जब विदेश में पीएम मोदी और उनकी सरकार को लेकर बयान दिया, तो उसके बाद भाजपा के तमाम बड़े नेताओं ने राहुल को निशाने पर ले लिया। हालांकि राहुल गांधी ने अपने किसी बयान से किनारा नहीं किया। मणिपुर में हो रही हिंसा को लेकर गत दिनों राहुल गांधी ने कहा था, पीएम मोदी अमेरिका की यात्रा पर हैं, उनके लिए मणिपुर पर सर्वदलीय बैठक महत्वपूर्ण नहीं थी। मणिपुर 50 दिनों से जल रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री चुप रहे। सर्वदलीय बैठक तब बुलाई गई, जब प्रधानमंत्री स्वयं देश में नहीं हैं। इससे पहले कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने एक वीडियो संदेश में मणिपुर के लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की थी। सोनिया गांधी ने कहा, इस हिंसा ने हमारे राष्ट्र की अंतरात्मा पर एक गहरा घाव छोड़ा है। मणिपुर में लोगों का जीवन तबाह कर दिया गया।

देश के लिए भी अत्यंत दु:खद और दर्दनाक है

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोइरांग में राहत शिविरों का दौरा कर हिंसा से पीड़ित लोगों का दुख दर्द जाना। इंफाल में सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। राहुल का कहना था कि ये घटना न केवल मणिपुर के लिए, बल्कि देश के लिए भी अत्यंत दु:खद और दर्दनाक है। उन्होंने राजभवन पहुंचकर मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके से भी चर्चा की। राज्यपाल को राहत शिविरों में आवश्यक संसाधनों की कमी से अवगत कराया। वे बोले, हिंसा से कोई समाधान नहीं निकलने वाला है, सिर्फ शांति ही समाधान है। जिस तरह से मणिपुर को लेकर राहुल गांधी ने पीएम पर निशाना साधा था, अपने दौरे के दौरान वे बिल्कुल शांत रहे। उन्होंने केवल मणिपुर के लोगों की बात की। उन्होंने कहा, शांति ही आगे बढ़ने का रास्ता है। हर किसी को अब शांति व सद्भाव के बारे में बात करनी चाहिए। राज्य में शांति लाने के लिए वह हर संभव मदद करेंगे।

'सियासी समझ' खोलेगी कांग्रेस के लिए पूर्वोत्तर का द्वार

कांग्रेस पार्टी के एक केंद्रीय नेता का कहना है कि मणिपुर दौरे में राहुल गांधी को वहां की हकीकत के बारे में बताया गया है। राहुल ने वहां के लोगों की मूल समस्या को जानने और समझने का प्रयास किया है। संभव है कि आने वाले समय में वे मणिपुर को लेकर अपनी पार्टी की कोई नई पहल तैयार करें। इसके लिए वे मैतेई, कुकी व नगा समुदाय के लोगों से दिल्ली में मिल सकते हैं। पार्टी नेता का कहना था कि भाजपा जो भी बयान दे, लेकिन राहुल की सियासी समझ ने कांग्रेस के लिए दोबारा से पूर्वोत्तर का द्वार खोलने की राह प्रशस्त की है। केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने से पहले उत्तर पूर्व के अधिकांश राज्यों में कांग्रेस की सत्ता रही है। असम के सीएम हिमंत विस्वा सरमा भी पहले कांग्रेस में ही थे। इस साल मिजोरम में चुनाव है। वहीं अगले वर्ष अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में भी विधानसभा चुनाव हैं। इन राज्यों की सत्ता से कांग्रेस बाहर है। पार्टी नेता ने कहा, राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों में चुनाव की तैयारी करने के लिए कहा है। इसके लिए वे जल्द ही पूर्वोत्तर राज्यों के कांग्रेस प्रभारियों के साथ एक बैठक करेंगे। चुनाव से पहले वहां की जो भी समस्या है, उस पर पार्टी का सार्वजनिक एजेंडा तैयार किया जाएगा।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed