{"_id":"5a3503964f1c1b74698c2172","slug":"why-google-opening-a-artificial-intelligence-center-in-china","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर क्यों खोल रहा गूगल?","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर क्यों खोल रहा गूगल?
बीबीसी हिंदी
Updated Sat, 16 Dec 2017 04:59 PM IST
विज्ञापन
Google Maps
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चीन में भले ही गूगल सर्च इंजन प्रतिबंधित हो, लेकिन अब गूगल वहां अपना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) रिसर्च सेंटर खोलने जा रहा है।
गूगल का कहना है कि एशिया में यह अपनी तरह का पहला रिसर्च सेंटर होगा जिससे स्थानीय टैलेंट को अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मौका मिल सकेगा। चीन भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के विस्तार में रुचि दिखा रहा है।
गूगल की वेबसाइट पर जारी एक ब्लॉग में यह जानकारी दी गई है, गूगल ने कहा है कि पहली एआई कंपनी बनने के लिए यह रिसर्च सेंटर बहुत महत्वपूर्ण होगा। गूगल क्लाउड एआई के प्रमुख वैज्ञानिक फी-फी ली ने कहा, ''एआई में वह क्षमता है कि इसकी मदद से पूरी दुनिया की तस्वीर बदली जा सकती है और जिंदगी आसान हो सकती है, फिर वह चाहे सिलिकन वैली हो या बीजिंग या कोई भी अन्य देश।''
विज्ञापन
बीजिंग स्थित गूगल के छोटे से दफ़्तर में यह रिसर्च सेंटर शुरू किया जाएगा, यहां वे तमाम सुविधाएं मुहैया होंगी जो गूगल के लंदन, न्यूयॉर्क, टोरंटो और ज्यूरिख के दफ्तरों में हैं। चीन में गूगल के दो दफ़्तर हैं जहां लगभग 600 कर्मचारी ही काम करते हैं। चीन में गूगल के सर्च इंजन और अन्य सेवाओं पर प्रतिबंध है।
पढ़ें: अमेरिका: H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार का झटका, खतरे में हजारों भारतीयों की नौकरी
पिछले कुछ सालों में चीन ने नए सेंसरशिप नियम लागू कर दिए गए जिसके बाद विदेशी कंपनियों पर सख़्त प्रतिबंध लगाए हैं। चीन में उस सामग्री पर भी प्रतिबंध लागू है जिसे राजनीतिक तौर पर उपयुक्त नहीं समझा जाता।
लेकिन इन तमाम प्रतिबंधों के बीच चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक में विस्तार करना चाहता है। जुलाई में चीन ने एआई के लिए राष्ट्रीय योजना की घोषणा भी की थी, इस योजना में अमरीका की बराबरी करने की बात कही गई थी।
हालांकि चीन में मौजूद मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि चीन इस तकनीक की मदद से आम नागरिकों की निजी जिंदगी में दखल देने की कोशिश करेगा।
विज्ञापन
गूगल का कहना है कि एशिया में यह अपनी तरह का पहला रिसर्च सेंटर होगा जिससे स्थानीय टैलेंट को अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मौका मिल सकेगा। चीन भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के विस्तार में रुचि दिखा रहा है।
विज्ञापन
गूगल की वेबसाइट पर जारी एक ब्लॉग में यह जानकारी दी गई है, गूगल ने कहा है कि पहली एआई कंपनी बनने के लिए यह रिसर्च सेंटर बहुत महत्वपूर्ण होगा। गूगल क्लाउड एआई के प्रमुख वैज्ञानिक फी-फी ली ने कहा, ''एआई में वह क्षमता है कि इसकी मदद से पूरी दुनिया की तस्वीर बदली जा सकती है और जिंदगी आसान हो सकती है, फिर वह चाहे सिलिकन वैली हो या बीजिंग या कोई भी अन्य देश।''
विज्ञापन
बीजिंग स्थित गूगल के छोटे से दफ़्तर में यह रिसर्च सेंटर शुरू किया जाएगा, यहां वे तमाम सुविधाएं मुहैया होंगी जो गूगल के लंदन, न्यूयॉर्क, टोरंटो और ज्यूरिख के दफ्तरों में हैं। चीन में गूगल के दो दफ़्तर हैं जहां लगभग 600 कर्मचारी ही काम करते हैं। चीन में गूगल के सर्च इंजन और अन्य सेवाओं पर प्रतिबंध है।
पढ़ें: अमेरिका: H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार का झटका, खतरे में हजारों भारतीयों की नौकरी
पिछले कुछ सालों में चीन ने नए सेंसरशिप नियम लागू कर दिए गए जिसके बाद विदेशी कंपनियों पर सख़्त प्रतिबंध लगाए हैं। चीन में उस सामग्री पर भी प्रतिबंध लागू है जिसे राजनीतिक तौर पर उपयुक्त नहीं समझा जाता।
लेकिन इन तमाम प्रतिबंधों के बीच चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक में विस्तार करना चाहता है। जुलाई में चीन ने एआई के लिए राष्ट्रीय योजना की घोषणा भी की थी, इस योजना में अमरीका की बराबरी करने की बात कही गई थी।
हालांकि चीन में मौजूद मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि चीन इस तकनीक की मदद से आम नागरिकों की निजी जिंदगी में दखल देने की कोशिश करेगा।