नगालैंड फायरिंग: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब, ग्रामीणों ने निकाला कैंडल मार्च
नगालैंड में सुरक्षाबलों की फायरिंग में कई नागरिकों की मौत के मामले में अमित शाह के बयान को कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने पूरी तरह खारिज कर दिया।
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विस्तार
नगालैंड में हुई नागरिकों की मौत के मामले में संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान से कांग्रेस संतुष्ट नहीं है। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि गृह मंत्री के बयान में दम नहीं है। उनके बयान का नागालैंड से आ रही परेशान करने वाली खबरों से कोई संबंध नहीं है। हम पूछ रहे हैं कि निर्दोष नागरिकों पर गोलियां क्यों चलाई गईं और एक सैनिक को अपनी जान क्यों गंवानी पड़ी। चौधरी ने कहा, कुछ दिन पहले मणिपुर में भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब एक कर्नल और उनके परिवार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उत्तर-पूर्व में ऐसा क्यों हो रहा है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब
नगालैंड फायरिंग मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने केंद्रीय रक्षा सचिव, केंद्रीय गृह सचिव, नगालैंड के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में एसआईटी द्वारा की जा रही जांच की स्थिति, मृतक के परिजनों को दी गई राहत, घायलों को दिए जा रहे चिकित्सा उपचार की स्थिति और घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों व अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामले शामिल होंगे।
वहीं, नगालैंड के मोन जिले में उग्रवाद विरोधी अभियान में नागरिकों की मौत पर नगालैंड के मानवाधिकार और छात्र समूहों ने दिल्ली के नगालैंड हाउस में मोमबत्ती जलाने का कार्यक्रम किया।
Human rights & student groups from Nagaland hold a candlelight vigil at Nagaland House in Delhi over the death of civilians in an anti-insurgency operation that went awry in Mon district of Nagaland pic.twitter.com/fwVULJ7HKE
— ANI (@ANI) December 6, 2021
कैंडल मार्च निकाला
मोन जिले के तिजित गांव में सैकड़ों लोगों ने सुरक्षाबलों के अभियान में आम नागरिकों के मारे जाने के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला।
इस बीच कांग्रेस का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नागालैंड का दौरा करेगा। प्रतिनिधिमंडल राज्य के मोन जिले में नागरिकों और हिंसा की हालिया घटनाओं से संबंधित मामलों पर रिपोर्ट करेगा। प्रतिनिधिमंडल एक सप्ताह के भीतर पार्टी प्रमुख को रिपोर्ट सौंपेगा।
खड़गे ने भी उठाए सवाल
नगालैंड में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में हुई नागरिकों की मौत पर सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बयान दिया। इसे लेकर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम पीड़ित परिवारों को मुआवजे के बारे में सवाल पूछना चाहते थे। लेकिन हमें सवाल पूछने का मौका ही नहीं दिया गया। उन्होंने (अमित शाह) केवल बोलते रहे और अंत में कह दिया कि सरकार को खेद है। इसका क्या मतलब है? इसका यह मतलब है कि आपने गलती की है। खड़गे ने कहा कि आपका खुफिया विभाग क्या कर रहा था? आपके खबरी क्या कर रहे थे? क्या उन्हें (अमित शाह को) यह सब नहीं पता होना चाहिए? हम उनसे ये सवाल पूछने वाले थे लेकिन उनके बयान के तुरंत बाद सदन को स्थगित कर दिया गया।
नगालैंड के सीएम रियो ने अफ्स्पा हटाने की मांग की
नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने सोमवार को सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्स्पा) को राज्य से हटाने की मांग की। 14 निर्दोष दिहाड़ी मजदूरों के अंतिम संस्कार के मौके पर रियो ने कहा कि राज्य के पास भी विशेषाधिकार है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, नगा लोग हमेशा से अफ्स्पा का विरोध करते आ रहे हैं। निर्दोष लोगों के बलिदान के भुलाया नहीं जाएगा। अफ्स्पा कानून को लेकर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड सांग्मा ने भी रियो के बयान का समर्थन करते हुए ट्वीट किया, अफ्स्पा हटाया जाना चाहिए।
21 के पैरा स्पेशल फोर्सेज के खिलाफ मामला दर्ज
मामले में सोमवार को 21 पैरा स्पेशल फोर्सेज (एसएफ) के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसमें कहा गया है कि सुरक्षाबलों की मंशा नागरिकों की हत्या करना और उन्हें घायल करना था। यह मामला तिजिट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। हालात को देखते हुए मोन जिले में धारा 144 लगा दिया गया। मृतकों के परिजनों को सोमवार को पांच-पांच लाख हुए की सहायता राशि दी गई।