फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why Doctors against of National Medical Commission bill, Will the villagers really benefit from this

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पर आपत्ति क्यों, क्या इससे गांवों में भी मिलेंगे डॉक्टर?

Fri, 02 Aug 2019 10:26 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Fri, 02 Aug 2019 10:26 PM IST
सार

  • विधेयक के विरोध में दिल्ली सहित देशभर के डॉक्टर हड़ताल पर
  • प्राइमरी हेल्थ में काम करने वाले भी मरीजों का इलाज कर सकेंगे
  • नए बिल ने डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय को विभाजित कर दिया है
  • इस विधेयक का फायदा गांव में रहने वाले लोगों को भी मिल पाएगा

विज्ञापन
Why Doctors against of National Medical Commission bill, Will the villagers really benefit from this
एनएमसी - फोटो : self

विस्तार

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक के विरोध में दिल्ली सहित देशभर के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। इस बिल के कई प्रावधानों को लेकर डॉक्टरों के संगठनों ने आपत्ति जताई है। हालांकि इस बिल को अब राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। 

विज्ञापन


स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि बिल गुणवत्ता और सस्ती चिकित्सा शिक्षा में सुधार करेगा। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि एनएमसी बिल राष्ट्रविरोधी, स्वास्थ्य विरोधी और गरीब विरोधी है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाएगी। लोगों के मन में कई सवाल हैं जैसे कि ये बिल क्या है और क्या सच में इससे गांवों में भी डॉक्टर मिलेंगे। 

विज्ञापन

बिल पर डाक्टरों को आपत्ति क्यों? ग्रामीणों को होगा फायदा

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के तहत छह महीने का एक ब्रिज कोर्स लाया जाएगा जिसके तहत प्राइमरी हेल्थ में काम करने वाले भी मरीजों का इलाज कर पाएंगे। हड़ताल करने वाले डॉक्टर इस प्रस्ताव का भी विरोध कर रहे हैं। इसके तहत ग्रेजुएशन के बाद डॉक्टरों को एक परीक्षा देनी होगी और उसके बाद ही मेडिकल प्रेक्टिस का लाइसेंस मिल सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन


नेशनल मेडिकल कमीशन में 25 सदस्य होंगे। सरकार द्वारा गठित एक कमेटी इन सदस्यों को मनोनीत करेगी। नए बिल ने डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय को विभाजित कर दिया है। इस बिल के कई प्रावधानों का विरोध करने वाले जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं।

बिल का विरोध करने वाले डॉक्टरों में से ऑल इंडिया मेडिकल साइंसेज के एक डॉक्टर कहते हैं कि बिल का मकसद सही है लेकिन प्रवधान गलत हैं। उनका विरोध है कि बिल के अनुसार ग्रामीण चिकित्सक छह महीने का कोर्स करके मरीजों के लिए दवाई लिख सकेंगे और इलाज कर सकेंगे। हम 10 साल पढ़कर डॉक्टर बनते हैं। पर वो छह महीने के बाद डॉक्टर बन सकते हैं।

बिल का विरोध करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि छह महीने के कोर्स से ग्रामीण इलाकों में नकली डॉक्टरों की संख्या बहुत बढ़ेगी और वो मरीजों को मूर्ख बनाकर उनसे पैसे वसूल करने की कोशिश करेंगे। इस से ग्रामीणों को नुकसान होगा। 

डॉक्टरों का कहना है कि कोई छह महीने में कैसे डॉक्टरी की पढ़ाई कर सकता है। इससे गांवों में अराजकता आ सकती है। डॉक्टर कहते हैं कि छह महीने की पढ़ाई के बाद प्राइमरी हेल्थ के लिए डॉक्टर तो बना दिए जाएंगे लेकिन उन्हें रेगुलेट कौन करेगा?


पटना के एक डॉक्टर का मानना है कि इससे ग्रामीणों को फायदा होगा। वो कहते हैं कि मैं बड़े अस्पतालों में काम करने के बाद अब ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएं देता हूं। ग्रामीण इलाकों में हेल्थ वर्कर्स की सख्त कमी है। ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की बहुत कमी है। हमें चाहिए कि हम ग्रामीण वर्कर्स को ट्रेनिंग दें ताकि वो ग्रामीण समाज की सेवा कर सकें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed