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Manipur Violence: मणिपुर में क्यों भड़की हिंसा? राज्य में फैली अशांति को समझने के लिए डेमोग्राफी समझना जरूरी

Sun, 09 Feb 2025 07:33 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 09 Feb 2025 07:33 PM IST
सार

क्यों, कब और कैसे...?  मणिपुर हिंसा को लेकर ये सवाल सब के मन में है कि आखिर इस हिंसा की असली जड़ क्या है? क्या सच में दो समुदायों के बीच फैली इस हिंसा ने राज्य की रूप रेखा बदलकर रख दी। बहराल स्थिति ये है कि सीएम बीरेन सिंह ने राज्य सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है। 

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Why did violence erupt in Manipur, CM Biren Singh resigned, Understand the whole story here News In Hindi
मणिपुर में क्यों भड़की हिंसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर में दो साल पहले बहुसंख्यक मैतेई समुदाय और कूकी समुदाय के बीच शुरू हुई हिंसा ने राज्य की स्थिति बदलकर रख दी। इसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई, वहीं लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। इस हिंसा के लिए देशभर में बातें हुई और लोगों ने राज्य के शासन और प्रशासन व्यवस्था हिंसा पर काबू पाने में असफल रहने के लिए जिम्मेदार ठहराया। हालांकि अब स्थिति ऐसी है कि मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद इस्तीफा दे दिया। 

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छात्रों के प्रदर्शन से मचा था बवाल
बता दें कि मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल करने की मांग के विरोध में छात्रों के संगठन ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर’ (एटीएसयूएम) ने मार्च बुलाया था। ‘आदिवासी एकता मार्च’ के नाम से हो रहे प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। मणिपुर में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने के खिलाफ हो रहा विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। इसके बाद कई संगठनों ने ‘आदिवासी एकता मार्च’ का आह्वान किया, जिसमें हिंसा भड़क गई। 
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सीएम ने दे दिया इस्तीफा
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार शाम मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। 2023  के अंत में राज्य में जातीय हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने जनता से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि यह पूरा साल बेहद खराब रहा। मैं राज्य के लोगों से तीन मई 2023 से लेकर आज तक जो कुछ भी हुआ है, उसके लिए माफी मांगता हूं। कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। कई लोगों ने अपना घर छोड़ दिया। मुझे इसका दुख है। पिछले तीन-चार महीनों में शांति की स्थिति देखकर मुझे उम्मीद है कि 2025 में राज्य में सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी।

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मणिपुर हिंसा की तस्वीर - फोटो : ANI
मणिपुर में क्या हो रहा है? 
मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल करने की मांग के विरोध में छात्रों के संगठन ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर’ (एटीएसयूएम) ने मार्च बुलाया था। ‘आदिवासी एकता मार्च’ के नाम से हो रहे प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा था कि रैली में हजारों आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया और इस दौरान तोरबंग इलाके में आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच झड़प शुरू हो गई। अधिकारी ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।

स्थिति को काबू करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, स्थिति को देखते हुए गैर-आदिवासी बहुल इंफाल पश्चिम, काकचिंग, थौबल, जिरिबाम और बिष्णुपुर जिलों और आदिवासी बहुल चुराचांदपुर, कांगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। राज्यभर में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तत्काल प्रभाव से पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है, लेकिन ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू हैं। कर्फ्यू लगाने संबंधी अलग-अलग आदेश आठ जिलों के प्रशासन द्वारा जारी किए गए हैं।

इस बीच, सेना ने जानकारी दी है कि मणिपुर नागरिक प्रशासन की अपील पर विभिन्न इलाकों में सेना की तैनाती की गई है। यह तैनाती तीन मई शाम से की गई है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

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मणिपुर हिंसा। - फोटो : PTI
क्यों हो रहा विरोध?
राज्य में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है। ये समुदाय इंफाल घाटी और उसके आसपास के इलाकों में बसा हुआ है। समुदाय का कहना रहा है कि राज्य में म्यांमार और बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

वहीं, मौजूदा कानून के तहत उन्हें राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है। यही वजह है कि मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी। अदालत में याचिकाकर्ता ने कहा कि 1949 में मणिपुर की रियासत के भारत संघ में विलय से पहले मैतेई समुदाय को एक जनजाति के रूप में मान्यता थी। 

इसी याचिका पर बीती 19 अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपना फैसले सुनाया। इसमें कहा गया कि सरकार को मैतेई समुदाय को जनजातीय वर्ग में शामिल करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया। अब इसी फैसले के विरोध में मणिपुर में हिंसा हो रही है।

क्या एसटी स्टेटस की मांग हिंसा की एकमात्र वजह है?
राज्य की पहाड़ी जनजातियों में फैली अशांति को समझने के लिए यहां की डेमोग्राफी समझना जरूरी है। भौगोलिक रूप से, राज्य को दो इलाकों, पहाड़ियों और मैदानों में बंटा है। 2011 की जनगणना के अनुसार मणिपुर की जनसंख्या 28,55,794 है। इसमें से 57.2 फीसदी घाटी के जिलों में और बाकी 42.8 फीसदी पहाड़ी जिलों में रहते हैं। मैदानी इलाकों में मुख्य रूप से मैतेई बोलने वाली आबादी रहती है। वहीं, पहाड़ियों में मुख्य रूप से नागा, कुकी जैसी जनजातियां निवास करती हैं। राज्य की मान्यता प्राप्त जनजातियां इन्हीं पहाड़ी क्षेत्रों तक सुरक्षा और वहां जमीन की खरीद पर प्रतिबंध की मांग भी करती रही हैं।

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मणिपुर हिंसा - फोटो : ANI
फैसले का जनजाति विरोध क्यों कर रहे हैं?
हाईकोर्ट के फैसले का राज्य का जनजातीय वर्ग विरोध कर रहा है। जनजातीय संगठनों का कहना है, 'मैतेई समुदाय को अगर जनजातीय वर्ग में शामिल कर लिया जाता है तो वह उनकी जमीन और संसाधनों पर कब्जा कर लेंगे। विरोध में एक और तर्क दिया जाता है कि जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दोनों में मैतेई का दबदबा है।
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