फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Why did the ministers of PM Modi started praising the farmers

किसान आंदोलन को खालिस्तानी और कांग्रेस प्रायोजित बताने से घबराई सरकार, पीएम मोदी के मंत्री क्यों करने लगे किसानों की तारीफ

Sun, 06 Dec 2020 02:32 AM IST
Jeet Kumar अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 06 Dec 2020 02:32 AM IST
विज्ञापन
Why did the ministers of PM Modi started praising the farmers
किसान आंदोलन - फोटो : पीटीआई

किसान आंदोलन की शुरुआत से ही सोशल मीडिया में कुछ लोग इसे खालिस्तानी आतंकियों की साजिश बताने लगे।  भाजपा के कई नेताओं ने भी किसान आंदोलन को कांग्रेस और विपक्ष की राजनितिक चाल बताया।

विज्ञापन


कहा गया कि यह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अस्थिर करने की साजिश है। लेकिन शनिवार को केंद्र और किसानों के बीच हुई पांचवें दौर की वार्ता में मोदी सरकार के मंत्रियों के रुख बिलकुल बदले हुए नजर आए।
विज्ञापन



मंत्रियों ने वार्ता के बीच किसानों के आंदोलन के शांतिपूर्ण होने पर उन्हें बधाई दी। मंत्रियों ने बातों-बातों में यह भी माना कि उनका आंदोलन विपक्ष द्वारा प्रायोजित नहीं है। केंद्र के इस बदले रुख से स्वयं किसान नेता भी हैरान हो गए। सवाल है कि केंद्र के रुख में यह परिवर्तन क्यों आया?
विज्ञापन
विज्ञापन


किसानों और सरकार के बीच हुई इस मीटिंग में मौजूद किसान नेता कविता कुरुगंती ने अमर उजाला को बताया कि सरकार के मंत्रियों ने पूरे आंदोलन के अहिंसक होने पर ख़ुशी जताई और इसके लिए किसान नेताओं को बधाई दी।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक के  दौरान ही कहा कि उनका आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण और गैरराजनीतिक रहा है। बाद में मीडिया के सामने भी उन्होंने यही रुख अपनाया। इससे साफ़ होता है कि सरकार अपनी गलती से हुए नुकसान को समझ रही है और अब बैकफुट पर जाकर डैमेज कण्ट्रोल करना चाहती है।

माना जा रहा है कि सोशल मीडिया में किसान आंदोलन को खालिस्तान और कांग्रेस प्रायोजित बताने से सरकार की छवि को ख़ासा नुकसान हो रहा था। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक़ लोग इन टिप्पणियों को सीधे प्रधानमंत्री और भाजपा से जोड़कर देख रहे थे।

यही कारण है कि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक में इस तरह के किसी भी विवाद से दूर रहने का सख्त निर्देश दिया गया। 

यही कारण है कि नरेंद्र सिंह तोमर ने पहले तो किसानों की बैठक में और बाद में मीडिया में आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया। इसका उद्देश्य किसानों का दिल जीतना ही था। साथ-साथ सरकार उन चर्चाओं पर भी विराम लगाना चाहती है जिनमें आंदोलन को खालिस्तान और विपक्ष से जोड़ा जा रहा था। 

सरकार की कोशिश हुई नाकाम
आल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के वरिष्ठ नेता अविक शाह ने अमर उजाला से कहा कि इस किसान आंदोलन को हिंसक बनाने की खूब कोशिश की गई। किसानों पर पानी की बौछार की गई, उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए। उनके रास्ते में गड्ढे खोदे गए। इन सबका उद्देश्य केवल यही था कि किसान हिंसा पर उतारू हो जाएं और इसके बहाने सरकार को किसानों पर बल प्रयोग का मौका मिल जाए।


अविक शाह के मुताबिक़, लेकिन हम इस साजिश से पूरी तरह वाकिफ थे। किसानों ने तय कर लिया था कि उनके ऊपर चाहे जितना हमला किया जायेगा, वे हिंसक नहीं होंगे। यही कारण है कि किसानों ने कोई हिंसा नहीं की और हल्के बल प्रयोग के बाद ही सरकार बदनाम होने लगी। सोशल मीडिया पर लोगों की टिप्पणियों को समझते हुए अब उसे रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed