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MP Patwari: क्या पटवारी परीक्षा में धांधली हुई, शिवराज ने नियुक्ति क्यों रोकी, आरोपों पर सरकार का रुख क्या है?

Fri, 14 Jul 2023 04:56 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 14 Jul 2023 04:56 PM IST
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सार
MP Patwari: मध्यप्रदेश में समूह-2 उपसमूह-4 के अंतर्गत पटवारी और अन्य समकक्ष पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा का आयोजन 15 मार्च से 26 अप्रैल 2023 तक किया गया था। 30 जून को नतीजे आने के साथ ही अभ्यर्थियों ने परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगाए। इस बीच, गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस परीक्षा के आधार पर होने वाली सभी नियुक्तियों पर रोक लगा दी। 
 
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why did Shivraj government in mp stop patwari recruitment and its stand on the allegations
पटवारी परीक्षा - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा ग्रुप-2 उप समूह-4 और पटवारी भर्ती परीक्षा के आधार पर होने वाली नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहाने ने खुद इसका एलान किया है। इस परीक्षा के नतीजे आने के बाद से ही अभ्यर्थी भारी अनियमितता के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस इसे व्यापमं का एक और घोटाला कह रही है। 


आइये जानते हैं कि आखिर पटवारी और अन्य पदों के लिए परीक्षा कब और कितनी सीटों के लिए आयोजित की गई थी? इसका परिणाम कब आया? नतीजे जारी होने के बाद क्या हुआ? परीक्षा कराने वाले बोर्ड पर क्या आरोप लगे? नियुक्ति पर रोक क्यों लगी? पूरे विवाद में अभी क्या हो रहा है? इसमें राजनीति क्या हो रही है? सरकार ने आरोपों पर क्या जवाब दिया? 

पटवारी परीक्षा
पटवारी परीक्षा - फोटो : अमर उजाला
पटवारी और अन्य पदों के लिए परीक्षा कब और कितनी सीटों के लिए हुई?
मध्यप्रदेश में समूह-2 उपसमूह-4 सहायक संपरीक्षक, सहायक जनसंपर्क अधिकारी, सहायक नगर निवेक्षक, सहायक राजस्व अधिकारी, सहायक अग्नि शमनअधिकारी और समकक्ष पदों की सीधी एवं बैकलॉग भर्ती तथा भू-अभिलेख, राजस्व विभाग के अंतर्गत पटवारी (कार्यपालिक) पद के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा 2022 का आयोजन 15 मार्च से 26 अप्रैल 2023 तक किया गया। 

यह परीक्षा मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल यानी ईएसबी (पूर्व में व्यापमं) द्वारा राज्य के 13 शहरों में ऑनलाइन मोड में आयोजन किया गया था। ईएसबी ने परीक्षा को दो पालियों में संपन्न कराया था। 

पटवारी भर्ती परीक्षा
पटवारी भर्ती परीक्षा - फोटो : अमर उजाला
इसका परिणाम कब आया?
परीक्षा आयोजित होने के करीब दो महीने बाद इसका परिणाम 30 जून को जारी किया गया। इसके पहले 28 अप्रैल को परीक्षा की प्रोविजनल आंसर की आई थी। भर्ती परीक्षा कुल 9073 पदों के लिए हुई, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा पटवारी के लिए 6,806 पद निर्धारित थे। यही कारण है कि यह पटवारी परीक्षा के रूप में ज्यादा चर्चित है। 

दरअसल, पटवारी खेती बाड़ी की जमीन और उसकी उपज का लेखाजोखा रखना इनका मुख्य कार्य है। यह अपने क्षेत्र के अंतर्गत भूमि का रिकॉर्ड रखता है। कई राज्यों में इन्हें लेखपाल या पटवार भी कहा जाता है। 

पटवारी भर्ती परीक्षा के लिए पहुंचे छात्र
पटवारी भर्ती परीक्षा के लिए पहुंचे छात्र - फोटो : अमर उजाला
नतीजों के बाद क्या हुआ?
ईएसबी ने जब से पटवारी भर्ती परीक्षा 2023 के रिजल्ट घोषित किए हैं, तब से विवाद शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल समेत इंदौर और प्रदेशभर में अयोग्य घोषित अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। अभ्यर्थियों के निशाने पर भिंड से भाजपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह का परीक्षा केंद्र एनआरआई इंस्टीट्यूट है जो ग्वालियर जिले में स्थित है। दावा किया जा रहा है कि यह कॉलेज कई वर्षों से बंद है और पिछले दिनों केवल पटवारी परीक्षा के लिए यह खुला। ये बातें सेंटर के सुरक्षाकर्मियों ने खुद मीडिया के सामने बताई हैं। 

कंप्यूटर पर 157 नंबर दिखे, रिजल्ट में केवल 86.1
परीक्षा केंद्रों में कथित गड़बड़ी के अलावा तकनीकी खामियों को लेकर भी परीक्षा विवादों में फंस चुकी है। ऐसा ही एक मामला राजगढ़ नरसिंहगढ़ तहसील के बकानी गांव निवासी नीतू का है जो पिछले चार साल से पटवारी बनने का सपना आंखों में संजोए दिन-रात मेहनत कर रहीं थीं।

नीतू ने दावा किया कि उन्होंने इस भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण किया था। परीक्षा खत्म होने के बाद कंप्यूटर स्क्रीन पर उन्हें 157 अंक दिखे, लेकिन जब परिणाम आया तो 86.1 अंक मिले, जिसमें वह नॉट क्वॉलीफाई रहीं। ऐसे में नीतू के पिता सुरेश राजपूत ने कर्मचारी चयन मंडल आयोग में परीक्षा परिणाम के संबंध में शिकायती आवेदन देकर संशोधन करने की मांग की है। 

इस मामले में नीतू ने बताया कि उन्होंने 21 मार्च को पटवारी की परीक्षा दी थी। उनका सेंटर श्री वैष्णव पॉलीटेक्निक कॉलेज इंदौर था। परीक्षा के बाद उन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर 157 नंबर दिखे थे। परीक्षा के बीच में दो बार कंप्यूटर बंद भी हुआ। वहीं, परिणाम आने के बाद उन्हें 87.3 नंबर मिले और नॉर्मलाइजेशन के बाद 86.1 रह गए।   

मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती परीक्षा पर बवाल
मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती परीक्षा पर बवाल - फोटो : SOCIAL MEDIA
विवाद पर अब क्या हो रहा है?
परीक्षा के रिजल्ट के बाद कई शहरों में अभ्यर्थी जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को राजधानी भोपाल समेत इंदौर और प्रदेशभर में अयोग्य घोषित अभ्यर्थियों ने नारेबाजी कर गड़बड़ी के आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की। भोपाल में पटवारी परीक्षा के हजारों अभ्यर्थी कर्मचारी चयन मंडल के सामने एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर अयोग्य घोषित किया गया और अपात्रों को सफल घोषित किया गया है। इंदौर में गुरुवार सुबह हजारों छात्रों ने पटवारी परीक्षा में घोटाले का आरोप लगाते हुए कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। 

मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती परीक्षा पर बवाल
मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती परीक्षा पर बवाल - फोटो : SOCIAL MEDIA
नियुक्ति पर रोक क्यों लगी? 
छात्रों के विरोध प्रदर्शन की गूंज गुरुवार को ही सरकार के कानों तक पहुंची। इस बारे में रात में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संजीव सिंह कुशवाह के कॉलेज के सेंटर के रिजल्ट का दोबारा परीक्षण किया जाएगा।

राहुल गांधी।
राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला
इसमें राजनीति क्या हो रही है? 
इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी सरकार के खिलाफ हमलावर हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ट्वीट में कहा, 'पटवारी परीक्षा घोटाला, व्यापमं घोटाला 2.0 है, जो प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। पहले, भाजपा ने जनता की चुनी हुई सरकार चोरी की, अब विद्यार्थियों से उनका हक, युवाओं से रोजगार चोरी कर रही है।’ 

पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता कमलनाथ
पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता कमलनाथ - फोटो : अमर उजाला
कमलनाथ बोले- मुख्यमंत्री ने स्वीकारी धांधली
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है कि मुख्यमंत्री इस परीक्षा के जरिये होने वाली नियुक्तियां रोकने का फैसला कर यह स्वीकार कर लिया है कि इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है। मैं मुख्यमंत्री से स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि कोई भी फैसला ऐसा होना चाहिए जिसमें अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं हो। 

नरोत्तम मिश्रा, गृहमंत्री
नरोत्तम मिश्रा, गृहमंत्री - फोटो : अमर उजाला
सरकार ने आरोपों पर क्या जवाब दिया? 
मध्य प्रदेश पटवारी चयन परीक्षा 2023 के नतीजे आते ही पूरे प्रदेश में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए  है। पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत कई नेताओं ने इसे भाजपा का व्यापमं घोटाला बताया है। इस बीच, सरकार ने तमाम आरोपों पर जवाब भी दिए हैं।

आरोप 1: चयनित अभ्यर्थियों में से लगभग एक हजार चयनित अभ्यर्थियों का सेंटर ग्वालियर का एनआरआई कॉलेज है। (यह वही कॉलेज है, जिसे भाजपा विधायक का बताया जा रहा है)
सरकार का दावा: मेरिट लिस्ट में आठ हजार 617 अभ्यर्थी समस्त 78 परीक्षा केन्द्रों से चयनित हुए हैं। ग्वालियर स्थित एनआरआई कॉलेज से 1000 अभ्यर्थियों के चयन की जानकारी भ्रामक एवं तथ्यहीन है। यहां से कुल 114 अभ्यर्थी (1.32%) चयनित हुए हैं। अन्य परीक्षा केंद्रों से भी अधिकतम 321 अभ्यर्थी (3.73%) से लेकर न्यूनतम 29 अभ्यर्थियों (0.34 %) का चयन मेरिट में हुआ है।

आरोप 2: 10 में से 7 टॉपर्स ग्वालियर स्थित परीक्षा केंद्र एनआरआई कॉलेज से हैं। 
सरकार का दावा: टॉप 10 स्थान प्राप्त सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा दिनांक और पाली अलग-अलग है। यानी इनके प्रश्न-पत्र भी अलग-अलग थे। सभी के प्रोफाइल पंजीयन एवं आवेदन पत्र भी अलग- अलग जगहों से भिन्न-भिन्न तारीखों में हुए हैं। दस टॉपर्स में से दो अनारक्षित, एक ईडब्ल्यूएस-विकलांग, एक एससी और छह ओबीसी श्रेणी से हैं।

आरोप 3: अधिकतर टॉपर्स के हस्ताक्षर हिंदी में हैं और उनके अंग्रेजी में 25 में से 25 अंक आए हैं।
सरकार का दावा: टॉप 10 अभ्यर्थियों में से छह ने हिंदी में तथा चार ने अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए हैं। हस्ताक्षर की बनावट हिंदी या अंग्रेजी में होने के कारण परीक्षा में प्रवेश से रोकने संबंधित कोई नियम मंडल में लागू नहीं है। टॉप 10 के किसी भी अभ्यर्थी ने प्रश्न-पत्र के सामान्य अंग्रेजी सेक्शन में 25 में से 25 अंक प्राप्त नहीं किए हैं। इस सेक्शन में उनके अंक 13 से 23 के बीच आए हैं।
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