BJP: भाजपा के बिखरे वोट बैंक को सहेजने में जुटे सीएम योगी, ओबीसी समुदाय को 60 फीसदी नौकरी देने का किया दावा
भाजपा के अंदरखाने चर्चा है कि आपसी मतभेद से नुकसान की आशंका से केंद्र ने सबको कदमताल करते हुए एक साथ चलने की चेतावनी दी है। सरकार और संगठन को पूरी तरह एकजुट होकर काम करने का निर्देश दिया गया है।
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केंद्र की 'घुट्टी' पीकर लखनऊ पहुंचे भाजपा नेताओं के सुर अचानक एक हो गए हैं। अब हर मंच से सबके एक साथ होने के न केवल संदेश दिए जा रहे हैं, बल्कि एक सुर में बोलकर यह संदेश देने की कोशिश भी की जा रही है कि हम सब साथ-साथ हैं। अब तक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच तनातनी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठक से दोनों उपमुख्यमंत्रियों सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं के गायब रहने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की बैठक से वापस जाने के बाद यूपी भाजपा के नेताओं के सुर पूरी तरह बदल गए हैं।
भाजपा के अंदरखाने चर्चा है कि आपसी मतभेद से नुकसान की आशंका से केंद्र ने सबको कदमताल करते हुए एक साथ चलने की चेतावनी दी है। सरकार और संगठन को पूरी तरह एकजुट होकर काम करने का निर्देश दिया गया है। 'महत्त्वाकांक्षा' पाल रहे नेताओं को भी पार्टी के हित में काम करने के लिए 'मिलजुलकर' रहने के लिए कहा गया है। यही कारण है कि अब वे न केवल एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, बल्कि हर विपक्षी चाल को भोथरा करने का दम भी भर रहे हैं।
सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ली गई एक बैठक प्रदेश में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया और बैठक के बाद एक साथ फोटो खिंचवाकर एक साथ होने का प्रदर्शन भी किया। इस अवसर पर योगी आदित्यनाथ के चेहरे से झलकती खुशी से अनुमान लगाया जा रहा है कि अब सब कुछ ठीक हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो पूरे दमखम से लोकसभा चुनाव में भाजपा के बिखरे वोट बैंक को सहेजने में जुट गए हैं।
पिछड़ा वर्ग मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने ओबीसी समुदाय को समाज का 'हनुमान' करार दे दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग भी हिंदू समाज की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें ये हनुमान परास्त कर देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस तरह से विदेशी आक्रांताओं ने हिंदू समाज में फूट डालने का षड्यंत्र रचा था, आज विपक्षी दल वही काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज में बजरंगबली की शक्ति है, बस उस शक्ति को जगाने की आवश्यकता है। हिंदू समाज को तोड़ने में लगे रावण की लंका के दहन में देरी नहीं लगेगी।
योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह संकेतों में ओबीसी समाज को हनुमान की संज्ञा दी है, माना जा रहा है कि वे इसी वर्ग को साधते हुए भाजपा की राजनीति को आगे बढाने की कोशिश करेंगे। यानी भाजपा पूरी मजबूती के साथ गैर-यादव ओबीसी को पूरे दमखम के साथ साधने में जुट गई है। मुख्यमंत्री ने जिस तरह अपने कार्यकाल में ओबीसी समाज को दी गई नौकरियों की जानकारी दी है, उसे इस वर्ग को साधने की कोशिश के तौर पर ही देखा जा रहा है।
60 प्रतिशत नौकरी ओबीसी को
दरअसल, पिछड़ा वर्ग समिति की बैठक में योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि उनकी सरकार में साढ़े छह लाख सरकारी भर्तियों में से 60 फीसदी लोग ओबीसी समाज के भर्ती हुए हैं। यह दावा इस अर्थ में बेहद महत्वपूर्ण है कि विपक्षी पार्टियों ने चुनाव के दौरान इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। खुद सरकार के ही एक महत्वपूर्ण नेता ने दूसरे विभागों की भर्तियों की जानकारी मांगकर सरकार को असहज कर दिया था। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस जवाब ने पक्ष-विपक्ष के लोगों को जवाब देने के साथ ही जनता के वर्ग को भी संतुष्ट करने का काम किया है, ऐसा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री जानते हैं कि समाजवादी पार्टी तेजी से अपने आपको मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लिहाजा उन्होंने सपा पर हमला बोलना भी शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में उत्तर प्रदेश लोक सेवा की आयोग की भर्ती में 86 में से 56 एसडीएम केवल एक ही जाति के भर्ती किये गए थे। यानी भाजपा एक बार फिर गैर-यादव ओबीसी समुदाय को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने ओबीसी समाज के लोगों का रोजगार छीना था, जबकि भाजपा ने इस समुदाय को रोजगार उपलब्ध कराने का काम किया है।