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मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे ने अमृता फडणवीस के घर आने का न्योता स्वीकारा, कहा- साड़ी लेकर जाऊंगा यह मेरा वादा
Thu, 10 Sep 2026 11:46 AM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:46 AM IST
सार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल को अपना भाई बताया है। इतना ही नहीं उन्होंने जरांगे को घर पर भोजन के लिए भी आमंत्रित किया है।
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अमृता फडणवीस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल को अपना भाई बताया है। उन्होंने जरांगे पाटिल को अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित भी किया है। अमृता की तरफ से भाई बताने और घर खाने पर बुलाने पर जरांगे का जवाब आया है। गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए जरांगे ने कहा कि अभी उनके पास जाने का समय नहीं है। हालांकि, अगर वह उन्हें 'प्यार और अपनापन' से बुला रही हैं, तो वह 'भाऊबीज' के दौरान उनसे मिलेंगे।
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'जारंगे पाटिल मेरे भाई'
जानकारी के लिए बता दें कि अमृता फडणवीस बुधवार रात नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। इसी दौरान मनोज जरांगे पाटिल और उनके आंदोलन को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, 'जारंगे पाटिल मेरे भाई हैं और मैं उन्हें हमारे घर पर खाने के लिए आमंत्रित करती हूं।' वहीं, मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा था कि सरकार संविधान के तहत जो भी संभव होगा, वह करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक समुदाय के हिस्से से लेकर दूसरे समुदाय को कुछ नहीं दिया जाएगा। हम हर संभव प्रयास करेंगे। हमने बातचीत के लिए कभी दरवाजे बंद नहीं किए। सरकार चर्चा के माध्यम से समाधान निकालती है और पूरी प्रक्रिया इसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है।
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'साड़ी लेकर जाऊंगा यह मेरा वादा है'
अमृता के द्वारा न्यौता दिए जाने पर जरांगे ने अंतरवाली सराटी गांव में अपने विरोध स्थल पर पत्रकारों से कहा कि अगर भाई आंदोलन कर रहा है, तो बहन को इस समय खाने के लिए नहीं बुलाना चाहिए। भाई को परेशानी होगी। बहन को इस बारे में सोचना चाहिए और मुझे भाऊबीज पर बुलाना चाहिए... मैं (उनके लिए) साड़ी लेकर जाऊंगा, और यह मेरा वादा है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई अच्छी नीयत से बात करता है, तो हर बार उस पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है। अगर आप मुझे युद्ध के मैदान से बुला रहे हैं, तो मुझे हार माननी होगी। अगर कोई अच्छी भावना से कुछ कह रहा है, तो हर बार उसका गलत मतलब निकालने की जरूरत नहीं है। लेकिन अभी उनके निमंत्रण पर जाने का समय नहीं है क्योंकि यह भाई अभी गरीब लोगों के बच्चों के लिए लड़ रहा है। भाऊबीज के दौरान जरूर जाऊंगा।
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पिछले साल भी जरांगे ने किया था आंदोलन
जब उनसे पूछा गया कि सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने क्यों नहीं आया, तो जारांगे ने तंज करते हुए कहा कि मराठा आरक्षण के लिए अपने तीन साल के आंदोलन के दौरान उन्होंने कभी किसी का इंतजार नहीं किया। मैं अपने दम पर आंदोलन कर रहा हूं। (सरकार का) प्रतिनिधिमंडल वैसा ही व्यवहार करेगा जैसा उन्हें निर्देश दिया जाएगा। जब एक ही गाइड हो तो ठीक रहता है। अगर अलग-अलग विचारधाराओं वाले गाइड एक साथ आ जाएं, तो गड़बड़ हो जाती है। अपनी योजना को दोहराते हुए जारांगे ने कहा कि मैं निश्चित रूप से मुंबई जाऊंगा और 12 सितंबर को तारीख की घोषणा करूंगा। कुछ भी छिपाया नहीं जाएगा। पिछले साल 29 अगस्त से मुंबई के आजाद मैदान में जारांगे के पांच दिन के विरोध प्रदर्शन के कारण भारी ट्रैफिक जाम लग गया था और राज्य सरकार द्वारा उनकी आठ में से छह मांगें मान लेने के बाद 2 सितंबर को यह प्रदर्शन खत्म कर दिया गया था।
नवरात्रि और गरबा को लेकर भी बोलीं अमृता
अमृता फडणवीस ने बुधवार को नवरात्रि और गरबा को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि त्योहार सभी को साथ लेकर चलने वाले होते हैं और अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति किसी समारोह में शामिल होता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने नवरात्रि कार्यक्रमों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की विश्व हिंदू परिषद की मांग का समर्थन किया है।
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हिंदू धर्म की झलक दिखाने का माध्यम हैं गरबा
अमृता फडणवीस ने कहा कि नवरात्रि और गरबा लोगों को हिंदू धर्म की झलक दिखाने के बहुत अच्छे माध्यम हैं। उन्होंने इन आयोजनों की विशिष्टता से दुनिया को परिचित कराने का आह्वान भी किया। बता दें कि विश्व हिंदू परिषद ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि उत्सव के दौरान राज्य भर में आयोजित होने वाले 'गरबा' और 'डांडिया' स्थलों पर मुसलमानों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।