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सजा में इतनी देरी क्यों?

Sun, 29 Apr 2018 11:39 AM IST
रोहित यादव
रोहित यादव Updated Sun, 29 Apr 2018 11:39 AM IST
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why delay for punishment in rape cases

ऐसा लगता है कि देश में बलात्कार और हत्या जैसी खबरें अब आम-सी हो गई हैं। हर रोज अखबार के किसी-न-किसी पन्ने पर ये मनहूस खबरें छपी मिल ही जाती हैं। देश के प्रधानमंत्री खुद ब्रिटेन दौरे पर इस तरह की बढ़ती घटनाओं से आहत दिखाई दिए। पर सवाल उठता है कि जिस तरह से देश में हर रोज बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं, क्या उसी रफ्तार से बलात्कार के आरोपियों को उनके किए की सजा भी मिल पाती है?

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समाज का हर वर्ग सड़कों पर उतरकर बलात्कार के आरोपियों को सिर्फ फांसी देने की मांग करता दिखाई पड़ता है। पर क्या हकीकत में ऐसा होता है? शायद नहीं, क्योंकि रेप के आरोप में आखिरी बार पश्चिम बंगाल के एक आरोपी को सन 2004 में फांसी की सजा दी गई थी। उसके बाद पिछले कुछ सालों में देश में बलात्कार के आरोप में एक भी आरोपी को फांसी नहीं दी गई। 
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हालांकि, 2013 में निर्भया केस में आरोपियों को फांसी की सजा का फैसला सुनाया गया था, लेकिन अभी तक उन्हें फंसी नहीं दी गई है। इंसाफ की आस लेकर सालों से अदालतों के चक्कर लगा रही बेटियों के लिए ये स्थिति वाकई चिंताजनक है। अगर इसी रफ्तार से देश की अदालतें चलेंगी, तो बेटियों को इंसाफ कैसे मिलेगा? बलात्कार की घटनाएं लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। सिर्फ फास्ट ट्रैक कोर्ट और कानूनों में बदलाव से कुछ नहीं हो सकता। अदालतों की इस धीमी रफ्तार को देखकर देश में निराशा और अपराधियों का मनोबल न बढ़े, इस पर हमें गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

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