क्या कांग्रेस की सरकारों को अस्थिर करेगी भाजपा, इतनी भयभीत क्यों है देश की सबसे पुरानी पार्टी
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तेलगू देशम पार्टी के छह में से चार राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए। एकाएक हुए इस घटनाक्रम से कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल खुद को भयभीत महसूस करने लगे हैं। सबसे ज्यादा भय कांग्रेस पार्टी को सता रहा है। पार्टी को लग रहा है कि भाजपा अब उन राज्यों की सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास करेगी, जहां कांग्रेस की सत्ता है।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा का कहना है, मोदी सरकार अगर सच में न्यू इंडिया का सपना देख रही है तो पहले उसे खुद को दलबदल जैसी बुराई से दूर ले जाना होगा। भाजपा अभी से ही तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकारों पर निशाना लगा रही है। दूसरी ओर, इस मामले में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी खुलकर भाजपा पर हमला बोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धन बल, बाहुबल और जांच एजेंसियों के बलबूते पर विपक्ष की सरकारों को अस्थिर करने की योजना बना रही है।
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से लेकर दोबारा मोदी सरकार का गठन होने तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने एक राष्ट्र एक चुनाव के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के अध्यक्षों की बैठक बुलाई तो कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने इसका बहिष्कार कर दिया। पार्टी का कहना था कि मोदी का प्रयास केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।
कई चेहरे लगाकर काम कर रही भाजपा : कांग्रेस
गुरुवार को संसद में राष्ट्रपति के भाषण के छह घंटे बाद ही सूचना आई कि टीडीपी के चार सांसदों ने पाला बदल लिया है। इससे कांग्रेस पार्टी सकते में आ गई। जब यह मालूम हुआ कि इनमें से दो सांसदों के खिलाफ तो सीबीआई और वित्तीय जांच एजेंसियों के मामले चल रहे हैं तो इस बात ने कांग्रेस का डर और ज्यादा बढ़ा दिया।
पार्टी नेता आनंद शर्मा कहते हैं, हमें इस पर कोई हैरानी नहीं है। भाजपा तो पहले से ही ऐसे प्रयास करती आई है। दिक्कत केवल इतनी है कि मोदी सरकार कई चेहरे लगाकर काम कर रही है। संसद में उसका चेहरा कुछ और होता है। उसके बाहर जो चेहरा है, वो गुरुवार को पूरी दुनिया ने देख लिया। सदन में भाजपा न्यू इंडिया की बात करती है तो उसके कुछ ही घंटे बाद टीडीपी के चार सांसदों को अपनी पार्टी ज्वाइन करा देती है।
शर्मा ने कहा, अगर प्रधानमंत्री सही रूप में कुछ करना चाहते हैं, तो वे सबसे पहले दलबदल जैसी राजनीतिक बुराई से किनारा करें। तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकारों पर भाजपा जो निशाना लगा रही है, ऐसे प्रयासों को बंद करना होगा। भाजपा के पास सरकारी तंत्र है, वह इसका दुरुपयोग कर कांग्रेस की सरकारों को अस्थिर करना चाहती है। ऐसे में कोई भी विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बुलाई गई एक राष्ट्र एक चुनाव की बैठक में क्यों पहुंचेगा।
सरकारी तंत्र के बल पर अपनी संख्या बढ़ाने का प्रयास भाजपा का पुराना खेल है : सुरजेवाला
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कहते हैं कि भाजपा ने अब साबित कर दिया है कि वह सरकार के बल पर अपनी संख्या को कहीं तक भी बढ़ा सकती है। मोदी सरकार को दोबारा सत्ता संभाले अभी चंद दिन ही हुए हैं, लेकिन उसने दूसरे दलों की सरकारों को अस्थिर करने का अपना पुराना खेल शुरू कर दिया है। भाजपा को संविधान से कोई मतलब नहीं है। जो कोई राजनीतिक दल इनकी बात नहीं मानता, ये उनकी सरकार गिराने का प्रयास करने लगते हैं।
रणदीप के मुताबिक, पीएम मोदी ने 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की एक रैली में कहा था कि 40 विधायक उनके संपर्क में हैं। नतीजा, अभी हाल ही में टीएमसी के दो सांसद और कुछ विधायक भाजपा में शामिल हो गए। अरुणाचल प्रदेश में क्या हुआ था, यह किसी से छिपा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में मामला चला गया। मणिपुर में कांग्रेस पार्टी के आठ विधायकों को भाजपा में शामिल करा दिया। स्पीकर ने उन्हें अयोग्य तक नहीं ठहराया। गोवा में भाजपा ने दिन दहाड़े जनमत को नीचा दिखा दिया।
कांग्रेस पार्टी के दो विधायकों को तोड़कर खुद की सरकार बना ली। इसके बाद एमजीपी के तीन में से दो विधायकों को मंत्री बनाकर उन्हें भाजपा में शामिल कर लिया। इसके बाद कर्नाटक में भाजपा के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा का कथित टेप देश के सामने आ गया। वे 18-20 विधायकों को 10-10 करोड़ देने की बात कह रहे थे तो किसी को मंत्री पद देकर अपनी पार्टी में शामिल करना चाहते थे। तेलंगाना में भी कांग्रेस के 18 में से 12 विधायकों को तोड़ लिया गया। जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में भी संविधान की आत्मा को तार-तार करने के प्रयास किए गए।
रणदीप ने कहा, कांग्रेस संविधान में विश्वास करती है। भाजपा अब कांग्रेस की मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार को गिराना चाह रही है। कांग्रेस के समर्थन वाली कर्नाटक सरकार भी मोदी सरकार के निशाने पर है। कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार के ऐसे सभी प्रयासों का विरोध करेगी। इसके लिए अगर सदन से लेकर सड़क तक संघर्ष करना पड़ा तो करेंगे।