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भारत के तवांग को लेकर क्यों बेचैन है चीन, लगा है अक्साई चिन से बदलने की फिराक में

Sat, 04 Mar 2017 03:49 AM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Sat, 04 Mar 2017 03:49 AM IST
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Why china interested in Arunachal pradesh's Tawang, Here is answer

भारत सहित कई पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद में उलझे रहने वाले चीन की निगाहें अक्सर दूसरे देशों के इलाकों पर ही रहती है ऐसा ही एक इलाका है भारत के अरुणाचल प्रदेश का तवांग। भारत के इस छोटे से हिस्से को लेकर चीन की बेचैनी का आलम ये है कि वह इसके बदले में अक्साई चिन भारत को सौंपने के लिए तैयार है।

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चीन के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक दाई बिंगुओ ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए कि दोनों देश आपसी सीमा विवाद को सुलझाने  के लिए दोनों इलाकों की अदला बदली कर सकते हैं। साल 2013 में रिटायर हुए बिंगुओ को चीन के वरिष्ठ और सम्मानित राजनयिक के तौर पर देखा जाता है, जिनकी सरकार में भी अच्छी पैंठ है।
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यही वजह है कि चीन सरकार ने एक दशक तक बिंगुओ को भारत के साथ बातचीत के लिए चीन के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया था। इसलिए उन्हें भारत चीन संबंधों का बड़ा जानकार माना जाता है। हालांकि बिंगुओ की बात पर भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिसे भारत की 'ना' के तौर पर ही देखा जा रहा है।
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खास बात ये है कि तवांग को लेकर ऐसी पेशकश कोई पहली बार नहीं आई है इससे पहले भी चीन गाहे बगाहे तवांग को लेने की इच्छा जताता रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि ऐसा क्या है तवांग में जो चीन उसके लिए मरा जा रहा है?

बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र है तवांग

Why china interested in Arunachal pradesh's Tawang, Here is answer

भारत की पूर्वी राजधानी माने जाने वाले अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन का रुख हमेशा से ही विवादित रहा है। वो अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से को लंबे समय से अपना बताता रहा है। इसी हिस्से में स्थित है तवांग श्‍ाहर जिसकी सीमाएं भूटान और तिब्बत से मिलती हैं ऐसे में उसको लेकर चीन की बेचैनी आसानी से समझी जा सकती है।

दूसरा तवांग बौद्धों का प्रमुख धर्मस्‍थल है और वह उसे दक्षिणी तिब्बत कहता है। इसके पीछे बड़ी वजह है कि 15वें दलाई लामा का जन्म यहीं हुआ था। असल में तवांग शहर में तवांग मठ भी है जो पूरे प्रदेश का सबसे प्रमुख बौद्ध स्‍थल है। बताया जाता है कि इसका निर्माण मेराक लामा लोड्रे ग्यात्सो ने 1680-81 ई. में कराया था। तवांग मठ को एशिया का सबसे बड़ा बौद्ध मठ भी कहा जाता है। पहाड़ी पर बने तवांग मठ से पूरे शहर का शानदार नजारा देखने को मिलता है। तवांग में कई खूबसूरत छोटी नदियां भी हैं। 

इसी वजह से चीन तवांग को अपने साथ लेकर तिब्बत की तरह ही प्रमुख बौद्ध स्‍थलों पर अपनी पकड़ बनाना चाहता है। एक बार 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान चीन ने तवांग पर भी कब्जा कर लिया था ले‌किन बाद में उसे यहां से वापस लौटना पड़ा। इसके बाद से ही उसकी निगाहें तवांग पर अटकी हुई है। 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है तवांग

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अरुणाचल प्रदेश में स्थित तवांग भारत के लिए सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए भारत उस पर किसी भी सूरत में कब्जा छोड़ना नहीं चाहता। दूसरे, अगर भारत किसी भी तरह चीन से अदला बदली में तवांग को उसे सौंप देता है, तो सामरिक और कूटनीतिक रूप से अरुणाचल प्रदेश पर भारत की पकड़ कमजोर हो जाएगी जिसे चीन हमेशा से अपना हिस्सा बताता रहा है।

दूसरे, तवांग के कब्जे में आते ही चीन देर सबेर अरुणाचल प्रदेश के बाकी हिस्से पर भी अपना दावा ठोंक सकता है। ऐसे में तवांग को चीन को सौंपना भारत के लिए अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा हो जाएगा। इसके अलावा तवांग के बदले चीन जिस अक्साई चिन इलाके को भारत को सौंपने की पेशकश कर रहा है वो बंजर और बर्फीला क्षेत्र होने के कारण भारत के लिए ज्यादा महत्व नहीं रखता।

इसलिए अक्साई चिन को लेकर भारत कभी भी चीन से टकराने के मूड़ में नहीं रहता जबकि अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत का रुख हमेशा से मुखर रहा है।

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