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BJP: पीएम की इस सलाह से क्यों बेचैन हैं सांसद, भाजपा में बड़ी संख्या में टिकट काटने की तैयारी

Fri, 04 Aug 2023 06:05 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 04 Aug 2023 06:05 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को यह सलाह दी है कि यदि उनके टिकट कट जाएं तो उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि उनका प्रदर्शन कमजोर रहा है। पार्टी को कई समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकटों पर निर्णय करना पड़ता है...
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Why BJP MPs are worries with advice of PM Modi, many MPs could loose the tickets
BJP: PM Modi - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए के सभी सांसदों से मुलाकात कर रहे हैं। सांसदों से उनकी मुलाकात का यह सिलसिला 10 अगस्त तक चलेगा। इन मुलाकातों में वे सांसदों से अपने क्षेत्रों में बेहतर काम कर जनता से सीधा संपर्क स्थापित करने और विपक्ष की अफवाहों का जवाब देने की बात कह रहे हैं। उन्होंने सांसदों को यह सलाह भी दी है कि यदि उनके टिकट कट जाएं तो उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि उनका प्रदर्शन कमजोर रहा है। पार्टी को कई समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकटों पर निर्णय करना पड़ता है। यही कारण है कि कुछ स्थानों पर बदलाव हो सकता है।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की इस सलाह के बाद भाजपा सांसदों में खलबली मच गई है। कहा जा रहा है कि भाजपा एंटी इनकमबेंसी फैक्टर से निपटने और इंडिया गठबंधन को अच्छी चुनौती देने के लिए बड़ी संख्या में सांसदों का टिकट काट सकती है। इसे देखते हुए सांसद अभी से अपनी सीट बचाने की जुगत भिड़ाने में लग गए हैं।   

दरअसल, पुराने चेहरों के टिकट काटकर भाजपा एंटी इनकमबेंसी फैक्टर को अच्छी तरह मात देती आई है। वह इस फॉर्मूले का लगभग सभी चुनावों में बेहतर ढंग से इस्तेमाल करती रही है। लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा से लेकर नगर निकाय चुनावों तक में इस फॉर्मूले का उपयोग किया जाता रहा है।

यह फॉर्मूला ज्यादातर अवसरों पर कारगर साबित हुआ है, लेकिन 2022 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में यही फैक्टर भाजपा पर भारी पड़ता दिखाई पड़ रहा था। जब भाजपा ने एंटी इनकमबेंसी फैक्टर कमजोर करने के लिए बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट काटने की योजना बनाई, तो कई विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। इसी क्रम में स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान जैसे बड़े दिग्गजों ने भाजपा छोड़ दी, जिसका पार्टी को काफी नुकसान हुआ। हालात यहां तक खराब हो गए थे कि अंततः पार्टी नेतृत्व को यह एलान करना पड़ा कि वह अब किसी विधायक के टिकट नहीं काटेगी। इसके बाद ही विधायकों का पलायन रुका।

यदि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा बड़ी संख्या में टिकट काटने की योजना बनाती है, तो उसे इसका नुकसान भी हो सकता है। यूपी मॉडल की तरह ज्यादा नेताओं ने पाला बदलना शुरू किया, तो इससे गलत संदेश जाएगा और विपक्षी दलों को इसका लाभ मिल सकता है। ऐसे में पार्टी बहुत सोच समझकर कोई निर्णय करेगी। फिलहाल, पीएम की इस सलाह के बाद भाजपा सांसदों में बेचैनी साफ महसूस की जा रही है।         

मांगा गया था रिपोर्ट कार्ड

प्रधानमंत्री मोदी ने इसके पहले सभी सांसदों से उनके कामकाज का रिपोर्ट कार्ड मांगा था। सांसदों ने इसे पीएम को सौंपा था। इसके बाद पार्टी ने केंद्र में सत्ता के नौ साल पूरे होने के अवसर पर एक महीने तक पूरे देश में अभियान चलाकर केंद्र के योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई थी। इस अभियान के दौरान भी सभी प्रदेश अध्यक्षों से अपने-अपने प्रदेशों के सांसदों के क्षेत्र में किए गए कामकाज के आधार पर उनका रिपोर्ट कार्ड बनाकर केंद्र को देने के लिए कहा गया था। इसमें बड़ी संख्या में सांसदों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया गया था। माना जा रहा है कि पार्टी इन सांसदों का टिकट काटकर अपनी राह आसान करने की कोशिश कर सकती है।

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