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Tomato Price: आखिर क्यों आसमान छू रहे टमाटर के दाम, क्या इसके भंडारण की व्यवस्था नहीं होना भी इसकी वजह?
Wed, 28 Jun 2023 07:30 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 28 Jun 2023 07:30 PM IST
सार
देश के कई हिस्सों में टमाटर की कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम के पार हो गई है। यहां तक कि थोक मंडियों में इसके भाव 60 रुपये से 80 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। विक्रेताओं ने मौसम और बरसात को इसका कारण बताया है। हालांकि विशेषज्ञ इस बात से इनकार करते हैं बढ़े हुए दामों के पीछे भंडारण है।
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टमाटर
- फोटो : AMAR UJALA
विस्तार
सलाद की प्लेट हो या सब्जियां, टमाटर की मौजूदगी स्वाद बढ़ा देती है, लेकिन आजकल टमाटर खरीदना लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है। इसके भाव आसमान पर है। 100 से 120 रुपये प्रति किलो टमाटर होने से आम आदमी उसे खरीदने से पहले चार बार सोच रहा है। कीमतों में अचानक वृद्धि से कई लोगों का घरेलू बजट गड़बड़ा गया है। इस बीच सरकार ने कहा है कि कीमतों में उछाल अस्थाई और मौसमी है। जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।
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सोलन सब्जी मंडी में पहुंची टमाटर की खेप।
- फोटो : संवाद
टमाटर को लेकर देश में क्या हो रहा है?
देश के कई हिस्सों में टमाटर की कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम के पार हो गई है। यहां तक कि थोक मंडियों में इसके भाव 60 रुपये से 80 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। बाजार के जानकारों के अनुसार बीते एक हफ्ते के दौरान ही बाजार में टमाटर की कीमतें दोगुना और कहीं-कहीं उससे भी ज्यादा हो गईं हैं। गाजियाबाद की थोक सब्जी मंडी से टमाटर खरीद कर खुदरा बाजार में बेचने वाले सचिन बताते हैं कि पिछले हफ्ते जो टमाटर बाजार में अपनी क्वालिटी के हिसाब से 30 से 40 रुपये के भाव पर बिक रहा था उसकी कीमतें अब 70 से 90 और कहीं-कहीं सौ रुपये किलो तक पहुंच गईं हैं।
पिछले सप्ताह के दौरान, कर्नाटक में टमाटर की कीमतों में 200 फीसदी की भारी वृद्धि देखी गई जो मई के तीसरे सप्ताह में 40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर इस सप्ताह 125 रुपये प्रति किलो हो गई। इसी तरह दिल्ली में मदर डेयरी के सफल स्टोर्स पर टमाटर की कीमत पिछले एक सप्ताह में दोगुनी होकर लगभग 80 रुपये किलोग्राम ही गई हैं। मध्य प्रदेश में कीमतें 130 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं।
उपभोक्ता मामलों के विभाग का कहना है कि 27 जून को देश में टमाटर की औसत कीमत 46 रुपये प्रति किलोग्राम थी। अधिकतम कीमत 122 रुपये प्रति किलोग्राम है।
देश के कई हिस्सों में टमाटर की कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम के पार हो गई है। यहां तक कि थोक मंडियों में इसके भाव 60 रुपये से 80 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। बाजार के जानकारों के अनुसार बीते एक हफ्ते के दौरान ही बाजार में टमाटर की कीमतें दोगुना और कहीं-कहीं उससे भी ज्यादा हो गईं हैं। गाजियाबाद की थोक सब्जी मंडी से टमाटर खरीद कर खुदरा बाजार में बेचने वाले सचिन बताते हैं कि पिछले हफ्ते जो टमाटर बाजार में अपनी क्वालिटी के हिसाब से 30 से 40 रुपये के भाव पर बिक रहा था उसकी कीमतें अब 70 से 90 और कहीं-कहीं सौ रुपये किलो तक पहुंच गईं हैं।
पिछले सप्ताह के दौरान, कर्नाटक में टमाटर की कीमतों में 200 फीसदी की भारी वृद्धि देखी गई जो मई के तीसरे सप्ताह में 40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर इस सप्ताह 125 रुपये प्रति किलो हो गई। इसी तरह दिल्ली में मदर डेयरी के सफल स्टोर्स पर टमाटर की कीमत पिछले एक सप्ताह में दोगुनी होकर लगभग 80 रुपये किलोग्राम ही गई हैं। मध्य प्रदेश में कीमतें 130 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं।
उपभोक्ता मामलों के विभाग का कहना है कि 27 जून को देश में टमाटर की औसत कीमत 46 रुपये प्रति किलोग्राम थी। अधिकतम कीमत 122 रुपये प्रति किलोग्राम है।
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मीठापुर सब्जी मंडी में 80 से 100 रुपये प्रतिकिलो तक टमाटर बिक रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
कहां क्या स्थिति?
महज एक महीने पहले तक उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में टमाटर दो रुपये प्रति किलोग्राम से आठ रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहा था। लेकिन जैसे ही मानसून की पहली बारिश की खबरें आईं सबसे पहले टमाटर की कीमतों में ही बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि बीते एक से दो महीने के दौरान टमाटर की कीमतों में 1900% तक का इजाफा हुआ है। टमाटर का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाले राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं।
महज एक महीने पहले तक उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में टमाटर दो रुपये प्रति किलोग्राम से आठ रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहा था। लेकिन जैसे ही मानसून की पहली बारिश की खबरें आईं सबसे पहले टमाटर की कीमतों में ही बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि बीते एक से दो महीने के दौरान टमाटर की कीमतों में 1900% तक का इजाफा हुआ है। टमाटर का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाले राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं।
टमाटर
- फोटो : अमर उजाला
टमाटर की कीमतें क्यों बढ़ीं?
विक्रेताओं ने कीमतों में वृद्धि के लिए उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भारी वर्षा को जिम्मेदार ठहराया है, जिसकी वजह से फसल को नुकसान हुआ है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बारिश होने से टमाटर की आपूर्ति बाधित होने से इसके दाम में उछाल आया है। मदर डेयरी के प्रवक्ता ने बताया कि मानसून आने से टमाटर की फसल इस समय मौसमी बदलावों से गुजर रही है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश होने से टमाटर की फसल प्रभावित हुई है और इसकी आपूर्ति भी मांग की तुलना में कम हो गई है।
जानकार मानते हैं कि बिपरजॉय तूफान के कारण हुई बारिश से एक तरफ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में टमाटर की फसल प्रभावित हुई है तो दूसरी ओर बिहार और पश्चिम बंगाल में भीषण गर्मी के कारण भी टमाटर की फसल का नुकसान हुआ है। इसके चलते देश के कई राज्यों की मंडियों में टमाटर की आवक कम हो गई, जिससे कीमतें रातों-रात आसमान छू गईं।
टमाटर ही नहीं मंडियों में अन्य हरी सब्जियों की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि कुछ राज्यों में अगले एक दो महीनों में जब टमाटर व अन्य सब्जियों की नई खेप की आवक बढ़ेंगी कीमतों में राहत मिलगी।
विक्रेताओं ने कीमतों में वृद्धि के लिए उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भारी वर्षा को जिम्मेदार ठहराया है, जिसकी वजह से फसल को नुकसान हुआ है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बारिश होने से टमाटर की आपूर्ति बाधित होने से इसके दाम में उछाल आया है। मदर डेयरी के प्रवक्ता ने बताया कि मानसून आने से टमाटर की फसल इस समय मौसमी बदलावों से गुजर रही है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश होने से टमाटर की फसल प्रभावित हुई है और इसकी आपूर्ति भी मांग की तुलना में कम हो गई है।
जानकार मानते हैं कि बिपरजॉय तूफान के कारण हुई बारिश से एक तरफ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में टमाटर की फसल प्रभावित हुई है तो दूसरी ओर बिहार और पश्चिम बंगाल में भीषण गर्मी के कारण भी टमाटर की फसल का नुकसान हुआ है। इसके चलते देश के कई राज्यों की मंडियों में टमाटर की आवक कम हो गई, जिससे कीमतें रातों-रात आसमान छू गईं।
टमाटर ही नहीं मंडियों में अन्य हरी सब्जियों की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि कुछ राज्यों में अगले एक दो महीनों में जब टमाटर व अन्य सब्जियों की नई खेप की आवक बढ़ेंगी कीमतों में राहत मिलगी।
सोलन सब्जी मंडी में पहुंचा टमाटर।
- फोटो : संवाद
क्या स्टोरेज भी एक समस्या है?
भारत दुनिया में फलों का सबसे बड़ा उत्पादक और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके बावजूद फलों और सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता काफी कम है क्योंकि फसल कटाई के बाद नुकसान होता है जो उत्पादन का लगभग 25% से 30% होता है।
इसके अलावा, बड़ी मात्रा में उत्पाद की गुणवत्ता भी उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते खराब हो जाती है। फलों और सब्जियों के विपणन से संबंधित अधिकांश समस्याओं का पता उनके जल्दी खराब होने से लगाया जा सकता है। अधिक विपणन लागत, बाजार की प्रचुरता, कीमत में उतार-चढ़ाव और इसी तरह की अन्य समस्याएं फलों और सब्जियों के खराब होने की वजहें हैं। कम तापमान पर, नष्ट होने की क्षमता काफी कम हो जाती है और इस प्रकार कोल्ड स्टोरेज या प्रशीतन का महत्व बढ़ जाता है।
भारत में कोल्ड स्टोरेज की स्थिति और इसकी क्षमता
देश में फलों और सब्जियों का अनुमानित वार्षिक उत्पादन लगभग 130 करोड़ टन है। यह देश के कृषि उत्पादन का 18 फीसदी है। देश में उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ रहा है लेकिन कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी क्षमता के दोहन में बड़ी बाधा बन रही है। अब उपलब्ध कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं ज्यादातर एक ही वस्तु जैसे आलू, संतरा, सेब, अंगूर, अनार, फूल आदि के लिए हैं, जिसके चलते क्षमता का उपयोग कम होता है। टमाटर जैसी सब्जियों के भंडारण की समस्या भी इसके दामों को बढ़ाने में एक बड़ी वजह होती है।
इस मामले में जब हमनें कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा, 'हर साल एक पैटर्न सा बन गया है। इस समय एक सीजन खत्म होता और दूसरा शुरू होता है। कई इलाकों में टमाटर की बुवाई शुरू हो जाती है। देश में आपूर्ति की कमी हो जाती है जिसकी वजह से ये कीमतें बढ़ती हैं। यह आम प्रक्रिया है लेकिन इस बार ज्यादा ही हो गई।'
आगे उन्होंने कहा, 'देश में असली सुधार व्यापर के क्षेत्र में होना चाहिए। अभी जो दाम कई जगह 100 रुपए से ऊपर चले गए हैं लेकिन किसानों से खरीद 30-40 रुपए में ही हो रही है। इसमें ज्यादा कमाई ट्रेड से जुड़े लोगों को होता है न कि किसानों को। बाजार मूल्य 50-60 रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए। बाकी ट्रेड का कमीशन है। रिटेल ट्रेड का बहुत बड़ा माफिया होता है। इस पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। व्यापारी आपका शोषण कर रहा है।'
भंडारण के सवाल पर उन्होंने कहा, 'टमाटर पर भंडारण को भले दोष दें लेकिन इसे आप कितने दिन तक रख सकते हैं। आलू और प्याज में तो भंडारण की कोई समस्या नहीं है। भंडारण का मुद्दा व्यापार के लोगों द्वारा बनाया जाता है।'
भारत दुनिया में फलों का सबसे बड़ा उत्पादक और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके बावजूद फलों और सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता काफी कम है क्योंकि फसल कटाई के बाद नुकसान होता है जो उत्पादन का लगभग 25% से 30% होता है।
इसके अलावा, बड़ी मात्रा में उत्पाद की गुणवत्ता भी उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते खराब हो जाती है। फलों और सब्जियों के विपणन से संबंधित अधिकांश समस्याओं का पता उनके जल्दी खराब होने से लगाया जा सकता है। अधिक विपणन लागत, बाजार की प्रचुरता, कीमत में उतार-चढ़ाव और इसी तरह की अन्य समस्याएं फलों और सब्जियों के खराब होने की वजहें हैं। कम तापमान पर, नष्ट होने की क्षमता काफी कम हो जाती है और इस प्रकार कोल्ड स्टोरेज या प्रशीतन का महत्व बढ़ जाता है।
भारत में कोल्ड स्टोरेज की स्थिति और इसकी क्षमता
देश में फलों और सब्जियों का अनुमानित वार्षिक उत्पादन लगभग 130 करोड़ टन है। यह देश के कृषि उत्पादन का 18 फीसदी है। देश में उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ रहा है लेकिन कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी क्षमता के दोहन में बड़ी बाधा बन रही है। अब उपलब्ध कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं ज्यादातर एक ही वस्तु जैसे आलू, संतरा, सेब, अंगूर, अनार, फूल आदि के लिए हैं, जिसके चलते क्षमता का उपयोग कम होता है। टमाटर जैसी सब्जियों के भंडारण की समस्या भी इसके दामों को बढ़ाने में एक बड़ी वजह होती है।
इस मामले में जब हमनें कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा, 'हर साल एक पैटर्न सा बन गया है। इस समय एक सीजन खत्म होता और दूसरा शुरू होता है। कई इलाकों में टमाटर की बुवाई शुरू हो जाती है। देश में आपूर्ति की कमी हो जाती है जिसकी वजह से ये कीमतें बढ़ती हैं। यह आम प्रक्रिया है लेकिन इस बार ज्यादा ही हो गई।'
आगे उन्होंने कहा, 'देश में असली सुधार व्यापर के क्षेत्र में होना चाहिए। अभी जो दाम कई जगह 100 रुपए से ऊपर चले गए हैं लेकिन किसानों से खरीद 30-40 रुपए में ही हो रही है। इसमें ज्यादा कमाई ट्रेड से जुड़े लोगों को होता है न कि किसानों को। बाजार मूल्य 50-60 रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए। बाकी ट्रेड का कमीशन है। रिटेल ट्रेड का बहुत बड़ा माफिया होता है। इस पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। व्यापारी आपका शोषण कर रहा है।'
भंडारण के सवाल पर उन्होंने कहा, 'टमाटर पर भंडारण को भले दोष दें लेकिन इसे आप कितने दिन तक रख सकते हैं। आलू और प्याज में तो भंडारण की कोई समस्या नहीं है। भंडारण का मुद्दा व्यापार के लोगों द्वारा बनाया जाता है।'
प्रेस ब्रीफिंग करते जयराम रमेश
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुद्दे पर राजनीति भी हो रही है?
टमाटर की बढ़ी हुई कीमतों पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा प्रधानमंत्री ने टमाटर प्याज और आलू को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था लेकिन उनकी गलत नीतियों के कारण पहले टमाटर सड़क पर फेंके गए, फिर 100 रुपए किलो बिकता है!
शिवसेना उद्धव गुट की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या देश की वित्त मंत्री टमाटर खाती हैं? क्या टमाटर के बढ़ते दामों का जवाब दे पायेंगी?
स्थिति से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही?
इस बीच, उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा कि कीमतों में यह उछाल अस्थाई और मौसमी है। जल्द ही कीमतें नीचे आ जाएंगी। टमाटर की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय टमाटर ग्रैंड चैलेंज शुरू करेगा। इसमें टमाटर के उत्पादन, प्रसंस्करण व भंडारण में सुधार के लिए नए विचार आमंत्रित किए जाएंगे। नए विचारों से प्रोटोटाइप बनाएंगे और फिर इसे आगे बढ़ाएंगे।
उन्होंने बताया कि हर साल इस समय ऐसा होता है। दरअसल, टमाटर बहुत जल्द खराब होने वाला खाद्य उत्पाद है और अचानक बारिश होने से इसकी ढुलाई पर असर पड़ता है।
टमाटर की बढ़ी हुई कीमतों पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा प्रधानमंत्री ने टमाटर प्याज और आलू को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था लेकिन उनकी गलत नीतियों के कारण पहले टमाटर सड़क पर फेंके गए, फिर 100 रुपए किलो बिकता है!
शिवसेना उद्धव गुट की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या देश की वित्त मंत्री टमाटर खाती हैं? क्या टमाटर के बढ़ते दामों का जवाब दे पायेंगी?
स्थिति से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही?
इस बीच, उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा कि कीमतों में यह उछाल अस्थाई और मौसमी है। जल्द ही कीमतें नीचे आ जाएंगी। टमाटर की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय टमाटर ग्रैंड चैलेंज शुरू करेगा। इसमें टमाटर के उत्पादन, प्रसंस्करण व भंडारण में सुधार के लिए नए विचार आमंत्रित किए जाएंगे। नए विचारों से प्रोटोटाइप बनाएंगे और फिर इसे आगे बढ़ाएंगे।
उन्होंने बताया कि हर साल इस समय ऐसा होता है। दरअसल, टमाटर बहुत जल्द खराब होने वाला खाद्य उत्पाद है और अचानक बारिश होने से इसकी ढुलाई पर असर पड़ता है।