फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Who was MS Swaminathan the pioneer of agricultural revolution and his contributions

एमएस स्वामीनाथन: जंतु शास्र पढ़ रहे थे पर बंगाल में अकाल देख कृषि में आए, फिर इन कदमों से बदली किसानों की हालत

Thu, 28 Sep 2023 01:44 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 28 Sep 2023 01:44 PM IST
विज्ञापन
सार
MS Swaminathan: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1943 में बंगाल में भीषण अकाल पड़ा जिसने स्वामीनाथन को झकझोर कर रख दिया। स्वामीनाथन पहले जूलॉजी की पढ़ाई कर रहे थे लेकिन अकाल को देख कृषि के साथ सफर बढ़ाने का निर्णय किया।
loader
Who was MS Swaminathan the pioneer of agricultural revolution and his contributions
एमएस स्वामीनाथन - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

भारत में कृषि क्रांति के जनक और प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन नहीं रहे। 98 साल के स्वामीनाथन का चेन्नई में गुरुवार सुबह 11.20 बजे निधन हो गया। देश को अकाल से उबारने और किसानों को मजबूत बनाने वाली नीति बनाने में उन्होंने अहम योगदान निभाया था। उनकी अध्यक्षता में आयोग भी बनाया गया था जिसने किसानों की जिंदगी को सुधारने के लिए कई अहम सिफारिशें की थीं। आइये जानते हैं एमएस स्वामीनाथन और उनके कामों के बारे में...

एमएस स्वामीनाथन
एमएस स्वामीनाथन - फोटो : SOCIAL MEDIA
कौन थे एमएस स्वामीनाथन?
प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का जन्म मद्रास प्रेसिडेंसी में साल 1925 में हुआ था। स्वामीनाथन 11 साल के ही थे जब उनके सिर से पिता का साया उठ गया। उनके बड़े भाई ने उन्हें पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया। उनके परिजन उन्हें मेडिकल की पढ़ाई कराना चाहते थे लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत प्राणि विज्ञान से की। 

1943 बंगाल अकाल
1943 बंगाल अकाल - फोटो : social media
अकाल को देख कृषि की पढ़ाई की
इसी बीच दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1943 में बंगाल में भीषण अकाल पड़ा जिसने उन्हें झकझोर कर रख दिया। इसके बाद स्वामीनाथन ने तय किया कि देश में खाने की कमी नहीं हो इस उद्देश्य से कृषि की पढ़ाई की। 1944 में उन्होंने मद्रास एग्रीकल्चरल कॉलेज से कृषि विज्ञान में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की।

पुलिस सेवा में चयन हुआ लेकिन कृषि से जुड़ा रास्ता अपनाया
1947 में वह आनुवंशिकी और पादप प्रजनन की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) आ गए। उन्होंने 1949 में साइटोजेनेटिक्स में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने अपना शोध आलू पर किया।

हालांकि, समाज और परिवार का दवाब पड़ा कि उन्हें सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। आखिरकार वह सिविल सेवाओं की परीक्षाओं में शामिल हुए और भारतीय पुलिस सेवा में उनका चयन हुआ। उसी समय उनके लिए नीदरलैंड में आनुवंशिकी में यूनेस्को फेलोशिप के रूप में कृषि क्षेत्र में एक मौका मिला। स्वामीनाथन ने पुलिस सेवा को छोड़कर नीदरलैंड जाना सही समझा। 1954 में वह भारत आ गए और यहीं कृषि के लिए काम करना शुरू कर दिया।

भारत में हरित क्रांति के अगुआ बने
एमएस स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का अगुआ माना जाता है। वह पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने सबसे पहले गेहूं की एक बेहतरीन किस्म की पहचान की। इसके कारण भारत में गेहूं उत्पादन में भारी वृद्धि हुई। 

स्वामीनाथन को उनके काम के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, जिसमें पद्मश्री (1967), पद्मभूषण (1972), पद्मविभूषण (1989), मैग्सेसे पुरस्कार (1971) और विश्व खाद्य पुरस्कार (1987) महत्वपूर्ण हैं। 

Kisan
Kisan - फोटो : iStock
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें जो आज भी विमर्श का विषय 
किसानों के हालात पर सिफारिशें देने के लिए स्वामीनाथन आयोग का गठन 18 नवंबर 2004 को किया गया था। दरअसल, इस आयोग का नाम राष्ट्रीय किसान आयोग है जिसके अध्यक्ष एमएस स्वामीनाथन रहे। उन्हीं के नाम पर इस आयोग का नाम स्वामीनाथन आयोग पड़ा। 



उन्होंने किसानों के हालात सुधारने और कृषि को बढ़ावा देने के लिए सिफारिशें की थीं, लेकिन अब तक उनकी ये सिफारिशें लागू नहीं की गई हैं। हालांकि सरकारों का कहना है कि उन्होंने आयोग की सिफारिशों को लागू कर दिया है, लेकिन सच्चाई तो यही है कि अभी तक इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। किसान बार-बार आंदोलनों के जरिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग करते रहे हैं। 

एमएस स्वामीनाथन
एमएस स्वामीनाथन - फोटो : SOCIAL MEDIA
क्या हैं स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें?
रोजगार सुधार: आयोग ने खेती से जुड़े रोजगारों को बढ़ाने की बात कही थी। आयोग ने कहा था कि साल 1961 में कृषि से जुड़े रोजगार में 75 फीसदी लोग लगे थे जो कि 1999 से 2000 तक घटकर 59 फीसदी हो गया। इसके साथ ही आयोग ने किसानों के लिए ‘नेट टेक होम इनकम’ को भी तय करने की बात कही थी। 

भूमि बंटवारा: स्वामीनाथन आयोग ने अपनी सिफारिश में भूमि बंटवारे को लेकर चिंता जताई थी। इसमें कहा गया था कि 1991-92 में 50 फीसदी ग्रामीण लोगों के पास देश की सिर्फ तीन फीसदी जमीन थी, जबकि कुछ लोगों के पास ज्यादा जमीन थी। आयोग ने इसके लिए एक सही व्यवस्था की जरूरत बताई थी। 

सिंचाई सुधार: सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी आयोग ने गहरी चिंता जताई थी। साथ ही सलाह दी थी कि सिंचाई के पानी की उपलब्धता सभी के पास होनी चाहिए। इसके साथ ही पानी की सप्लाई और वर्षा-जल के संचय पर भी जोर दिया गया था। आयोग ने पानी के स्तर को सुधारने पर जोर देने के साथ ही 'कुआं शोध कार्यक्रम' शुरू करने की बात भी कही थी। 

भूमि सुधार: बेकार पड़ी और अतिरिक्त जमीनों की सीलिंग और बंटवारे की भी सिफारिश की गई थी। इसके साथ ही खेतीहर जमीनों के गैर कृषि इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई थी। जंगलों और आदिवासियों को लेकर भी विशेष नियम बनाने की बात कही गई थी। 

उत्पादन सुधार: आयोग का कहना था कि कृषि में सुधार की जरूरत है। इसमें लोगों की भूमिका को बढ़ाना होगा। इसके साथ ही आयोग ने कहा था कि कृषि से जुड़े सभी कामों में 'जन सहभागिता' की जरूरत होगी, चाहे वह सिंचाई हो, जल-निकासी हो, भूमि सुधार हो, जल संरक्षण हो या फिर सड़कों और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के साथ शोध से जुड़े काम हों। 

खाद्य सुरक्षा: आयोग ने समान जन वितरण योजना की सिफारिश की थी। साथ ही पंचायत की मदद से पोषण योजना को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की भी बात कही थी। इसके अलावा स्वयं सहायक समूह बनाकर खाद्य एवं जल बैंक बनाने की बात भी कही गई थी। 
ऋण और बीमा: आयोग का कहना था कि ऋण प्रणाली की पहुंच सभी तक होनी चाहिए। फसल बीमा की ब्याज-दर 4 फीसदी होनी चाहिए। कर्ज वसूली पर रोक लगाई जाए। साथ ही कृषि जोखिम फंड भी बनाने की बात आयोग ने की थी। पूरे देश में फसल बीमा के साथ ही एक कार्ड में ही फसल भंडारण और किसान के स्वास्थ्य को लेकर व्यवस्थाएं की जाएं। इसके अलावा मानव विकास और गरीब किसानों के लिए विशेष योजना की बात कही गई थी।  

वितरण प्रणाली में सुधार: वितरण प्रणाली में सुधार को लेकर भी आयोग ने सिफारिश की थी। इसमें गांव के स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पूरी व्यवस्था का खांका खींचा गया था। इसमें किसानों को फसलों की पैदावार को लेकर सुविधाओं को पहुंचाने के साथ ही विदेशों में फसलों को भेजने की व्यवस्था की बात कही गई थी। साथ ही फसलों के आयात और उनके भाव पर नजर रखने की व्यवस्था बनाने की भी सिफारिश की गई थी। 

प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना: आयोग ने किसानों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की बात भी कही है। इसके साथ ही अलग-अलग फसलों को लेकर उनकी गुणवत्ता और वितरण पर विशेष नीति बनाने को कहा था। वहीं, आयोग ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की सिफारिश भी की थी। 

किसान आत्महत्या रोकना: किसानों की बढ़ती आत्महत्या को लेकर भी आयोग ने चिंता जताई थी। आयोग ने ज्यादा आत्महत्या वाले स्थानों को चिह्नित कर वहां विशेष सुधार कार्यक्रम चलाने की बात कही थी। इसके अलावा सभी तरह की फसलों के बीमा की जरूरत बताई गई थी। साथ ही आयोग ने कहा था कि किसानों के स्वास्थ्य को लेकर खास ध्यान देने की जरूरत है। इससे उनकी आत्महत्याओं में कमी आएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed