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उपलब्धि: अब भारत की पोषण पद्धति अपनाकर दुनिया जीतेगी टीबी के खिलाफ जंग; झारखंड में मिले बेहतर नतीजे

Tue, 19 Aug 2025 05:09 AM IST
शिव शुक्ला परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: शिव शुक्ला Updated Tue, 19 Aug 2025 05:09 AM IST
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WHO recognizes India's treatment method against tuberculosis, better results found in Jharkhand
टीबी - फोटो : ani
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तपेदिक (टीबी) के उपचार के लिए भारत की पोषण आधारित पद्धति को मान्यता दी है, जिसका सफल परीक्षण झारखंड के 10 हजार से अधिक परिवारों पर किया गया था। डब्ल्यूएचओ ने कहा, भारत के अनुभव से पूरी दुनिया टीबी से लड़ाई का नया तरीका सीखेगी।
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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कई संस्थानों के साथ मिलकर हाल ही में झारखंड में अध्ययन किया था, जिसमें पता चला कि सिर्फ दवाओं पर निर्भरता के बजाय यदि मरीजों को पौष्टिक आहार भी नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए, तो टीबी के मामलों और मौतों को उल्लेखनीय रूप से कम किया जा सकता है।
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यह शोध झारखंड के कई जिलों में किया गया, जहां टीबी के मामले राष्ट्रीय औसत से ज्यादा पाए जाते हैं। शोधकर्ताओं ने वहां टीबी मरीजों और उनके परिवारों को पोषण पैकेज उपलब्ध कराए। इनमें दाल, चावल, तेल और अंडे जैसे बुनियादी, लेकिन प्रोटीन और ऊर्जा से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल थे। मकसद, मरीजों को पर्याप्त कैलोरी और पोषण मिले, ताकि उनका शरीर संक्रमण से लड़ सके। अध्ययन में पाया कि जिनको पौष्टिक आहार मिला, उनमें बीमारी के दोबारा सक्रिय होने के मामले बेहद कम पाए गए। मौतों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं का मानना है, कुपोषण और टीबी का गहरा रिश्ता है। जब शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता तो प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और बैक्टीरिया आसानी से सक्रिय हो जाते हैं।
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अध्ययन में मिले सबूतों को डब्ल्यूएचओ ने स्वीकारा
मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित भारत का यह अध्ययन झारखंड के 10, 345 परिवारों पर हुआ, जिसमें करीब 2,800 टीबी संक्रमित मरीज थे। इन रोगियों को दवा संग पौष्टिक आहार दिया गया, जिससे सिर्फ दो महीने में पांच फीसदी वजन बढ़ने से टीबी की मौत का जोखिम 60% तक कम हुआ। परिजनों में टीबी होने की आशंका में 39% कमी दर्ज की गई। इसे देख डब्ल्यूएचओ ने भी टीबी का सामना कर रहे देशों को तत्काल दवाओं के साथ पौष्टिक आहार पर जोर देने के लिए नीति में संशोधन करने का फैसला किया। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, खुशी है कि हमारी मेहनत का लाभ दुनिया के सभी देशों में टीबी मरीजों को जल्द से जल्द रिकवर होने में मिलेगा।

2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य
भारत सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य 2030 है, लेकिन भारत ने इसे पांच साल पहले हासिल करने का संकल्प लिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लक्ष्य तभी संभव होगा जब बीमारी की जड़ जैसे गरीबी, भूख और कुपोषण पर चोट की जाए।


झारखंड में हुआ यह अध्ययन टीबी मुक्त भारत की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। भारत में दवा के साथ मरीजों को पोषण आहार मिल रहा है, जिसकी वजह से रोगियों की जान के जोखिम में कमी आ रही है।
 
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