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Justice SK Kaul: कौन हैं जस्टिस कौल? जिन्होंने एमएफ हुसैन से लेकर अनुच्छेद 370 के फैसलों में निभाई अहम भूमिका
Fri, 15 Dec 2023 02:43 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 15 Dec 2023 02:43 PM IST
सार
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के बाद किशन कौल सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज हैं। वह 25 दिसंबर 2023 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में छह साल और 10 महीने से अधिक समय तक सेवा दी है।
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Justice Sanjay Kishan Kaul
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने शुक्रवार को कहा कि लोगों को एक दूसरे की राय के प्रति सहनशीलता रखनी चाहिए। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में अपने अंतिम कार्य दिवस पर न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि एक न्यायाधीश का निडर होना एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है। वहीं, बार का कर्तव्य है कि वह न्यायपालिक की स्वतंत्रता की रक्षा कर सके।
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25 को हो रहे सेवानिवृत्त
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के बाद सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज हैं। वह 25 दिसंबर 2023 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में छह साल और 10 महीने से अधिक समय तक सेवा दी है। उन्हें विदाई देने के लिए एक पीठ एकत्र हुई थी।
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सीजेआई ने याद किए पुराने दिन
सुप्रीम कोर्ट 18 दिसंबर से शीतकालीन अवकाश पर होगा और दो जनवरी को फिर से खुलेगा। इसलिए न्यायमूर्ति कौल को आज विदाई दी गई। समारोह की पीठ की अध्यक्षता कर रहे प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति कौल के साथ अपने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, 'न्यायमूर्ति कौल और मैं 70 के दशक से जुड़े हैं। हमने कॉलेज की पढ़ाई साथ ही पूरी की है। मुझे लगता है कि यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि हम लोगों ने कई अहम मामलों में मंच को एक साथ साझा किया।' बता दें, पुट्टास्वामी (निजता का अधिकार मामला), विवाह समानता और अनुच्छेद 370 मामले की सुनवाई करने वाली पीठ में सीजेआई और कौल शामिल थे।
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प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति कौल के साथ दोस्ती होना उनके लिए एक ताकत का स्रोत है।
न्याय का मंदिर खुला रहना चाहिए
न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि शीर्ष अदालत ने बिना किसी भय और पक्षपात के न्याय दिया है और यह न्याय का मंदिर खुला रहना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि एक न्यायाधीश की निर्भीकता एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है। अगर हमारे पास जो संवैधानिक संरक्षण है, अगर हम इसे दिखाने में सक्षम नहीं हैं, तो हम प्रशासन के अन्य हिस्सों से ऐसा करने की उम्मीद नहीं कर सकते।'
उन्होंने कहा, 'ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे न्यायपालिका अपने लिए खड़ी हो सके। मुझे लगता है कि यह बार का कर्तव्य है कि वह न्यायपालिका का समर्थन करे और उसे सही भी करे।' उन्होंने कहा कि वह एक संतुष्ट व्यक्ति के रूप में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'मैं पूरी संतुष्टि के साथ सेवानिवृत्त हो रहा हूं। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश की है जो मैं कर सकता था, कभी-कभी यह सबसे अच्छा हो सकता है, कभी-कभी यह नहीं हो सकता है। लेकिन पूरा समाज एक ऐसी व्यवस्था में काम करता है, जहां लोगों को एक-दूसरे की राय के प्रति सहनशीलता रखनी चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह सबसे बड़ा संदेश है जो मैं देना चाहूंगा। हम दुनिया में ऐसे समय में हैं, जहां सहनशीलता का स्तर बहुत कम हो गया है। इसलिए यह समय है जब लोग एक दूसरे के साथ रहना सीखें।
श्रीनगर में हुआ था जस्टिस कौल का जन्म
26 दिसंबर 1958 को जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में जन्मे जस्टिस संजय किशन कौल कश्मीरी हिंदू ब्राह्मण दत्तात्रेय कौल परिवार से हैं। जस्टिस कौल के परदादा महाराजा सूरज किशन कौल जम्मू और कश्मीर रियासत की रीजेंसी काउंसिल में राजस्व मंत्री थे। उनके परदादा सर दया किशन कौल एक राजनेता थे, जिन्होंने जम्मू और कश्मीर राज्य के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके दादा राजा उपिंदर किशन कौल भी देश की सार्वजनिक सेवा में रहे हैं।
1982 में लॉ की बैचलर डिग्री की
यूं तो उनका परिवार श्रीनगर में बसा था मगर कौल की अधिकतर पढ़ाई दिल्ली में हुई। यहीं के सेंट स्टीफंस कॉलेज से उन्होंने इकॉनमिक्स (ऑनर्स) में ग्रैजुएशन किया। 1982 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की बैचलर डिग्री ली। उसी साल वह दिल्ली बार काउंसिल में बतौर एडवोकेट रजिस्टर हुए।
2001 में दिल्ली हाईकोर्ट में बने न्यायाधीश
रंगमंच, संगीत, गोल्फ और पढ़ने के शौकीन जस्टिस कौल ने एक वकील के रूप में दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस किया। 1987 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बना दिया गया। दिसंबर 1999 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का पद मिला। वह दिल्ली हाई कोर्ट और दिल्ली यूनिवर्सिटी के सीनियर काउंसिल भी रहे। केंद्र सरकार के सीनियर पैनल में भी शामिल रहे। उन्हें तीन मई 2001 को दिल्ली हाईकोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त किया गया, सितंबर 2012 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में सीजे नियुक्त किया गया।
2017 को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त
उन्हें जून 2013 में पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 26 जुलाई 2014 को उन्हें मद्रास हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जहां से उन्हें पदोन्नत करते हुए 17 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के बाद सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज हैं। वह 25 दिसंबर 2023 को रिटायर हो रहे हैं।
ये रहे जस्टिस कौल के महत्वपूर्ण फैसले
जस्टिस संजय किशन कौल सुप्रीम कोर्ट की उस नौ सदस्यीय संवैधानिक पीठ का हिस्सा थे, जिसने निजता के मौलिक अधिकार के पक्ष में फैसला सुनाया था। जस्टिस संजय किशन कौल ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज में रूप में 2008 में बहुचर्चित फैसला सुनाया था, जिसमें जस्टिस कौल ने एम एफ हुसैन के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया था कि हुसैन ने अपनी पेंटिंग के जरिए भारत माता का अपमान किया था। अभी हाल ही में उन्होंने अनुच्छेद 370 के मामले में भी एक अलग भूमिका निभाई।