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जम्मू-कश्मीर से रेगिस्तान तक दिखा पराक्रम: अगले सेना प्रमुख ले. जन. धीरज सेठ कौन हैं, कौन सा रिकॉर्ड दुर्लभ?

Sat, 13 Jun 2026 04:45 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 13 Jun 2026 04:45 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने वर्तमान उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारत का अगला सेना प्रमुख नियुक्त किया है। वह 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का स्थान लेंगे। लगभग 40 वर्षों के अपने लंबे करियर में आर्म्ड कॉर्प्स, सुदर्शन चक्र स्ट्राइक कॉर्प्स और दो-दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सेठ को सेना के आधुनिकीकरण और रणनीतिक योजना का बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है।
 

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लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश की सैन्य कमान में महत्वपूर्ण फेरबदल हुआ है। केंद्र सरकार ने वर्तमान उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारत का अगला सेना प्रमुख (सीओएएस) नियुक्त किया है। वह आगामी 30 जून 2026 की दोपहर को देश के सर्वोच्च सैन्य पद की कमान संभालेंगे। इसी दिन वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी अपनी शानदार सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस रणनीतिक नियुक्ति के साथ ही भारतीय सेना में नेतृत्व परिवर्तन और तकनीकी आधुनिकीकरण के एक नए और बेहद शक्तिशाली युग का आगाज होने जा रहा है। आइए, जानते हैं कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ...
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चार दशकों का बेदाग सैन्य सफर और गौरवशाली इतिहास
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर बेहद शानदार और उपलब्धियों से भरा रहा है। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। देश सेवा के प्रति उनके समर्पण की शुरुआत दिसंबर 1986 में हुई, जब उन्हें सेना की प्रतिष्ठित 'आर्म्ड कॉर्प्स' यानी बख्तरबंद रेजिमेंट में कमीशन मिला था।
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अपने लगभग चार दशकों के लंबे और गौरवशाली करियर में उन्होंने हर मोर्चे पर अपनी योग्यता साबित की है। उनके पास सैन्य संचालन, रणनीतिक योजना, क्षमता विकास और संस्थागत डोमेन का व्यापक अनुभव है। उन्होंने भारतीय सेना की मारक क्षमता और युद्ध प्रभावशीलता को बढ़ाने में हमेशा केंद्रीय भूमिका निभाई है।
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रेगिस्तान से लेकर कश्मीर तक में किया नेतृत्व
जनरल ऑफिसर ने अपने करियर में हर स्तर पर सेना की टुकड़ियों का कुशल नेतृत्व किया है। उनकी कमान नियुक्तियां बेहद चुनौतीपूर्ण और विविध भौगोलिक क्षेत्रों से जुड़ी रही हैं।

रेगिस्तानी क्षेत्र: उन्होंने देश की पश्चिमी सीमा पर रेगिस्तानी इलाके में एक आर्म्ड रेजिमेंट की कमान संभाली और बख्तरबंद युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया।

पश्चिमी थिएटर: इसके बाद उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पश्चिमी थिएटर में एक पूरी आर्म्ड ब्रिगेड का नेतृत्व किया।

जम्मू-कश्मीर: सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील जम्मू-कश्मीर के इलाके में वह 'काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स' यानी आतंकवाद विरोधी बल के कमांडर रहे और वहां शांति व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

सुदर्शन चक्र कॉर्प्स: लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने 'सुदर्शन चक्र कॉर्प्स' का नेतृत्व किया। यह भारतीय सेना की सबसे प्रमुख और आक्रामक स्ट्राइक फॉर्मेशन में से एक है, जो दुश्मन के घर में घुसकर हमला करने के लिए जानी जाती है।

दिल्ली एरिया: इसके बाद उन्होंने जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), दिल्ली एरिया के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने देश के प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सैन्य आयोजनों तथा गरिमामयी जिम्मेदारियों को बखूबी संभाला।

दो ऑपरेशनल कमान संभालने का दुर्लभ और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
आर्मी कमांडर के पद पर पदोन्नत होने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के नाम एक बेहद खास और दुर्लभ सैन्य रिकॉर्ड दर्ज हुआ। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय सेना की दो सबसे महत्वपूर्ण कमानों, दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान का नेतृत्व किया। ढाई साल से अधिक समय तक दो अलग-अलग ऑपरेशनल आर्मी कमानों का रणनीतिक नेतृत्व करना सैन्य इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इस दौरान उन्होंने विशाल और विविधता भरे थिएटरों में सुरक्षा व्यवस्था और सामरिक योजना की सीधी निगरानी की।

यह भी पढ़ें: New Indian Army Chief: लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ नए सेना प्रमुख नियुक्त, वर्तमान COAS जन. द्विवेदी की जगह लेंगे


आधुनिक युद्ध के विशेषज्ञ हैं धीरज सेठ
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को केवल मोर्चे का ही नहीं, बल्कि सेना की प्रशासनिक और भविष्य की जरूरतों का भी विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने सेना मुख्यालय में 'रणनीतिक योजना'और 'क्षमता विकास' जैसे सबसे महत्वपूर्ण वर्टिकल्स में शीर्ष पदों पर काम किया है। उन्होंने सेना के भविष्य के आधुनिकीकरण की रूपरेखा तैयार करने में बड़ा योगदान दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने सेना के दीर्घकालिक बल संगठन की पहलों को आकार दिया। वह पारंपरिक युद्ध कौशल को आज की उभरती हुई आधुनिक तकनीकों, जैसे ड्रोन, एआई और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के साथ जोड़ने में पूरी तरह माहिर हैं, जिससे भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों का सामना किया जा सके।

एक कुशल सैन्य रणनीतिकार होने के साथ-साथ वह सैन्य शिक्षा में भी हमेशा अव्वल रहे हैं। उन्होंने हर उच्च स्तरीय कोर्स में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वह देश के प्रतिष्ठित 'हायर कमांड कोर्स' और 'नेशनल डिफेंस कॉलेज' (एनडीसी) के स्नातक हैं। इसके अलावा, उन्होंने फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित अत्यंत प्रतिष्ठित 'कमांड एंड स्टाफ कोर्स' में भी हिस्सा लिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस पढ़ाई की वजह से समकालीन सैन्य मामलों और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत और व्यापक है।


पिता रहे हैं तीन राज्यों के गवर्नर
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ऐसे सैन्य परिवार से आते हैं, जिसकी भारतीय सेना में कई दशकों की मजबूत विरासत रही है। उनके पिता कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। वे 1997 में सेना के एडजुटेंट जनरल पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अपने सैन्य करियर में उन्होंने XXI स्ट्राइक कोर और III कोर जैसी महत्वपूर्ण सैन्य संरचनाओं की कमान संभाली। सेना से रिटायरमेंट के बाद उन्हें त्रिपुरा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का राज्यपाल भी नियुक्त किया गया था।

धीरज सेठ के परिवार की सैन्य परंपरा केवल उनके पिता तक सीमित नहीं है। उनके भाई रवनीश सेठ भारतीय नौसेना में रियर एडमिरल के पद तक पहुंचे। इस तरह परिवार के दोनों बेटे सेना और नौसेना में शीर्ष स्तर की जिम्मेदारियों तक पहुंचे। सैन्य माहौल में पले-बढ़े धीरज सेठ ने भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से प्रशिक्षण प्राप्त किया और 1986 में सेना की आर्मर्ड कोर में कमीशन हासिल किया। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने बाद में XXI कोर की भी कमान संभाली, जिसका नेतृत्व कभी उनके पिता भी कर चुके थे।
 
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