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DY Chandrachud: कौन हैं CJI चंद्रचूड़, जिन्होंने दिल्ली और महाराष्ट्र पर सुनाया बड़ा फैसला, जानें पूरी कहानी

Thu, 11 May 2023 01:56 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Thu, 11 May 2023 01:56 PM IST
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सार
जस्टिस चंद्रचूड़ देश के 50वें प्रधान न्यायाधीश यानी  CJI हैं। आइए जानते हैं देश के नए चीफ जस्टिस के बारे में सबकुछ...
 
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Who is Chief Justice Of india Dy Chandrachud, who gave the big decision on Delhi and Maharashtra
चीफ जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आज देश की सर्वोच्च न्यायालय ने दो बड़े फैसले सुनाए। पहला दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ा था तो दूसरा महाराष्ट्र के सियासी उठापटक को लेकर। इन दोनों फैसलों को चीफ जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया।  जस्टिस चंद्रचूड़ देश के 50वें प्रधान न्यायाधीश यानी  CJI हैं। आइए जानते हैं देश के नए चीफ जस्टिस के बारे में सबकुछ...

 

पहले जान लीजिए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के बारे में
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का जन्म 11 नवंबर 1959 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित InLaks स्कॉलरशिप की मदद से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। यहां से उन्होंने मास्टर्स और न्यायिक विज्ञान में डॉक्टरेट (SJD) पूरी की। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल, येल लॉ स्कूल और यूनिवर्सिटी ऑफ विटवॉटरलैंड में लेक्चर भी दिया है। 
 
 

पिता वाईवी चंद्रचूड़ 16वें प्रधान न्यायाधीश थे, वे सबसे लंबे समय तक सीजेआई रहे 
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ (वाईवी चंद्रचूड़) देश के 16वें चीफ जस्टिस थे। वाईवी चंद्रचूड़ 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक करीब सात साल रहा। यह किसी सीजेआई को अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल है। पिता के रिटायर होने के 37 साल बाद उनके बेटे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सीजेआई बने हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के भी इतिहास का पहला उदाहरण जब पिता के बाद बेटा भी सीजेआई बना है। 
 
 

पिता के फैसले को पलट चुके हैं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के कई फैसले चर्चित रहे हैं। इनमें वर्ष 2018 में विवाहेतर संबंधों (व्याभिचार कानून) को खारिज करने वाला फैसला शामिल है। 1985 में तत्कालीन सीजेआई वाईवी चंद्रचूड़ की पीठ ने सौमित्र विष्णु मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 497 को कायम रखते हुए कहा था कि संबंध बनाने के लिए फुसलाने वाला पुरुष होता है न कि महिला। वहीं, डीवाई चंद्रचूड ने 2018 के फैसले में धारा 497 को खारिज करते हुए कहा था 'व्याभिचार कानून महिलाओं का पक्षधर लगता है लेकिन असल में यह महिला विरोधी है। शादीशुदा संबंध में पति-पत्नी दोनों की एक बराबर जिम्मेदारी है, फिर अकेली पत्नी पति से ज्यादा क्यों सहे? व्याभिचार पर दंडात्मक प्रावधान संविधान के तहत समानता के अधिकार का परोक्ष रूप से उल्लंघन है क्योंकि यह विवाहित पुरुष और विवाहित महिलाओं से अलग-अलग बर्ताव करता है।'
 
 

इन हाईकोर्ट में दे चुके हैं सेवाएं
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट आने से पहले कई हाईकोर्ट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में जज बनने से पहले उन्होंने गुजरात, कलकत्ता, इलाहाबाद, मध्य प्रदेश और दिल्ली हाईकोर्ट में एक वकील की तौर पर प्रैक्टिस भी की है। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकील के तौर पर भी प्रैक्टिस की थी। 1998 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया था। 2000 तक वह भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के रूप में काम कर चुके हैं। वकील के तौर पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की लड़ाई लड़ी है। 
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