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C Sadanandan: राजनीतिक हमले में दोनों पैर गंवाए, फिर भी समाजसेवा नहीं छोड़ी; अब राज्यसभा पहुंचे सदानंदन मस्ते

Sun, 13 Jul 2025 10:51 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 13 Jul 2025 10:51 AM IST
सार

राज्यसभा के लिए नामित किए गए सी. सदानंदन मस्ते केरल के भाजपा सदस्य हैं। वे पूर्व में शिक्षक रहे हैं। उन्हें भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। वहीं, सदानंदन को 25 जनवरी, 1994 में राजनीतिक हिंसा के शिकार बनाया गया था। तब उनके पैतृक गांव पेरिंचरी के पास माकपा कार्यकर्ताओं ने उनके दोनों पैर काट दिए थे। पीएम मोदी ने भी सदानंदन मस्ते की प्रशंसा करते हुए उन्हें अन्याय के सामने कभी नहीं झुकने वाला बताया।

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Who is C Sadanandan Maste nominated to Rajya Sabha lost both legs due to political attack News In Hindi
राज्यसभा के लिए मनोनीत सी सदानंदन मस्ते - फोटो : ANI

विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(1)(क) के तहत चार लोगों को राज्यसभा के लिए नामित किया है। इनमें एक नाम है सी सदानंदन मस्ते का, जो केरल के एक शिक्षक हैं और एक दर्दनाक राजनीतिक हमले से बचने के बाद भी शिक्षा और समाज सेवा में सक्रिय रहे हैं। भाजपा के सदस्य सी सदानंदन मस्ते केरल के त्रिशूर जिले से हैं। वे श्री दुर्गा विलासम हायर सेकेंडरी स्कूल, पेरमंगलम में 1999 से सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने गौहाटी विश्वविद्यालय से बीकॉम और कालीकट विश्वविद्यालय से बी.एड की पढ़ाई की है। वे केवल शिक्षक ही नहीं हैं, बल्कि केरल में नेशनल टीचर्स यूनियन के उपाध्यक्ष और उसकी मासिक पत्रिका देशीय अध्यापक वर्था के संपादक भी हैं।

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1994 के हमले में गंवाने पड़े थे दोनों पैर
25 जनवरी 1994 में, तब केवल 30 वर्ष के रहे सदानंदन मस्ते को कन्नूर जिले में उनके घर के पास एक राजनीतिक हमले में बुरी तरह घायल कर दिया गया था। साथ ही उनके दोनों पैर भी काट दिए थे। आरोप है कि यह हमला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कुछ कार्यकर्ताओं ने किया था, क्योंकि सदानंदन मस्ते ने वामपंथ से दूरी बनाकर दूसरी विचारधारा की ओर रुख किया था। इस दर्दनाक घटना के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा और समाज सेवा में सक्रिय बने रहे।
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पीएम मोदी ने भी की सराहना
इतना ही नहीं पीएम मोदी ने भी सदानंदन सराहना करते हुए उन्हें प्ररणादायक बताया। उन्होंने कहा कि सदानंदन मस्ते का जीवन साहस और अन्याय के सामने न झुकने की मिसाल है। शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है। युवा सशक्तिकरण के प्रति उनका समर्पण प्रेरणादायक है।

शिक्षा जगत में योगदान के लिए चुने गए सदानंदन
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 80(3) के तहत राष्ट्रपति उन लोगों को राज्यसभा में नामित कर सकती हैं, जिन्हें शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, कला या समाज सेवा में विशेष ज्ञान या अनुभव हो। सदानंदन मस्ते का शिक्षण क्षेत्र में लंबा अनुभव, सामाजिक सरोकारों में भागीदारी और राजनीतिक हिंसा के बावजूद सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहना, उन्हें इस पद के लिए योग्य बनाता है।


शांति के लिए हमेशा बुलंद की है आवाज
अपनी शुरुआती दौरे से ही सदानंदन मस्ते केरल में राजनीतिक हिंसा के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने बार-बार यह कहा है कि राजनीतिक मतभेद के बावजूद समाज में शांति बनाए रखना जरूरी है। वे भारतीय विचार केंद्र से भी जुड़े हैं, जो केरल में वैचारिक और सामाजिक कार्यों से जुड़ा संगठन है। सदानंदन मस्ते की पत्नी वनीता रानी भी शिक्षिका हैं। उनकी बेटी यमुना भारती बीटेक की छात्रा हैं। उनका पूरा परिवार शिक्षा और समाज सेवा से जुड़ा हुआ है।

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सदानंदन मस्ते कैसे बने प्रेरणा?
राजनीतिक हिंसा में चोट खाने के बावजूद जो हिम्मत और बुलंद आवाज के साथ सदानंदन मस्ते समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं वो उनकी मजबूती को दर्शाता है। उनका राज्यसभा में नामांकन बताता है कि ऐसे जमीनी अनुभव रखने वाले लोगों को भी देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया में शामिल होना आवश्यक है, जिन्होंने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया है बल्कि मुश्किल हालात का सामना करते हुए समाज के लिए काम किया है। सदानंदन मस्ते का सफर प्रेरणा देने वाला है, जैसे एक शिक्षक, जो शारीरिक और मानसिक पीड़ा के बावजूद आज देश की सबसे बड़ी पंचायत, संसद में अपनी भूमिका निभाने जा रहे हैं।

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