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'भारत के रत्न' नानाजी देशमुख... अजातशत्रु बन अपने काम में लगे रहे
Sat, 26 Jan 2019 10:25 AM IST
sapna singla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: sapna singla
Updated Sat, 26 Jan 2019 10:25 AM IST
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नानाजी देशमुख
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राजनीति के शिखर पर पहुंचकर एक झटके से सब छोड़ देना कठिन होता है। आजाद भारत में इसके कम उदाहरण हैं। चार दशक पहले ऐसा नानाजी देशमुख ऐसा ही दुस्साहस करके गांवों के समग्र विकास का मॉडल खड़ा करने के लिए निकल पड़े थे। सब वर्गों और विचारधारा के लोगों के बीच अजातशत्रु बनकर काम किया।
नानाजी ने दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद दर्शन को धरातल पर उतारने का कठिनतम काम करने का बीड़ा उठाया था। उत्तर प्रदेश के गोंडा से शुरू हुई इस विकास यात्रा की पूर्णाहुति चित्रकूट के बहुआयामी ग्रामोदय प्रकल्प से हुई।
राष्ट्रवादी विचारक और राजनेता नानाजी देशमुख को समाज के पुनर्निर्माण के लिए जाना जाता है। उन्होंने यूपी और मध्यप्रदेश के लगभग 500 गांवों की सूरत बदलने का काम किया। वे कहते थे कि 60 साल की उम्र के बाद राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। नानाजी ने भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाया।
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उनका मानना था कि जब भगवान राम अपने वनवास काल के प्रवास के दौरान चित्रकूट में आदिवासियों तथा दलितों के उत्थान का कार्य कर सकते हैं तो वे क्यों नहीं कर सकते। बचपन से किशोरावस्था के बीच उनके मन में भारत के गांवों की दुर्दशा ने गहरी छाप छोड़ी थी। इसलिए नानाजी गांवों के विकास और लोगों के उत्थान के लिए चिंतित रहते थे।
"ग्रामीण विकास में नानाजी देशमुख के महत्वपूर्ण योगदान ने गांवों में रहने वाले लोगों को सशक्त बनाने के लिए आदर्श राह दिखाई। वे दलितों के लिए विनम्रता, करुणा और सेवा का साकार रूप थे। वह सही मायने में भारत रत्न हैं। प्रणब दा और भूपेनदा को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने पर बेहद खुश हूं। प्रणब दा हमारे समय के उत्कृष्ट राजनेता हैं। उन्होंने दशकों तक नि:स्वार्थ और अथक सेवा करते हुए देश के विकास पथ पर अमिट छाप छोड़ी है। हजारिका के गानों और संगीत ने कई पीढ़ियों को अपना दीवाना बनाया है। अपने गानों से न्याय, सद्भाव और भाईचारे का प्रसार करने वाले हजारिका ने भारतीय पारंपरिक संगीत को वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि दी।"
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
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नानाजी ने दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद दर्शन को धरातल पर उतारने का कठिनतम काम करने का बीड़ा उठाया था। उत्तर प्रदेश के गोंडा से शुरू हुई इस विकास यात्रा की पूर्णाहुति चित्रकूट के बहुआयामी ग्रामोदय प्रकल्प से हुई।
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राष्ट्रवादी विचारक और राजनेता नानाजी देशमुख को समाज के पुनर्निर्माण के लिए जाना जाता है। उन्होंने यूपी और मध्यप्रदेश के लगभग 500 गांवों की सूरत बदलने का काम किया। वे कहते थे कि 60 साल की उम्र के बाद राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। नानाजी ने भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाया।
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उनका मानना था कि जब भगवान राम अपने वनवास काल के प्रवास के दौरान चित्रकूट में आदिवासियों तथा दलितों के उत्थान का कार्य कर सकते हैं तो वे क्यों नहीं कर सकते। बचपन से किशोरावस्था के बीच उनके मन में भारत के गांवों की दुर्दशा ने गहरी छाप छोड़ी थी। इसलिए नानाजी गांवों के विकास और लोगों के उत्थान के लिए चिंतित रहते थे।
"ग्रामीण विकास में नानाजी देशमुख के महत्वपूर्ण योगदान ने गांवों में रहने वाले लोगों को सशक्त बनाने के लिए आदर्श राह दिखाई। वे दलितों के लिए विनम्रता, करुणा और सेवा का साकार रूप थे। वह सही मायने में भारत रत्न हैं। प्रणब दा और भूपेनदा को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने पर बेहद खुश हूं। प्रणब दा हमारे समय के उत्कृष्ट राजनेता हैं। उन्होंने दशकों तक नि:स्वार्थ और अथक सेवा करते हुए देश के विकास पथ पर अमिट छाप छोड़ी है। हजारिका के गानों और संगीत ने कई पीढ़ियों को अपना दीवाना बनाया है। अपने गानों से न्याय, सद्भाव और भाईचारे का प्रसार करने वाले हजारिका ने भारतीय पारंपरिक संगीत को वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि दी।"
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री