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कौन है असीमानंद, अजमेर दरगाह ब्लास्ट में क्या थी कथित भूमिका?

Wed, 08 Mar 2017 09:25 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 08 Mar 2017 09:25 PM IST
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who is aseemanand, role in ajmer dargah blast
असीमानंद - फोटो : ‌file photo
अजमेर दरगाह में 2007 में हुए विस्फोट मामले में जांच एजेंसियों ने स्वामी असीमानंद को मुख्य आरोपी बनाया था। जिन्हें बुधवार को एनआईए मामलों की विशेष अदालत ने बरी कर दिया। जांच एजेंसियों ने  आरोप पत्र में इस ब्लास्ट में उनकी साजिशकर्त्ता के रूप में भूमिका गढ़ी थी, जिसे अदालत में साबित करने में ये एजेंसियां विफल रहीं। जांच एजेंसियों के आरोप पत्र में उनके बारे में ये तथ्य दिए गए थें —
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  • असीमानंद का असली नाम नभकुमार सरकार है और वे मूलत: पश्चिमी बंगाल में हुगली के रहने वाले हैं।
  • जांच एजेंसियों के अनुसार वे 1995 में कट्टरपंथी नेता के तौर पर पहली बार सक्रिय हुए। इस दौरान उन्होंने हिंदू संगठनों के साथ मिलकर गुजरात में हिंदू धर्म जागरण और शुद्धिकरण अभियान चलाया। उन्होंने अपनी गतिविधियां संचालित करने के लिए शबरी माता का मंदिर बनाया। इससे पहले वे पुरुलिया में सक्रिय थे। बाद में मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र आदि में सक्रिय हो गए।
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  • वर्ष 1990 से 2007 के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ी संस्था वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत प्रचारक प्रमुख भी रहे है।
  • शबरी धाम में असीमानंद ने 2006 में 10 दिन रहकर अजमेर समेत कई स्थानों पर बम ब्लास्ट की साजिश रची।
  • असीमानंद को अजमेर बम ब्लास्ट समेत विभिन्न मामलों में 19 नवंबर 2010 को हरिद्वार में  गिरफ़्तार किया गया था।
  • जांच एजेंसियों का दावा था कि वर्ष 2011 में उन्होंने मजिस्ट्रेट को दिए इक़बालिया बयान में अजमेर दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अन्य कई स्थानों पर हुए बम विस्फोटों में उनका तथा अन्य कट्टरवादियों का हाथ होना स्वीकार किया था।
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  • असीमानन्द इन बयानों से पलट गए और उन्होंने सफाई दी कि एनआईए के दबाव बनाकर उनसे इस तरह के बयान लिए।
  • पुलिस का कहना है कि वे श्रीकांत पुरोहित के अभिनव भारत और साध्वी प्रज्ञा तथा सुनील जोशी के संगठन वंदे मातरम से भी संबंध रखते है। श्रीकांत मालेगांव में हुए धमाकों के मामले में गिरफ्तार हुए थे।
  • स्वामी असीमानंद पर  अजमेर दरगाह समेत विभिन्न स्थानों पर हुए विस्फोटों की योजना बनाने और इस योजना को धरातल पर लाने वालों को पनाह देने का भी आरोप था। कहा तो यह भी गया था कि उन्होंने मालेगांव की घटना के बाद अभिनव भारत और वंदे मातरम दोनों संगठन की एकजुटता के भी प्रयास किए थे।
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