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कानपुर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, शीर्ष-3 शहरों में वाराणसी भी शामिल

Wed, 10 Apr 2019 10:22 PM IST
तिवारी अभिषेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तिवारी अभिषेक Updated Wed, 10 Apr 2019 10:22 PM IST
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WHO included 14 cities of India in 15 most polluted cities of the world
फाइल फोटो - फोटो : पीटीआई

उत्तर प्रदेश का ‘मैनचेस्टर’ कहलाने वाला कानपुर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में पहले स्थान पर बरकरार है, जहां की वायु गुणवत्ता अति गंभीर स्तर पर पहुंच गई है यानी कानपुर वासी ऑक्सीजन के नाम पर जहरीली हवा की सांस ले रहे हैं। 

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तरफ से 2014 से 2019 के लिए जारी रिपोर्ट में दुनिया के 15 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में इस बार भी भारत के 14 शहर शामिल हैं। इनमें कानपुर के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का फरीदाबाद दूसरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी तीसरे नंबर पर है।
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डब्ल्यूएचओ की ‘राजनेताओं की स्थिति और भारत में एयर क्वालिटी 2014-2019’ रिपोर्ट को दिल्ली स्थित ‘क्लाइमेट ट्रेंड्स’ ने जारी किया है। इसमें देश की राजधानी दिल्ली छठे स्थान पर है, जबकि बिहार के गया को चौथे और पटना को 5वां सबसे प्रदूषित शहर गिना गया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश के चार शहर शामिल हैं, जिनमें राजधानी लखनऊ को 7वें और ताजमहल की नगरी आगरा को 8वें नंबर पर रखा गया है। 
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दुनिया के प्रदूषित शहरों में मुजफ्फरपुर को 9वें, गुरुग्राम को11वें, जयपुर को 12वें, पटियाला को 13वें और जोधपुर शहर को 14वें नंबर पर रखा गया है। चिंताजनक बात जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर को भी इस सूची में 10वां स्थान दिए जाने की है। रिपोर्ट में लखनऊ के प्रदूषण के लिए स्थानीय सांसद व केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, कानपुर के लिए भाजपा सांसद मुरली मनोहर जोशी की चुप्पी पर हैरानी जताई गई है, जबकि पटना के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि 2014 से 2019 के बीच उनकी दिलचस्पी अपने संसदीय क्षेत्र की हवा से ज्यादा दिल्ली की ‘स्मॉग पॉलीटिक्स’ में रही।

विकास कार्यों ने बिगाड़ी बनारसी हवा

प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी में अचानक आई नई-नई परियोजनाओं ने ‘बनारसी हवा’ की चाल बिगाड़ने में अहम रोल निभाया है। इस शहर में चल रहे निर्माण कार्यों से उठती धूल के कारण अचानक आम जनता में एलर्जी, सांस की समस्या के शिकार लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, बनारस की हवा उत्तर प्रदेश के किसी भी अन्य शहर के मुकाबले तेजी से प्रदूषित हुई है। 

चिकित्सकों ने भी पिछले कुछ सालों में यहां प्रदूषित हवा के कारण बीमार होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ने की बात मानी है। वाराणसी में दिसंबर-2017 में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 490 पर था, जिसे गंभीर श्रेणी का माना जाता है। दिसंबर-2018 में यह थोड़ा सुधरकर 384 पर रहा, लेकिन इस आंकड़े को भी बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।


दिल्ली ‘लापरवाही’ का शिकार

रिपोर्ट के मुताबिक, 7 सांसदों और 70 विधायकों की सरकार वाली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इन चयनित जनप्रतिधियों की ‘लापरवाही और सुस्ती’ का अनुपम उदाहरण है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि दिल्ली में कुछ तात्कालिक राहत वाले उपाय हुए हैं, लेकिन वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना नहीं है। समूचे दिल्ली-एनसीआर की बरबादी के लिए बड़े पैमाने पर भवन निर्माण, कूड़ा जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने को जिम्मेदार माना गया है। 

यह हैं प्रदूषित भारतीय शहर

 
वैश्विक क्रम शहर राज्य
1 कानपुर उत्तर प्रदेश
2 फरीदाबाद   हरियाणा
3 वाराणसी     उत्तर प्रदेश
4 गया    बिहार
5 पटना  बिहार
6  दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी
7 लखनऊ    उत्तर प्रदेश
8 आगरा  उत्तर प्रदेश
9  मुजफ्फरपुर बिहार
10 श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर
11 गुरुग्राम   हरियाणा
12  जयपुर     राजस्थान
13    पटियाला   पंजाब
14 जोधपुर     राजस्थान



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