डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक ने कहा: टीकाकरण अभियान को पूरी दुनिया में बढ़ाने की जरूरत, महामारी संधि पर हो रही चर्चा
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर पूरी दुनिया में बढ़ती चिंता के बीच डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक ने टीकाकरण अभियानों को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने की अपील की है।
विस्तार
कोरोना वायरस के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ते मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने सोमवार को कोविड-19 टीकाकरण को पूरी दुनिया में विस्तारित करने और मजबूती देने का आह्वान किया। उन्होंने यह बात महाराष्ट्र के पुणे में आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज में आयोजित पैनेक्स-21 (PANEX-21) के पूर्ण सत्र में वर्चुअल माध्यम से कही।
डॉ. स्वामीनाथन ने कहा कि टीकाकरण को और बढ़ाने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वंचित लोगों को भी इस महामारी से सुरक्षा प्रदान की जा सके। इससे कोरोना के चलते होने वाली मौतों की संख्या में मरीजों के अस्पताल में भर्ती कराने के आंकड़ों में भी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि हम पूरी दुनिया में टीकाकरण अभियान को जितना संभव हो सके उतना अधिक विस्तारित करना चाहते हैं।
टीकाकरण के बावजूद संक्रमित कर सकता है ओमिक्रॉन
उन्होंने कहा, 'डेल्टा वैरिएंट के मामले में नियमित टीकों के असर में वायरस के प्रति थोड़ी गिरावट देखी है, लेकिन ओमिक्रॉन के मामले में इसमें और की दर्ज की जा रही है। इसका मतलब है कि टीकाकरण के बाद भी ओमिक्रॉन वैरिएंट हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को चकमा दे सकता है और हमें संक्रमित कर सकता है। लेकिन टीकाकरण के जरिए बीमारी की गंभीरता को काफी हद कर कम किया जा सकता है।'
वैश्विक महामारी संधि को लेकर की जा रही है बातचीत
इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि 'वैश्विक महामारी संधि' (Pandemic Treaty) को लेकर वैश्विक स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। डॉ. स्वामीनाथन ने कहा कि कोरोना जैसे अन्य संकटों से निपटने के लिए यह संधि सभी देशों को हथियारों और गोला-बारूद, स्वचालित संधियों और जैविक हथियारों के उपयोग पर एक साथ बांधती है, जिनके इस्तेमाल की इजाजत वैश्विक कारणों से नहीं है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में ही डब्ल्यूएचओ ने इसका इलाज खोजने पर काम शुरू कर दिया था। चीन और इटली कुछ देशों में क्लिनिकल ट्रायल किए गए थे। जहां पहली लहर के दौरान मृत्यु दर बहुत अधिक थी। हमने कुछ सप्ताह के अंदर की 30 देशों में ट्रायल शुरू कर दिए थे। भारत भी इन ट्रायलों का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा था और इसमें उसका कापी अहम योगदान रहा है।
टीकाकरण न कराने वाले लोगों को ओमिक्रॉन से गंभीर संक्रमण का अधिक खतरा- डॉ कोएत्जी
कोविड-19 के ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़ते मामलों के बीच, विशेषज्ञ ने आगाह किया है कि नया स्ट्रेन टीकाकरण वाले लोगों में गंभीर लक्षण प्रकट नहीं करता है, लेकिन यह बिना टीकाकरण वाले लोगों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। जैसा कि भारत ने अब तक लगभग 161 ओमिक्रॉन मामलों की सूचना दी है, जिनमें से अधिकांश में केवल हल्के लक्षण दर्ज किए गए हैं। हालांकि टीकाकरण नहीं कराने वाले लोग मामले की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, जो आईसीयू में भर्ती का कारण बन सकती है, यह अभी भी चिंता का एक विषय है।
इसी आधार पर अपना अनुभव साझा करते हुए, पहली बार ओमिक्रॉन की पहचान करने वाली दक्षिण अफ्रीकी मेडिकल एसोसिएशन की चेयरपर्सन और वरिष्ठ डॉक्टर एंजेलिक कोएत्जी ने कहा, "मुझे ऐसा नहीं लगता। अगर यहां दक्षिण अफ्रीका के समान पैटर्न का पालन नहीं किया जाता है। मुझे यकीन नहीं है कि आपके डॉक्टर वर्तमान में ओमिक्रॉन की गंभीरता के बारे में क्या कह रहे हैं, लेकिन मैंने वास्तव में ओमिक्रॉन का गंभीर मामला नहीं देखा है। उम्मीद है, वे केवल हल्के मामलों को ही देख रहे हैं जैसा कि हमने किया था। लेकिन बिना टीकाकरण वाले लोगों को एक गंभीर संक्रमण हो सकता है और हो सकता है अस्पतालों में भर्ती करना पड़े।"
डॉ कोएत्जी ने कहा, "वह केवल बिना टिकाकरण वाले लोग होंगे, जिन्हें आईसीयू में भर्ती होना पड़ सकता है। मेरा मानना है कि हमारे देश में टीकाकरण वाले लोगों में गैर-टीकाकरण वाले लोगों की तुलना में हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। लेकिन आज वह तस्वीर बदल गई है। आज, मैंने देखा कि बहुत सारे टीकाकरण वाले लोग आते हैं। उन लोगों में दोबारा संक्रमित लोग या ऐसे लोग होते है जो पहले कोविड से संक्रमित नहीं हुए हैं।