फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   when things getting out of hand then govt woke said former DGP on unnao case

उन्नाव केस पर बोले पूर्व डीजीपी, जब पानी सिर से उतर गया तो जाग रहे हो...

Thu, 01 Aug 2019 02:43 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Thu, 01 Aug 2019 02:43 PM IST
सार

  • पूर्व डीजीपी ने कहा कि जब पानी सर से उतर गया तो जाग रहे हो
  •  सीबीआई पर लगाया लापरवाही का आरोप
  • कहा- जब पीड़िता का परिवार खत्म हो रहा है तब हम न्याय की बात कर रहे हैं

विज्ञापन
when things getting out of hand then govt woke said former DGP on unnao case
prakash singh (फाइल फोटो) - फोटो : social media

विस्तार

किसी भी केस में घटना स्थल पर पहुंचने वाली पहली एजेंसी कौन होती है, पुलिस होती है। सबसे पहले सबूत या गवाह किसके सामने आते हैं, पुलिस के सामने आते हैं। ऐसे में किसी भी केस को उसके अंजाम तक पहुंचाने में पुलिस सक्षम एजेंसी होती है, बशर्ते वह अपना काम ईमानदारी से करे तो। सीबीआई तो बाद का विकल्प है। 

विज्ञापन


इन दोनों के बीच सरकार होती है, अगर पहले दिन से सरकार यह सोच ले कि इस केस को रफा-दफा करना है तो फिर कोई भी एजेंसी कुछ नहीं कर सकती। यूपी और असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक, बीएसएफ के डीजी रहे और पुलिस सुधारों के अग्रणी प्रकाश सिंह ने उन्नाव केस पर अमर उजाला डॉट कॉम के साथ विशेष बातचीत की है।
विज्ञापन


उनका साफ कहना है कि जब पानी सिर से उतर गया तो जाग रहे हो। इस केस में सीबीआई, पुलिस और राज्य सरकार की घोर लापरवाही सामने आई है। प्रकाश सिंह कहते हैं, अगर शुरु से ही पुलिस इस केस में ईमानदारी से अपना काम करती तो यह केस कब का सुलझ गया होता। स्थानीय पुलिस के पास पर्याप्त गवाह और सबूत थे, लेकिन उसने कुछ नहीं किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सीबीआई को केस चला गया। जिस तेजी से काम होना चाहिए था, सीबीआई उसमें पीछे रह गई। सभी एजेंसियों को यह मालूम था कि इस केस के गवाहों को डराया-धमकाया जा रहा है, मगर किसी ने कोई कदम नहीं उठाया। कम से कम दिल्ली हाईकोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार, गवाहों को सुरक्षा दी जा सकती थी, लेकिन नहीं दी गई।

पीड़िता को सुरक्षा देने की बजाए उसकी आवाजाही की जानकारी आरोपियों तक पहुंचा दी जाती। पूर्व डीजीपी ने हैरानी जताते हुए कहा, बड़े से बड़े केस में अपना दुख दर्द भूलकर लोग सीबीआई पर भरोसा जताने लगते हैं। इस केस में सीबीआई का काम भी ठीक नहीं रहा। केस की जांच से लेकर चार्जशीट तक, हर कदम पर देरी हुई है।

जाँच में कई पहलू छूट गए हैं। एक साल से सीबीआई जाँच में ही लगी है, जबकि बहुत से तथ्य सामने रहे हैं। किसी ने पूछा कि ये देरी क्यों हो रही है।

जब पीड़िता का परिवार खत्म हो रहा है तब हम न्याय की बात कर रहे हैं...

यूपी सरकार, सीबीआई और पुलिस को इस केस के बारे क्या कुछ मालूम नहीं था, सब कुछ मालूम था। सरकार की मंशा क्या रही है, सब जानते हैं। रेप पीड़िता का पिता पुलिस हिरासत में मर जाता है, उसके चाचा को पुलिस जेल में डाल देती है। इसके बाद पीड़िता पर समझौता करने का दबाव पड़ता है। 

इस बाबत पीड़ित पक्ष की ओर से दर्जनों पत्र एजेंसियों को लिखे जाते हैं। जब समझौता करने से पीड़िता इन्कार कर देती है तो सड़क हादसा हो जाता है। बतौर प्रकाश सिंह, मैं पूछता हूं, जब न्याय लेने के लिए रेप पीड़िता का परिवार खत्म हो रहा है तब हम न्याय की बात कर रहे हैं। 


वह पीड़िता ख़ुद अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रही है। खैर, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप कर यह उम्मीद जता दी है कि अब न्याय होगा, भले ही देरी से सही। अगर सभी मामले दिल्ली ट्रांसफर होते हैं तो यह भी अच्छी बात है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed